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संत पापा का रोमासुमुले स्यूच की माता मरियम तीर्थस्थल में ख्रीस्तयाग संत पापा का रोमासुमुले स्यूच की माता मरियम तीर्थस्थल में ख्रीस्तयाग   (ANSA)

मानव जीवन एक तीर्थयात्रा

संत पापा ने फ्रांसिस ने रोमानिया की अपनी प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन रोमासुमुले स्यूच की माता मरियम तीर्थस्थल में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

रोमानिया, शनिवार, 01 जून 2019 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने अपने प्रवचन में कहा कि मरियम के इस तीर्थ में आते हुए मैं आपके विश्वास और सुन्दर इतिहास हेतु ईश्वर का शुक्रिया अदा करता हूँ। हम यहाँ माता मरियम से उनकी संतानों की तरह मिलने आते और एक दूसरे को अपने भाई-बहनों की तरह स्वीकारते हैं। तीर्थस्थल कलीसिया के लिए अपने में “संस्कारों” की तरह है जो ईश्वरीय प्रजा के विश्वास की यादगारी को सजीव बनाये रखती है, जहाँ वे अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों में सदैव जीवन के जल की आस लगाये रहते जो जीवन में नयी आशा को जाग्रत करती है। वे हमारे लिए समारोह और त्योहार, आंसुओं और निवेदन के स्थल होते हैं। हम अपनी माता के चरणों में चंद शब्दों के साथ आते हैं जिसे वह हमारी ओर नजरें फेरे और उनकी नजरों में हम येसु को पा सकें जो हमारे जीवन के मार्ग, सत्य और जीवन हैं।(यो.14.6)

हम तीर्थयात्री हैं

संत पापा ने कहा कि हम यहाँ तीर्थयात्रियों के रुप में आये हैं। यहाँ हर साल पेंतेकोस्त रविवार के पहले शनिवार को आप तीर्थ करते और अपने पूर्वजों के व्रत का सम्मान करते हुए माता मरियम की प्रतिमा के समक्ष ईश्वर पर विश्वास और माता मरियम के प्रति अपनी श्रद्धा को मजबूत करते हैं। यह ट्रांसिल्वेनिया की विरासत का वार्षिक तीर्थ है लेकिन यह रोमानिया और हंगरी की धार्मिक रीतियों का भी सम्मान है। दूसरे धर्मों के लोगों भी इसमें भाग लेते हैं जो इसे वार्ता, एकता और भ्रातृत्व की एक निशानी बनाती है। यह हमें सजीव विश्वास और आशा भरे जीवन का साक्ष्य देने हेतु निमंत्रण देता है।

तीर्थयात्रा करना हमें इस बात की याद दिलाती है कि हम लोगों के संग अपने घर की ओर लौट रहें हैं। पवित्र और विश्वासी ईश्वरीय प्रजा मरियम के साथ अपने तीर्थ में ईश करूणा का गान करते हुए आगे बढ़ते हैं। गलीलिया के काना में मरियम ने येसु को चमत्कार करने हेतु निवेदन किया, वे हर तीर्थ में हमारी ओर निगाहें फेरती और न केवल अपने बेटे वरन हम सभों से भी निवेदन करती है जिससे हम अपने को भ्रातृत्व प्रेम, उन दुःख भरी आवाजों से विमुख न करें जो विभाजन और विखंडन लाती है। अतीत की दुखद घटनाएं और जटिल परिस्थितियाँ को हम न भूलें लेकिन वे हमारे जीवन की राह को अवरूध न करें या हमें भाई-बहनों के रुप में एक साथ मिलकर जीवनयापन की चाह में एक बहाना न बने।

तीर्थयात्रा, रहस्य की खोज करना

तीर्थयात्रा करना हममें इस बात को अनुभव करने हेतु प्रेरित करता है कि हम एक साथ यात्रा करने हेतु बुलाये गये हैं जहाँ हम ईश्वर से इस कृपा हेतु निवेदन करते हैं कि हम अपने अतीत और वर्तमान के क्रोध और अविश्वास को बदल कर उन्हें मित्रता के नये अवसर बनायें। इसका अर्थ अपने आराम और सुरक्षा भरी जिंदगी से बाहर निकलना और उस स्थान को जाना है जिसे ईश्वर हमें देते हैं। तीर्थयात्रा करने का अर्थ एक साथ जीवन जीने के “रहस्य” की खोज करते हुए वार्ता करने का सहास करना है, दूसरों से मिलने हेतु नहीं डरना तथा दूसरे का आलिंगन करते हुए एक दूसरे की सहायता करना है। तीर्थयात्रा करना लोगों की भीड़ में अपने को शामिल करना है जो हमें भ्रातृत्व की सच्ची अनुभूति प्रदान करती है, यह अपने को उस दल में शामिल करना है जो साथ रहता, एकात्मकता में इतिहास का निर्माण करता है।(एभनजेली गौदियुम 87)

संत पापा ने कहा कि तीर्थयात्रा को देखना, कुछ बातों की उपस्थिति या अनुस्थिति पर अधिक ध्यान देना नहीं है लेकिन यह सारी चीजें पर गौर करना है जो हमारा इंतजार करती जिनसे हम अपने को दूर नहीं रख सकते हैं। यह ईश्वर पर विश्वास करना है जो हमारे पास आते औऱ अभी भी हमारे बीच में हैं। वे हमें प्रेरित करते, एकता, भ्रातृत्व, अच्छाई की चाह, सत्य और न्याय को हममें जागृत करते हैं।(एभनजेली गौदियुम71) यह हमें इस बात के लिए आश्वस्त करता है कि अतीत में भटकने वाला कल नायक बन सकता है और वर्तमान का नायक कल अपने में नहीं भटकेगा। यह हमसे एक निश्चित कुशलता की मांग करती है, जो भविष्य रुपी धागों को बुनने की कला है। इसी के लिए आज हम सभी यहाँ हैं और हम एक साथ कहते हैं माता मरियम हमें भविष्य को बुनना सीखा।

मरियम की तरह हाँ कहें

माता मरियम के इस तीर्थ में हम उनके और ईश्वर के रहस्यमय बुलावे की ओर अपनी दृष्टि फेरे। मरियम, नाजरेत की युवा नारी, जो गलीलिया के एक छोटे शहर से आती थी स्वर्गदूत के संदेश को “हां” कहने के द्वारा करुणा की क्रांति को स्थापित किया। (एभनजेली गौदियुम 88) ईश्वर का रहस्य छोटों को देखता है और शक्तिशाली को भ्रमित करता है, वे हमें मरियम की तरह हाँ कहने को प्ररित करते हैं जिससे हम मेल-मिलाप के राह में आगे बढ़ सकें।

ईश्वर जोखिम लेने वालों को कभी निराश नहीं करते हैं। हम अपनी यात्रा करें और एक साथ यात्रा करें तथा सुसमाचार के खमीर को अपने में विकासित होने दें जो सारी चीजों में समाहित होता और हमारे लोगों को मुक्ति की खुशी से भर देता है।

01 June 2019, 16:41