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रोमानिया में संत पापा रोमानिया में संत पापा 

माता मरियम अपने बच्चों की आशा बढ़ाती है

संत पापा फ्राँसिस ने रोमानिया की प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन लासी स्थित सांस्कृतिक भवन के प्राँगण में रोमानिया के परिवारों एवं युवाओं से मुलाकात की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

लासी, शनिवार, 1 जून 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने रोमानिया की प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन लासी स्थित सांस्कृतिक भवन के प्राँगण में रोमानिया के परिवारों एवं युवाओं से मुलाकात की।

संत पापा ने उनसे मुलाकात कर खुशी जाहिर करते हुए कहा, "मैं आपके साथ सहजता का अनुभव कर रहा हूँ। आपके स्वागत एवं साक्ष्यों के लिए धन्यवाद।"

1 जून को रोमानिया में बाल दिवस मनाया जाता है। संत पापा ने उसकी याद कर बच्चों के लिए ताली बजाया एवं उनके लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया तथा माता मरियम से प्रार्थना की कि वे अपनी आंचल तले उन्हें सुरक्षित रखें। उन्होंने कहा, "येसु ने बच्चों को शिष्यों के बीच रखा था, हम भी उन्हें अपने बीच रखना चाहते हैं। हम अपने समुदायों में उनके प्रति स्नेह को पुनः पुष्ट करना चाहते हैं जैसा कि येसु ने किया था तथा उन्हें भविष्य के अधिकार का हरसंभव आश्वासन देना चाहते हैं।

 पवित्र आत्मा ने हमें एक साथ यहाँ बुलाया है

संत पापा ने प्रांगण में उपस्थित परिवारों में बच्चों, युवाओं, दम्पतियों, धर्मसमाजियों, विभिन्न धर्मों एवं संस्कृतियों के वयोवृद्धों पर गौर करते हुए, "पवित्र आत्मा ने हमें एक साथ यहाँ बुलाया है तथा सहायता दे रहा है कि हम एक साथ होने की सुन्दरता की खोज करें और एक साथ यात्रा कर सकें। हरेक की अपनी भाषा एवं परम्परा है किन्तु आप यहाँ आकर सभी खुश हैं। माता-पिता अपने बच्चों को देखकर खुश हैं उसी तरह बच्चे भी अपने माता-पिता के साथ खुश हैं, निश्चय ही, स्वर्ग के सभी बच्चे भी खुश होंगे जो यहाँ होते।

संत पापा ने कहा कि यहाँ नये पेंतेकोस्त का अनुभव हो रहा है जहाँ पवित्र आत्मा विविधताओं को स्वीकार कर, आशा के रास्ते को खोलने की शक्ति प्रदान कर रहे हैं। यह वही रास्ता है जिसको प्रेरितों ने हजारों वर्षों पूर्व अपनाया था। आज हम उनका स्थान लेने तथा अच्छे बीज बोने के लिए बुलाये गये हैं।   

एक साथ यात्रा

उन्होंने स्वीकार किया कि एक साथ यात्रा करना आसान नहीं है। यह एक उपहार है जिसको हमें मांगना चाहिए। यह एक कलात्मक क्रिया है, एक दूसरे को अर्पित करने के लिए एक सुन्दर उपहार किन्तु हम इसकी शुरूआत कहाँ करें। उन्होंने एक बुजूर्ग दम्पति की ओर इशारा करते हुए कहा कि त्याग एवं समर्पण, कार्य एवं प्रार्थना के साथ जब प्रेम की जड़ें गहरी होती हैं तब यह फल लाता है। जैसा कि नबी योएल कहते हैं, जब युवा और बुजूर्ग एक साथ मिलते हैं तब वयोवृद्ध भी स्वप्न देखने से नहीं डरते।  (योएल. 2:28 [3:1])

मूल को न भूलें

हम स्वप्न देखते हैं कि हम एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर सकें जिसमें हम अपने मूल को न भूलें। हम चाहते हैं कि हमारे लोगों में से कोई भी अपने मूल को न भूले। आप भविष्य को देखते हैं और अपने बच्चों के लिए द्वार खोलते हैं तब आप अपने मूल को न भूलें। संत पौलुस ने भी तिमोथी को यही सलाह दी थी कि वह अपनी माता एवं दादी के विश्वास को भी सजीव रखे। "यह विश्वास पहले तुम्हारी नानी लोइस तथा तुम्हारी माता यूनीके में विद्यमान था और मुझे विश्वास है, अब तुम में भी विद्यमान है।" ( 2 तिम. 1:5-7)

संत पापा ने कहा कि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो उन्हें अपने परिवार के मूल्यों एवं शिक्षाओं को नहीं भूलना चाहिए। प्रज्ञा एवं विश्वास की प्राप्ति भी परिवार से ही होती है। उन्होंने कहा कि विश्वास एक वरदान है जो उस सुन्दर एवं प्रगाढ़ निश्चितता को बनाये रखता है कि हम ईश्वर के प्रिय संतान हैं। ईश्वर हमें पिता तुल्य प्रेम करते हैं। हर व्यक्ति का जीवन उनका है। अतः हम सभी एक-दूसरे के भाई-बहन हैं किन्तु शैतान हमें विभाजित करता है, बिखेरता है और अलग कर देता है। वह कलह और अविश्वास बोता है। वह चाहता है कि हम एक-दूसरे से दूर रहकर जीयें। जबकि पवित्र आत्मा हमें याद दिलाता है कि हम गुमनाम, काल्पनिक और चेहरा रहित, बिना इतिहास एवं बिना पहचान वाले प्राणी नहीं हैं। हम खोखले अथवा सतही नहीं हैं। पवित्र आत्मा हमें एक साथ लाता है हमें जोड़ता तथा हमारे संबंध को मजबूत करता है। इस संबंध का मूल इसी में है कि हम एक-दूसरे के साथ हैं और आपस में एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।

युवा तभी विकास करते हैं जब वे सचमुच प्यार किये जाते हैं। हम सभी बढ़ते हैं जब हम प्यार किये गये महसूस करते हैं क्योंकि प्रेम हमें अपने आप से बाहर निकालता है।

परिवार के मूल्यों को याद रखें

संत पापा ने पुनः स्मरण दिलाया कि हम एक साथ यात्रा करते हुए जहाँ कहीं भी जाएँ किन्तु परिवार के मूल्यों को नहीं भूलें। यह बात उस घटना की याद दिलाती है जब सिहास्त्रिया मठ के मठवासी गलाकशन एली एक दिन, पहाड़ पर घास चरते भेड़ों के बीच गुजर रहे थे तब वे एक सन्यासी से मिले, जिनको वे जानते थे। तब उन्होंने उनसे पूछा, पिता गलाक्शन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का अंत कब होगा? तब उस सन्यासी ने गहरी सांस लेते हुए उत्तर दिया, "क्या तुम दुनिया के अंत के बारे जानना चाहते हो? जब पड़ोसियों के बीच कोई रास्ता नहीं होगा अर्थात् जब भाई-बहनों, रिश्तेदारों, विभिन्न ख्रीस्तीय समुदायों एवं लोगों के बीच ख्रीस्तीय प्रेम एवं आपसी समझदारी नहीं रह जाएगी। जब लोग अपना प्रेम पूरी तरह खो देंगे तब सचमुच दुनिया का अंत हो जाएगा क्योंकि प्रेम के बिना और ईश्वर के बिना कोई भी व्यक्ति इस पृथ्वी पर नहीं जी सकता।

हमारा जीवन कमजोर होना और सूखना शुरू कर देता है, धड़कनें रूक जाती हैं और व्यक्ति मुर्छित हो जाता है, बुजूर्ग स्वप्न देखना और युवा भविष्य की कल्पना करना बंद कर देते हैं, जब पड़ोसियों के बीच रास्ते गायब हो जाते क्योंकि प्रेम और ईश्वर के बिना इस पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता।

चुनौतियाँ

संत पापा ने कहा कि निश्चय ही अनेक चुनौतियाँ हैं जो हमें निरूत्साहित कर हमें अपने आप में बंद कर सकते हैं। हम इन चीजों से इन्कार भी नहीं कर सकते हैं। चुनौतियाँ हैं किन्तु उसके कारण हम अपने विश्वास को नहीं भूल सकते। विश्वास ही हमें सबसे बड़ी चुनौती देता है। एकाकीपन से दूर रहने और अपना उत्तम प्रदान करने की चुनौती। प्रभु हमें पहली चुनौती देते हैं। वे हमें बतलाते हैं कि सबसे बुरी स्थिति तब उत्पन्न होती है जब पड़ोसियों के बीच कोई रास्ते नहीं रह जाते, जब रास्ते पर खाई ही अधिक दिखाई पड़ते हैं। प्रभु हमें वह संगीत प्रदान करते हैं जो सभी को मंत्रमुग्ध करनेवाले सुंदर संगीत से अधिक सुरीला होता है।  

प्रभु हमें बुलाहट देते हैं, जो एक चुनौती है कि हम अपनी क्षमताओं एवं कुशलताओं को निखारें तथा उसे दूसरों की सेवा में अर्पित करें। वे हमारी स्वंतत्रता को चुनने की स्वतंत्रता के रूप मे उपयोग करने के लिए कहते हैं, उनकी प्रेम करने, सामना करने एवं देखने की योजना को हाँ कहने के लिए आमंत्रित करते हैं। यह स्वतंत्रता चीजों का उपयोग करने और उन्हें खरीदने की आजादी से कहीं बढ़कर है। यह हमें सक्रिय बनाता है खाईयों को भरने तथा नये रास्तों को खोलने के लिए, यह याद दिलाने के लिए कि हम एक-दूसरे के बेटे –बेटियाँ और भाई-बहन हैं।

यात्रा करने के रास्ते को खोलना

संत पापा ने स्मरण दिलाया कि मध्य युग में देश के इसी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक केंद्र से त्रांसिलवाना के रास्ते से संतियागो दी कम्पोस्तेला गये थे, आज विश्व के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी यहाँ आते हैं। संत पापा ने कहा कि यहाँ दो बड़ी चीजें हैं – पहला, यह ऐतिहासिक शहर अपने खुलेपन एवं रचनात्मकता के लिए प्रसिद्ध है तथा दूसरा, यह विश्व भर के युवाओं की मेजबानी कर सकता है। उन्होंने कहा कि वे दो बड़े मिशन को पूरा करते हैं, एक साथ यात्रा करने के रास्ते को खोलते हैं तथा नबी के दर्शन से उसमें आगे बढ़ते हैं जो प्रेम एवं ईश्वर के बिना संभव नहीं हैं। आज यहां से यूरोप एवं विश्व के विभिन्न देशों की ओर नये रास्ते खोले जो सकते हैं। संत पापा ने कहा, "आप 21वीं सदी के तीर्थ यात्री हैं जो उन रिश्तों की कल्पना कर सकते हैं जो हमें एकता के सूत्र में बांधता है।  

संत पापा ने कहा कि विश्वास केवल शब्दों से हस्तांतरित नहीं की जा सकती है किन्तु इसके लिए हमारी माताओं और दादियों के समान भाव, दृष्टि एवं प्रेम की भी आवश्यकता है।  

संत पापा ने निमंत्रण दिया कि जहाँ शोर है वहाँ हम सुनने का प्रयास करें, जहाँ संदेह है वहां सामंजस्य लाने का प्रयास करें, जहाँ अनिश्चितता है वहाँ स्पष्टता लायें, जहाँ बहिष्कार है वहाँ एकात्मता लायें। हम दूसरों की सत्यनिष्ठा पर ध्यान दें। जहाँ गुस्सा है वहाँ शांति लायें, जहाँ गलती है वहाँ सच्चाई लायें। इस तरह हम भाई-बहनों के लिए रास्ता खोलें।

संत पापा ने कहा कि रोमानिया ईश्वर की माता की वाटिका है और इस मुलाकात में मैंने इसे महसूस किया है। मरियम हमारी माता है जो अपने बच्चों को स्वप्न देखने के लिए प्रोत्साहन देती है और उन्हें आशा प्रदान करती है। उनके परिवारों में खुशी लेकर आती है। वह कोमल और सच्ची माता है जो हमें प्रेम करती है। आइये, हम उन्हें अपने युवाओं, परिवारों और कलीसिया के भविष्य को समर्पित करें।

01 June 2019, 18:21