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यूरोप में बुलाहट की प्रेरिताई हेतु आयोजित सम्मेलन के 80 प्रतिभागियों से मुलाकात करते संत पापा यूरोप में बुलाहट की प्रेरिताई हेतु आयोजित सम्मेलन के 80 प्रतिभागियों से मुलाकात करते संत पापा  (ANSA)

कलीसिया को बुलाहट की आवश्यकता है, संत पापा

संत पापा ने सम्मेलन के प्रतिभागियों को सिनॉड के धर्माध्यक्षों की इच्छा अनुसार युवाओं के बीच उनके कार्यों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने अपने प्रेरितिक प्रबोधन क्रिस्तुस विवित की याद दिलायी जिसमें उन्होंने युवाओं को पवित्रता में बढ़ने एवं अपनी बुलाहट के प्रति समर्पित होने हेतु प्रेरित किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 जून 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने 6 जून को वाटिकन स्थित आमसभा परिषद भवन में यूरोप में बुलाहट की प्रेरिताई हेतु आयोजित सम्मेलन के 80 प्रतिभागियों से मुलाकात की।

संत पापा ने सम्मेलन के प्रतिभागियों को सिनॉड के धर्माध्यक्षों की इच्छा अनुसार युवाओं के बीच उनके कार्यों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने अपने प्रेरितिक प्रबोधन क्रिस्तुस विवित  की याद दिलायी जिसमें उन्होंने युवाओं को पवित्रता में बढ़ने एवं अपनी बुलाहट के प्रति समर्पित होने हेतु प्रेरित किया है।

संत पापा ने प्रतिभागियों को सम्बोधत कर कहा, "मैं आपको प्रोत्साहन देता हूँ कि आज आप जो एक "पुराने महाद्वीप" में कार्य करते हैं यह विश्वास कर सकें कि प्रभु जिनका स्पर्श करते हैं वे युवा, नवीन एवं जीवन से भरपूर हो जाते हैं।"

संत पापा ने उनके सामने तीन दृष्टिकोणों को रखा-  पवित्रता, एकता और बुलाहट।

पवित्रता

संत पापा ने कहा कि बुलाहट पर चर्चा करते हुए हमेशा युवाओं की याद की जाती है क्योंकि यही वह समय है जब जीवन के लिए चुनाव किये जाते और ईश्वर के बुलावे का प्रयुत्तर दिया जाता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि बुलाहट एक आजीवन यात्रा है। निश्चय ही, हम इसके द्वारा ईश्वर के बुलावे का प्रत्युत्तर देने का प्रयास करते हैं किन्तु हम अपने वयस्क काल में फलने-फूलने और अच्छा काम करने का भी चुनाव करते हैं। हमारा जीवन उदारता के साथ फल उत्पन्न करने के लिए है जो पवित्रता के लिए निमंत्रण देती है। प्रभु हम सभी को बुलाते हैं कि हम अपने-अपने तरीके से पवित्रता को जीने का प्रयास करें। कई बार हम बुलाहट को अपना साहसिक कार्य समझने लगते हैं जबकि कोई भी व्यक्ति अकेला मुक्ति प्राप्त नहीं कर सकता। हम एक साथ संतों की राह पर आगे बढ़ सकते हैं क्योंकि हमारा जीवन दूसरों के जीवन से जुड़ा हुआ है।     

एकता

संत पापा ने कहा कि प्रेरितिक कार्य को एक साथ (सिनॉडल) करना चाहिए। एक साथ चलने की शुरूआत एकता से ही होती है। हम इसे भाईचारा में बढ़ने, आपसी सम्मान को प्रोत्साहन देने, प्रत्येक व्यक्ति की क्षमताओं को महत्व देने तथा यह विश्वास करने के द्वारा प्रकट कर सकते हैं कि पुनर्जीवित ख्रीस्त दु˸खों और घावों के द्वारा भी चमत्कार करते हैं।

कलीसिया में एकता नई बुलाहटों को उत्पन्न करती है। संत पापा ने खेद प्रकट किया कि हमारे समुदायों में याजकों एवं परिवारों के बीच दुनियावी सोच रहता है जिसके कारण विभाजन उत्पन्न होते हैं। हम एक खुला, सक्रिय एवं समावेशी समुदाय का निर्माण करने के द्वारा ही भविष्य के चेहरे का निर्माण कर सकते हैं, जिसके लिए युवा तरस रहे हैं।

बुलाहट

बुलाहट एक अप्रचलित शब्द नहीं है किन्तु इसे सिनॉड में बरम्बार प्रयोग किया गया है। हमें इसे समस्त ईश प्रजा, हमारी धर्मशिक्षा एवं सुसमाचार प्रचार के संदर्भ में देखना चाहिए और खासकर, दूसरों के साथ हमारी व्यक्तिगत मुलाकात के आधार पर, क्योंकि यही हमारे सुसमाचार प्रचार का पहला चरण है। संत पापा ने गौर किया कि किसी-किसी समुदाय में बुलाहट शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता है क्योंकि युवा इससे दूर भागते हैं। उन्होंने कहा कि यह असफलता का चिन्ह है। हम सभी लोकधर्मियों एवं समर्पित लोगों को चाहिए कि हम ईश्वर के साथ उनकी मुलाकात को प्रज्वलित करें, उनके जीवन में बुलाहट की खुशी उत्पन्न करें एवं उनमें मुक्ति का साक्ष्य अपने जीवन से देने की क्षमता जागृत करें।  

आनन्द

आनन्द हमारे खुश होने का चिन्ह है जिसको सामान्य रूप से नहीं लिया जाना चाहिए। संत पापा ने कहा कि आज यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है कि शोक के देवता के कई उपासक हैं और वे खुशी से दूर रहने में ही संतुष्टि महसूस करते हैं।  

जबकि सच्चा आनन्द उससे अलग है यह खुशी अथवा उत्साह समाप्त हो जाने के बावजूद कठिनाई, दुःख, निराशा एवं हताशी की परिस्थिति में भी खत्म नहीं होता है। आनन्द हमेशा बना रहता है क्योंकि येसु स्वयं आनन्द हैं जिनकी मित्रता स्थायी है।  

स्वतंत्रता

संत पापा ने कहा कि बुलाहट शब्द युवाओं को भयभीत करता है क्योंकि उन्हें लगता है कि यह उनकी स्वतंत्रता छीन लेती है जबकि ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं। हमें यह याद रखने की जरूरत है, खासकर, जब हमारे व्यक्तिगत या सामुदायिक जीवनशैली हमें निर्भरता आ जाती है अथवा यह हमें घमंडी बना देती है। संत पापा ने कहा कि यह खतरनाक है क्योंकि यह युवाओं को स्वतंत्रतापूर्वक बढ़ने से रोक देता है। यह उन्हें बचपन की अवस्था में ही रख लेता है। बुलाहट आत्मपरख है जो वास्तविकता, ईश्वर के वचनों, अपने जीवन एवं अपने स्वप्नों पर चिंतन से शुरू होती है और निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती है।

एक साथ

संत पापा ने कहा कि बुलाहट एक व्यक्ति का नहीं है। कोई भी व्यक्ति अपने जीवन का चुनाव अकेले नहीं कर सकता। यह हमेशा दूसरों के साथ मिल कर किया जाता है क्योंकि इस बुलाहट को धर्मसमाज में, पल्लियों एवं कलीसियाई समुदायों में जीया जाता है। प्रभु किसी व्यक्ति को अकेले नहीं बुलाते बल्कि समुदाय में बुलाते हैं ताकि वे अपने प्रेम की योजना को साकार कर सकें।

अंततः संत पापा ने स्वीकार किया कि आज जीवन सभी ओर बिखरा हुआ और घायल है। कलीसिया का जीवन भी इसी तरह है। ख्रीस्त से संयुक्ति ही हमारी पवित्रता को सुरक्षित रखने का सच्चा मार्ग है। बुलाहट के लिए कार्य करना ख्रीस्त के कार्य में हाथ बटाना है जो गरीबों को सुसमाचार सुनाने, घायलों पर पट्टी बांधने, टूटे हृदयों को जोड़ने एवं बंधे हुए लोगों के लिए स्वतंत्रता की घोषणा करने आये। उन्होंने अंधों को दृष्टि दी। संत पापा ने सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन दिया कि वे उत्साह पूर्व ख्रीस्त के कार्य में आगे बढ़ें।

06 June 2019, 16:58