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संत पेत्रुस महागिरजाघर में 19 नये पुरोहितों का अभिषेक समारोह संत पेत्रुस महागिरजाघर में 19 नये पुरोहितों का अभिषेकसमारोह  (ANSA)

संत पापा ने 19 नये पुरोहितों का अभिषेक किया

संत पापा फ्राँसिस ने धर्म बुलाहट हेतु 56 वें विश्व प्रार्थना दिवस पर 19 डीकनों का पुरोहिताभिषेक किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 13 मई 2019 (वाटिकन सिटी) : काथलिक कलीसिया पास्का के चौथे रविवार को भला चरवाहा रविवार के रुप में मनाती है। इस वर्ष 12 मई को संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाघर में पवित्र मिस्सा के दौरान 19 नये पुरोहितों का अभिषेक किया।

भला चरवाहा

संत पापा ने अपने प्रवचन में नये पुरोहितों को हमेशा प्रभु भला चरवाहा के उदाहरण को ध्यान में रखें जो सेवा कराने नहीं बल्कि सेवा करने के लिए आए थे और जो खो गए थे उन्हें ढूँढने और बचाने आये थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी "सांस्कृतिक संघ या ट्रेड यूनियन" में प्रवेश नहीं कर रहे हैं परंतु वे मसीह की प्रेरिताई में भाग लेंगे।"

दयालु बनें

संत पापा फ्राँसिस ने पापस्वीकार संस्कार पर केंद्रित करते 19 नये पुरोहितों को दयालु बनने की प्रेरणा देते हुए कहा कि उन्हें "दयालु होने से कभी थकना" नहीं चाहिए। हमें पिता ईश्वर के समान दयालु बनना चाहिए। प्रभु येसु हम सभी लोगों के प्रति दयालु थे, जो भी उनके पास अपने पापों की गठरी खोल देता है वह प्रभु की महान दयालुता और प्रेम का अनुभव करता है।

मुफ्त में मिला है मुफ्त में बांटें

संत पापा ने उन्हें युखारिस्तीय समारोह के प्रति चौकस रहने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, “प्रभु ने हमें मुफ्त में बचाया है और हमसे भी आशा करते हैं कि हम भी दूसरों को मुफ्त में बांटें। उन्होंने खुद हमसे कहा है, तुम्हें जो मुफ्त में मिला है उसे मुफ्त में दे दो।" पवित्र युखारिस्तीय समारोह प्रभु द्वारा खुद को मुफ्त में देने की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति है इस समारोह को आप अपने व्यक्तिगत हित या स्वार्थ के लिए इसकी महानता को मिट्टी में न मिलायें।"

संत पापा ने कहा कि पुरोहित को प्रार्थना में ईश्वर, अपने धर्माध्यक्ष, पल्ली पुरोहित, अन्य पुरोहितों और पल्ली वासियों के करीब होना चाहिए।”  "आप जो सिखाते हैं, वह ईश्वर के लोगों की आध्यात्मिक भलाई के लिए हो। प्रभु के प्रति वफादार रहते हुए अपने पवित्र जीवन की सुखद खुशबू को बरकरार रखें। आप प्रार्थनामय व्यक्ति बनें, एक ऐसा पुरोहित जो दूसरों के लिए समर्पित हों, आप मन, वचन और कर्म से कलीसिया के निर्माण और विस्तार हेतु कार्य कर सके।”

नये पुरोहित

19 नये पुरोहित इटली, हैती, जापान, पेरु और क्रोएशिया से थे। उनमें से आठ पुरोहित प्रिस्टली सोसायटी ऑफ सन्स ऑफ द क्रॉस, एक पुरोहित शिष्य के परिवार से थे। रोम के मेजर सेमिनरी में दो पुरोहितों ने अध्ययन किया और आठ ने नेओ-काटेकुमेलन तरीके से रेडेम्टोरिस मातेर सेमिनरी में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

13 May 2019, 16:47