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रोमानिया की प्रेरितिक यात्रा में संत पापा रोमानिया की प्रेरितिक यात्रा में संत पापा  (Vatican Media)

बुखारेस्ट में येसु की प्रार्थना

रोमानिया की प्रेरितिक यात्रा के दौरान संत पापा फ्रांसिस ने बुखारेस्ट के न्यू आर्थोडाक्स महागिरजाघर में “हे पिता हमारे” का पाठ किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

बुखारेस्ट, 31 शुक्रवार, 31 मई 2019 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने सभी विश्वासियों के संग “हे पिता हमारे” की प्रार्थना के पूर्व अपने संबोधन में कहा कि मैं इस पवित्र गिरजाघर में जो हमें एकता के सूत्र में पिरोता है आपके बीच अपने को उपस्थित पाकर भावविभोर हूँ। येसु ने अन्द्रेयस और पेत्रुस दोनों भाइयों को जाल छोड़कर अपने पीछे आने का आग्रह किया जिससे वे मनुष्य के मछुवारे बन सकें।(मत्ती.1.16-17) एक भाई का दूसरे भाई के बिना बुलाया जाना अपने में पूर्ण नहीं था। आज हम एक दूसरे की अगल-बगल में अपने को पाते हुए अपने देश के हृदय से येसु की प्रार्थना को उच्चरित करना चाहते हैं। यह प्रार्थना शिष्यों के लिए येसु की प्रतिज्ञा को समाहित करता है, “मैं तुम्हें अनाथ नहीं छोड़ूंगा” (यो.14.18) जो हमें अपने भाई-बहनों को अपने लिए उपहार के रुप में स्वीकार करने हेतु विश्वास के विभूषित करता है। संत पापा ने रोमानिया के लोगों के प्रति अपने चिंतन के भाव व्यक्त करते हुए कहा कि यह देश सभों के लिए एक घर हो, एक मिलन का स्थल बनें, एक वाटिका जहाँ मेल-मिलाप और एकता प्रस्फुटित होती है।

दूसरों का इतिहास हमारा इतिहास बने

जब कभी हम “हे पिता हमारे” की प्रार्थना करते, तो पिता शब्द को हम अपने में पूर्ण नहीं पाते हैं। येसु की इस प्रार्थना में हम अपने को निवेदन और प्रेम की अनुभूति में संयुक्त करते जो हमें यह उच्चरित करने हेतु प्रेरित करता है, “मेरे पिता और आपके पिता, मेरे ईश्वर और आपके ईश्वर”। (यो.20.17) हम यहाँ मेरे को हमारे में और हमारे को प्रार्थना में परिणत करने हेतु बुलाये जाते हैं। हे पिता, तू हमें अपने भाई-बहनों के जीवन को गम्भीरता से लेने में मदद कर, जिससे हम उनके जीवन इतिहास को अपना इतिहास बना सकें। तू हमारी सहायता कर कि हम अपने भाई-बहनों के कार्यो और उनकी गलतियों को न देखें वरन उन्हें अपनी संतान के रुप में स्वागत कर सकें। हमारी सहायता कर जिससे हम बड़े भाई के मनोभावों से ऊपर उठ सकें जो अपने आप में सीमित है और दूसरे की परवाह नहीं करता है। (लूका.15. 25-32)

हे पिता, तू जो स्वर्ग में है, जो पृथ्वी की सारी सृष्ट वस्तुओं का आलिंगन करता, अच्छे और बुरे, न्यायी और अन्यायी सभों के लिए अपने सूर्य उगाता है( मती. 5.45) हम तूझसे इस धरती पर अमन और चैन हेतु निवेदन करते हैं जिसे स्थापित करने में हमने असफलता हासिल की है। आप के संग स्वर्ग राज्य में उपस्थित हमारे उन भाई-बहनों के साथ मिलकर हम इस कृपा के लिए निवेदन करते हैं जिन्होंने अपने विश्वास और प्रेम के खातिर, ख्रीस्तीय होने के कारण घोर दुःख को वहन किया।

ईश्वरीय नाम की स्तुति हो

उनके साथ मिलकर हम तेरे नाम के पवित्र की घोषणा करते और उसे अपने सभी कार्यों के क्रेन्द-बिन्दु में अंकित करते हैं। हमारे करूणा के कार्यों में हे प्रभु, तेरे नाम की स्तुति हो। संत पापा ने कहा कि हम अपनी प्रार्थना में कई बार सर्वप्रथम उनके नाम की महिमा और स्तुति करने के बदले में अपनी ही जरुरतों और अवश्यकताओं की सूची प्रस्तुत करते हैं। दुनिया की उन सारी क्षणभंगुर चीजों में जहाँ हम अपने को उलझा पाते हैं हे पिता, तू हमारी सहायता कर कि हम उन वस्तुओं की खोज कर सकें जो सचमुच में अनंत काल तक हमारे लिए बनी रहती है, विशेषकर हमारे भाई-बहनों में आप की उपस्थिति।  

हम आपके राज्य के आने की प्रतीक्षा करते हैं। हम इसकी बाट जोहते औऱ इसके लिए प्रार्थना करते हैं क्योंकि विश्व इसकी परवाह नहीं करती, दुनिया के कार्य धन-दौलत, व्यक्तिगत रूचि और शक्ति पर क्रेन्दित है। हम अपने को दुनियावी चमक-दमक से मोहित होता पाते हैं जो क्षणभंगुर है। हमारी सहायता कर, हे पिता जिन बातों को हम अपनी प्रार्थना में घोषित करते उनपर हम विश्वास कर सकें। हम अपनी शक्ति पर निहित अपनी सुरक्षा का परित्याग कर सकें, दुनियादारी के मोह, व्यर्थ की अपनी आत्मा-निर्भरता और अपने रुप के दिखावे से ऊपर उठ सकें। इस भांति हम आपके राज्य से विमुख न हों जिसके लिए हम बुलाये गये हैं।

ईश्वरीय इच्छा पूरी हो

हमारी इच्छा नहीं वरन तेरी इच्छा पूरी होवे। “ईश्वर की इच्छा यही है कि हम सभी मुक्ति प्राप्त करें।(संत योहन कास्सियन, आध्यात्मिक सम्मेलन 9वें 20) हे पिता, हमें अपनी क्षितिज को विस्तरित करने की जरुरत है जिससे हम अपनी कमजोरियों तो तेरे करूणा, मुक्ति की इच्छा में समर्पित कर सकें जो सभों का आलिंगन करती है। पवित्र आत्मा को भेज कर तू हमारी सहायता कर हे पिता, जो हममें साहस और खुशी का स्रोत बने, सुसमाचार को प्रसारित करने हेतु प्रेरित करें जिससे हम उसे अपने समुदायों, भाषाओं, संस्कृतियों और देशों से परे ले सकें।

येसु हमारे जीवन की रोटी

हमें रोटी के रुप में प्रतिदिन उनकी जरुरत है। वे जीवन की रोटी हैं (यो. 6.35.48) जो हमें इस बात की अनुभूति दिलाती है कि हम उनकी प्रिय संतान हैं जहाँ हम अपने को परित्यक्त और अनाथ नहीं पाते हैं। वे सेवा की रोटी हैं जिन्होंने अपने को तोड़कर हमें दिया है अतः वे हमें एक दूसरे की सेवा करने हेतु कहते हैं।(यो.13.14) हे प्रभु, जिस तरह तू हमें जीवन की रोटी प्रदान करता है उसी भांति हमें साहस से भर दे कि हम अपने को भाई-बहनों की सेवा हेतु दे सकें। हम जैसे प्रतिदिन जीवन की रोटी हेतु प्रार्थना करते हैं उसी तरह हम स्मृति की रोटी हेतु निवेदन करते हैं जिससे हम अपनी ख्रीस्तीयता की जड़ों को सारी मानवता में और विशेष कर युवाओं में प्रगाढ़ बना सकें। रोटी जिसकी मांग हम तुझ से करते हैं वह बीज से धीरे-धीरे विकासित होता और खाने की मेज में आता है। यह हमें धैर्यपूर्वक सामुदायिकता स्थापित करने में मदद करें जिसके फलस्वरुप हम एकता के बीज को बो सकें, अच्छाई को प्रेत्साहित करें और अपने भाई-बहनों के लिए निरंतर कार्य कर सकें।

जीवन में समृद्धि

वह रोटी जिसकी मांग हम आज करते हैं, उस रोटी की कमी का एहसास कई लोग अपने जीवन में करते हैं वहीं कितनों के पास यह जरुरत से ज्यादा है। हे पिता हमारे की प्रार्थना हमें विचलित करती जहाँ हमें प्रेम की भूख, व्यक्तिवाद और उदासीनता के विरुद्ध पुकारते हैं। हमारी सहायता कर जिससे हम भूखों के लिए अपने को स्वतंत्र रुप में दे सकें। हमें इस बात की याद दिला कि जीवन का उद्देश्य अपने को आराम की स्थिति में रखना नहीं वरन अपने को तोड़ना है, अपने लिए जमा करना नहीं वरन बांटना है, अपने हृदय की तृप्ति हेतु केवल खाना नहीं वरन हमें दूसरों को खिलाना है। जीवन में समृद्धि केवल समृद्धि तब बनती जब हम सभों का आलिंगन करते हैं।

क्षमा हेतु साहस की जरुरत

जब कभी हम प्रार्थना करते हैं हम अपनी कमजोरियों और पापों की क्षमा हेतु याचना करते हैं। यह हम से साहस की मांग करती है क्योंकि इसका अर्थ दूसरों की गलतियों को क्षमा करना है जिसे उन्होंने हमारे विरुद्ध किया है। हमें अपने भाई-बहनों को दिल से क्षमा करने हेतु साहस की जरुरत है जैसे कि पिता हमारे पापों और गलतियों को क्षमा करते हैं। हमें अपने अतीत को पीछे छोड़कर एक साथ आगे बढ़ते हुए भविष्य को गले लगाना है। हे पिता, हमारी सहायता कर जिससे हम खुलेपन को भय के रुप में न लें, दूसरों को क्षमा कर अपने जीवन में आगे बढ़ सकें। हमें साहस दे जिससे हम अपने जीवन में शांत न रहें बल्कि पारदर्शी में निष्ठावान बन सकें और अपने भाई-बहनों का सामना कर सकें।

संत पापा ने कहा कि जब बुराई हमारे हृदय के द्वार पर विचरती है तो हम अपने को बंद रख सकें। जब हम दूसरों के प्रति अपनी पीठ मोड़ने की परीक्षा में पड़ते तो हमारी सहायता कर क्योंकि पाप का मूल सिद्धांत हमें आपसे और अपने पड़ोसियों से विमुख करता है। हमारी मदद कर कि हम अपने हर भाई-बहन के द्वारा तेरी ओर अभिमुख हो सकें। हमें साहस और प्रेरणा प्रदान कर कि हम एक साथ मिल कर हे पिता तुझे पुकार सकें। 

31 May 2019, 16:36