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पास्का सन्देश जारी करते सन्त पापा फ्राँसिस पास्का सन्देश जारी करते सन्त पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

रोम शहर एवं विश्व के नाम जारी सन्त पापा फ्राँसिस का सन्देश

रोम स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में देश-विदेश से एकत्र तीर्थयात्रियों के समक्ष, रविवार, 21 अप्रैल को, ईस्टर महापर्व के उपलक्ष्य में, काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु, सन्त पापा फ्राँसिस ने सम्पूर्ण विश्व एवं रोम शहर के नाम अपना विशिष्ट पास्का सन्देश जारी किया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 21 अप्रैल 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): ईस्टर महापर्व की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएँ। आज ईस्टर यानि पास्का महापर्व है, प्रभु येसु मसीह के पुनःरुत्थान का महापर्व। येसु ख्रीस्त के मुर्दों में से पुनः जी उठने के स्मरणार्थ मनाये जानेवाले इस महापर्व के शुभ अवसर पर हम आप सबके प्रति शुभकामनाएँ अर्पित करते हैं। हमारी मंगलयाचना है कि पुनर्जीवित प्रभु ख्रीस्त आप सबको अपनी कृपा, ज्योति एवं शांति से परिपूर्ण कर दें!

रोम स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में देश-विदेश से एकत्र तीर्थयात्रियों के समक्ष, रविवार, 21 अप्रैल को, ईस्टर महापर्व के उपलक्ष्य में, काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु, सन्त पापा फ्राँसिस ने सम्पूर्ण विश्व एवं रोम शहर के नाम अपना विशिष्ट पास्का सन्देश जारी किया....

विश्व एवं रोम शहर के नाम

"अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, पास्का मुबारक! "इन शब्दों से अपना पास्का सन्देश आरम्भ कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, "आज कलीसिया प्रथम प्रेरितों की उदघोषणा को नवीकृत करती हैः "येसु जी उठे हैं!  मुख से मुख तक और हृदय से हृदय तक, प्रशंसा का एक आह्वान गुँजायमान होता हैः आल्लेलूया, आल्लेलूया! पास्का महापर्व की इस सुबह, कलीसिया के सर्वकालिक युवा तथा सम्पूर्ण मानवजाति, मैं आप सबको, विशेष रूप से, युवाओं को समर्पित अपने हाल के प्रेरितिक उदबोधन के प्रथम शब्दों से सम्बोधित करना चाहता हूँ: "ख्रीस्त जीवित हैं! वे हमारी आशा हैं तथा  एक शानदार तरीके से वे युवाओं को हमारे जगत में लाते हैं। अस्तु, सबसे पहले शब्द जो मैं प्रत्येक युवा से कहना चाहूँगा वे हैं: ख्रीस्त जीवित हैं! और वे चाहते हैं कि आप भी जीवित रहें। वे आपमें हैं, आपके साथ हैं तथा कभी आपका परित्याग नहीं करेंगे। आप कितनी भी दूर भटकते रहें, पुनर्जीवित ख्रीस्त सदैव आपके साथ हैं। वे आपको बुलाते हैं तथा निरन्तर आपके वापस लौटने की प्रतीक्षा करते हैं। जब आपको महसूस होता है कि आप दुख, आक्रोश, भय, शंका या असफलता के कारण बूढ़े हो रहे हैं, तब वे आपकी ताकत और आपकी आशा बहाल करने के लिये सदैव आपके साथ रहते हैं।"  

उन्होंने आगे कहा, "अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, यह सन्देश विश्व के प्रत्येक व्यक्ति के प्रति  सम्बोधित है। येसु मसीह का पुनरुत्थान प्रत्येक पुरुष और प्रत्येक महिला के लिए नवजीवन का प्रारम्भ है, इसलिये कि सच्चा नवीकरण हृदय से, अन्तरात्मा से शुरू होता है। तथापि, ईस्टर, पाप एवं मृत्यु की दासता से मुक्त एक नये विश्व का भी प्रारम्भ है: ईश्वर का राज्य, प्रेम, शांति एवं भ्रातृत्व के राज्य के प्रति अन्ततः खुला विश्व। ख्रीस्त जीवित हैं तथा हमारे साथ विद्यामान रहते हैं। पुनर्जीवित प्रभु हमें अपने मुखमण्डल का प्रकाश दिखाते हैं तथा उन सबका परित्याग नहीं करते जो कठिनाई, दुःख एवं कष्ट का अनुभव कर रहे हैं।"

सिरिया में युद्ध के अन्त का आह्वान

युद्ध से पीड़ित सिरियाई लोगों की याद कर उन्होंने कहा, "हमारी मंगलकामना है कि जीवन्त प्रभु  सिरिया की प्रिय जनता की आशा बनें जो अनवरत जारी संघर्ष से पीड़ित हैं तथा जिसकी हम नित्य उपेक्षा करते आ रहे हैं और यहाँ तक कि उदासीन हो चले हैं। जबकि, अब समय है एक राजनैतिक समाधान हेतु संकल्प को नवीकृत करने का। ऐसा समाधान जो स्वतंत्रता, शांति एवं न्याय हेतु लोगों की तर्कसंगत आशा का प्रत्युत्तर दे सके, जो मानवतावादी संकट को अभिभूत कर सके तथा पड़ोसी देशों, विशेष रूप से, लेबनान एवं जॉर्डन में शरण पा रहे शरणार्थियों सहित समस्त बेघर लोगों की सुरक्षापूर्ण घर-वापसी का पक्षधर बन सके।"

पवित्रभूमि में शांति की अपील

पवित्रभूमि में शांति हेतु प्रार्थना करते हुए सन्त पापा ने कहा, "ईस्टर हमें अपनी दृष्टि, नित्य जारी विभाजन एवं तनावों से घिरी, पवित्रभूमि पर लगाये रखने का निमंत्रण देता है। पवित्र भूमि के ख्रीस्तीय धर्मानुयायी धैर्यपूर्वक पुनर्जीवित प्रभु ख्रीस्त तथा मृत्यु पर जीवन की विजय का अनवरत साक्ष्य देते रहें। मैं, विशेष रूप से, यमन के लोगों का विचार करता हूँ, विशेषकर बच्चों का, जो क्षुधा एवं युद्ध से पीड़ित हैं। मेरी मंगलयाचना है कि पास्का की ज्योति, इस्रारएल से लेकर फिलीस्तीन तक, सभी सरकारी नेताओं एवं मध्यपूर्व के लोगों को आलोकित करे तथा उन्हें इस तरह के महादुख को दूर करने और शांति एवं स्थायित्व से परिपूर्ण भविष्य के प्रति अग्रसर होने के लिये प्रेरित करे।"

लिबिया में रक्तपात समाप्त हो

लिबिया के सन्दर्भ में सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, "लिबिया में संघर्ष एवं रक्तपात का अन्त हो, जहाँ हाल के सप्ताहों में सुरक्षाविहीन लोग मारे गये हैं तथा अनेकानेक परिवारों को अपने घरों से पलायन के लिये बाध्य होना पड़ा है। सभी संलिप्त दलों से मेरा आग्रह है कि वे बल और वार्ता के बीच वार्ता का चयन करें तथा युद्धों और राजनीतिक अस्थिरता रूपी एक दशक के संघर्ष से छोड़े गये घावों को पुनः खुलने न दें।"

अफ्रीका और यूक्रेन का स्मरण

अफ्रीका का स्मरण करते हुए सन्त पापा ने कहा, "जीवन्त प्रभु ख्रीस्त, सम्पूर्ण अफ्रीकी महाद्वीप को अपनी शांति प्रदान करें, जो अभी भी सामाजिक तनावों, संघर्षों और कई बार उग्रवाद के हिंसक रूपों से घिरा है, और जो, विशेष रूप से, बुर्किना फासो, माली, नाइजर, नाइजीरिया और कैमरून में असुरक्षा, विनाश एवं मृत्यु का ताण्डव रचते हैं। पुनर्जीवित प्रभु, वाटिकन में सम्पन्न आध्यात्मिक साधना के फलों से समर्थित दक्षिणी सूडान के नागर एवं धार्मिक अधिकारियों के प्रयासों का साथ दें। उस देश के इतिहास में एक नया पृष्ठ खुले जिसमें समस्त राजनैतिक, सामाजिक एवं धार्मिक घटक, सक्रिय रूप से, राष्ट्र की भलाई और देश में सामंजस्य स्थापित करने के प्रति प्रतिबद्ध रहें।"

यूक्रेन के लिये प्रार्थना करते हुए उन्होंने कहा, "ईस्टर महापर्व यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्रों में निवास करनेवालों को विश्रान्ति प्रदान करें, जो निरन्तर जारी संघर्ष से पीड़ित हैं। प्रभु, मानवतावादी राहत सहायता तथा स्थायी शांति की दिशा में आरम्भ पहलों को प्रोत्साहन दें।"

अमरीकी महाद्वीप का स्मरण

फिर अमरीकी महाद्वीप की ओर अभिमुख होकर उन्होंने कहा, "पुनरुत्थान का आनन्द उन लोगों के हृदयों प्रफुल्लित करे जो अमरीकी महाद्वीप में कठिन राजनैतिक एवं आर्थिक नीतियों के दुष्प्रभावों  का अनुभव कर रहे हैं। मेरे विचार विशेष रूप से वेनेज़ुएला के लोगों के प्रति अभिमुख होते हैं, उन सब लोगों के प्रति जो अनवरत जारी और बिगड़ती संकटपूर्ण स्थिति के कारण प्रतिष्ठापूर्ण जीवन की न्यूनतम परिस्थितियों तथा सुरक्षित जीवन के अभाव से पीड़ित हैं। पुनर्जीवित प्रभु ऐसा करें कि राजनैतिक ज़िम्मेदारियाँ वहन करनेवाले सभी लोग सामाजिक अन्याय, दुर्व्यवहार और हिंसा के कार्यों को समाप्त करने के लिए काम करें तथा विभाजनों को दूर करने के लिये ठोस कदम उठाकर ज़रूरत में लोगों की सहायता करें। निकारागुआ के सन्दर्भ में सन्त पापा ने कहा, "प्रभु अपनी ज्योति सम्पूर्ण निकारागुआ के लोगों के लाभार्थ शांतिपूर्ण वार्ताओं का समाधान खोजने के प्रयासों पर आलोकित करें।"

संत पापा ने पास्का पर्व के दौरान श्रीलंका के गिरजाघरों में हुए बम विस्फोटों के प्रति दुःख व्यक्त किया और मृतकों तथा घायलों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

पास्का की शुभकामना एवं आशीष

सन्त पापा ने आगे कहा, "हमारे समक्ष इतनी अधिक पीड़ाओं के सामने प्रभु हमें उपेक्षा भाव से भरे तथा उदासीन न पायें। प्रभु जो हमें शांति प्रदान करते हैं, संघर्षरत क्षेत्रों में तथा हमारे शहरों में भी शस्त्रों के गर्जन का अन्त करें तथा राष्ट्रों के नेताओं को हथियारों की होड़ तथा शस्त्रों के प्रसार को समाप्त करने के लिये काम करने की कृपा प्रदान करें, विशेष रूप से, आर्थिक तौर पर विकसित देशों को। मेरी मंगलयाचना है कि कब्र के पटों को खोलनेवाले प्रभु, रोटी, शरण एवं अपनी गरिमा की तलाश में हमारे दरवाज़ों पर दस्तक देनेवाले वंचितों, कमज़ोरों, निर्धनों, बेरोज़गारों और हाशिये पर जीवन यापन करनेवालों के प्रति भी हमारे हृदयों के दरवाज़ों को खोलें।  

अन्त में सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, "अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, ख्रीस्त जीवित हैं! वे हमारी एवं सम्पूर्ण विश्व की आशा एवं यौवन हैं। हम अपने आप को उनके द्वारा नवीकृत होने दें! आप सभी को पास्का पर्व मुबारक!   

 इन शब्दों से रोम शहर एवं विश्व के नाम अपना पास्का संदेश समाप्त कर संत पापा फ्राँसिस ने सबको अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

 

 

21 April 2019, 12:50