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पास्का जागरण मिस्सा में संत पापा पास्का जागरण मिस्सा में संत पापा 

पास्का जागरण मिस्सा में संत पापा का प्रवचन

संत पापा फ्रांसिस ने संत पेत्रुस के महागिरजाघर में पास्का जागरण का मिस्सा बलिदान अर्पित करते हुए अपने प्रवचन में जीवन से विभिन्न तरह के पत्थरों को हटाने का संदेश दिया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 21 अप्रैल 2019 (रेई) संत पापा ने मिस्सा बलिदान के दौरान अपने प्रवचन में कहा कि नारियाँ विलेपनों के साथ येसु की क्रब के पास जाती हैं लेकिन उनके मन में भय है क्योंकि उनका आना अपने में व्यर्थ होगा चूंकि क्रब के द्वारा पर एक बड़ा पत्थर रखा हुआ है। उन्होंने कहा कि उन नारियों की यात्रा हमारे जीवन यात्रा को बयां करती है, यह हमारी मुक्ति की यात्रा का प्रतीक है जिसकी यादगारी हम आज मना रहे हैं। कई बार ऐसा लगता है सारी चीजें पत्थर के खिलाफ जाती हैं, सुन्दर सृष्टि के खिलाफ पाप, गुलामी से स्वतंत्रता के खिलाफ ईश विधान की प्रति अनिष्ठा, नबियों की प्रतिज्ञाओं के खिलाफ लोगों की उदासी। हम इन चीजों को कलीसिया और हमारे व्यक्तिगत जीवन में देखते हैं। हमें ऐसा लगता है कि जो कदमें हमने ली हैं वह हमें अपनी मंजिल तक नहीं ले जायेगा। हम इस परीक्षा में पड़ जाते हैं और अपने में यह सोचते हैं कि आशा का टूटना जीवन में धूमिल कर देता है।

हमारी यात्रा व्यर्थ नहीं

संत पापा कहा कि आज की हमारी यह यात्रा अपने में व्यर्थ नहीं है, पत्थर हमारे मार्ग में रोड़ा नहीं बनता है। एक वाक्या जो नारियों के विस्मित करता और इतिहास को बदल देता है,“आप जीवित को मृतकों में क्यों खोजती हैंॽ” उन्होंने कहा कि आप ऐसा क्यों सोचते हैं सारी चीजें अपने में आशाहीन हैं जो आप के जीवन से कब्र की पत्थर को नहीं हटा सकता हैॽ पास्का वह त्योहार है जो पत्थर को क्रब से दूर करता है। ईश्वर हमारे जीवन के सबसे कठोर पत्थर को भी दूर करते हैं जो हमारी आशा और अभिलाषाओं को नष्ट करती है, जो हमारे लिए मृत्यु, पाप, भय और दुनियादारी है। मानव इतिहास क्रब की पत्थर के सामने खत्म नहीं होता क्योंकि आज हम “जीवित चट्टान” से मिलते हैं जो पुनर्जीवित येसु ख्रीस्त हैं।(1 पेत्रुस 2.4) हम कलीसिया के रुप में उन पर निर्मित हैं और जब हम अपने जीवन में असफलताओं के कारण हताश हो जाते और सभी चीजों के बारे में निर्णय देने लगते तो वे हमें नया करने हेतु आते और हमारी सारी निराशा को हमसे दूर करते हैं। हममें हर कोई आज इसलिए बुलाये जाते हैं कि हम पुनर्जीवित येसु के एक नये रुप में अपने जीवन में देख सकें जो हमारे हृदयों से भारी पत्थरों को हटाते हैं। वह कौन-सा पत्थर है जिसे हमें हटाना हैॽ उसका नाम क्या हैॽ

निराशा रुपी पत्थर

हमारे जीवन को बहुधा निराशा का पत्थर बाधित करती है। जब हम अपने जीवन में एक बार यह सोचना शुरू करते हैं कि सारी चीजों खराब चल रही हैं और उससे खराब कुछ नहीं हो सकता तो हम अपने में यह विश्वास करने लगते हैं कि जीवन से शक्तिशाली मृत्यु है। हम अपने में आलोचक, नाकारात्मक और हताश हो जाते हैं। आशा में बने रहने के बदले एक के ऊपर एक निराश के पत्थर हमारे जीवन में एक असंतुष्टि का स्मारक बना देता है। हमारा जीवन  शिकयतों का एक सिलसिला बन जाता और हम अपना जोश खोने लगते हैं। हम अपने में एक मनोवैज्ञानिक क्रब को पाते जहाँ सारी चीजें समाप्त हो जाती हैं जहां हम जीवन की आशा को धूमिल होता पाते हैं। लेकन ऐसी स्थिति में हम पुनः येसु के उस सवाल को सुनते हैं, “आप जीवित को मृतकों के बीच क्यों खोजते हैंॽ” येसु को हम हताश की स्थिति में नहीं पा सकते हैं। वे जी उठे हैं वे यहाँ नहीं हैं। आप उसे वहाँ न खोजें जहाँ वे नहीं हैं, वे जीवितों के ईश्वर है मृतकों के नहीं,(मरकुस22.32) आप अपनी आशा को न दफनायें।

हमारे जीवन में और एक पत्थर है जो हमारे हृदयों को बंद कर देता है औऱ वह पाप का पत्थर है। पाप हमें उत्तेजित करता है। यह हमारे लिए चीजों को तुरंत प्राप्त करने, धन और सफलता की प्रतिज्ञा करता है लेकिन यह हमें सिर्फ अकेला और मृत्यु में छोड़ देता है। पाप मृत्यु में जीवन की खोज करता है यह उन चीजों की खोज करता जो समाप्त हो जाती हैं। आप जीवित को मृतकों में क्यों खोजते हैंॽ हम उस पाप का अपने में परित्याग क्यों नहीं करते जो हमारे हृदय के द्वार में पत्थर की तरह रहता और ईश्वर के प्रकाश को हममें प्रवेश करने नहीं देता है। हम येसु का चुनाव क्यों नहीं करते तो सच्ची ज्योति हैं (यो. 1.9) “जो धन, कैरियर, घमंड और खुशी से अधिक हमारे जीवन में चमकते हैं” हम इस दुनिया के उस व्यर्थ की चीजों को यह क्यों नहीं कहते कि हम उनके लिए नहीं लेकिन ईश्वरीय जीवन के लिए हैं।

हम स्वर्ग हेतु हैं

वे येसु की क्रब के पास आश्चर्य में रुक जाती हैं क्योंकि पत्थर अपने में हटाया हुआ है। वे स्वर्गदूतों को देख कर वहां रुप जाती हैं जैसा कि सुसमाचार हमें बतलाता है, “वे डर से अपना सिर जमीन की ओर झुका लेती हैं। (लूका. 24.5)”। उन्हें ऊपर देखने का साहस नहीं होता है। हम कितनी बार अपने जीवन में इस तरह अनुभव करते हैं। हम अपने जीवन की खामियों में अपने को संकुचित कर लेते हैं क्योंकि हम अपने में भय से भरे रहते हैं। यह विचित्र है हम क्यों ऐसा करते हैं1 हम अपने में बंद होकर रहते हैं क्योंकि हम अपने को नियंत्रण में पाते हैं क्योंकि ईश्वर के सामने अपने हृदय को खोलने की अपेक्षा अकेले अंधकार में रहना हमारे लिए सहज लगता है। संत पापा ने कहा कि फिर भी केवल वे हमें ऊपर उठा सकते हैं। किसी कवि ने लिखा है, “हम अपने में कभी यह नहीं जानते की हम कितने ऊपर हैं, जब तक कोई हम ऊपर उठने की चुनौती नहीं देता” (ई.डीकिंनसन) येसु हमें पुकारते हैं, वे हमें कहते हैं कि हम निगाहें ऊपर फेरते हुए इस बात का अनुभव करें कि हम धरती ने लिए नहीं स्वर्ग हेतु बनाये गये हैं, हम जीवन के लिए बनाये गये हैं न की मृत्यु के लिए।

येसु हमारे जीवन को स्वयं अपनी नजरों से देखने का निमंत्रण देते हैं क्योंकि वे हममें से प्रत्येक जन के जीवन की सुन्दरता को देखते हैं। पाप की स्थिति में वे हमें अपनी संतान के रुप में सुरक्षित रखते, मृत्यु में भाई-बहनों के रुप में पुनर्जीवित करते और उदासी में हमारे हृदयों को नये उत्साह से भरते हैं। संत पापा ने कहा कि अतः हमें भयभीत होने की जरुरत नहीं है येसु हमारे जीवन को प्रेम करते हैं यद्यपि हम इसकी ओर नजरें डालने से डर जाते और उसे अपने हाथों में लेने हेतु घबराते हैं। अपने पास्का में वे हमें इस बात का एहसास दिलाते हैं कि वे हमारे जीवन से कितना प्रेम करते हैं, “तुम अकेले नहीं हो, मुझ में भरोसा रखो।”  

येसु का प्रेम

येसु वे विशेषज्ञ हैं जो हमारी मृत्यु को जीवन में परिणत कर देते हैं वे हमारे विलाप को नृत्य में बदलते हैं, (स्तो.30.11) हम उनके साथ अपने जीवन में पास्का की अनुभूति करते हैं। हम अपने में स्वार्थ के बदले समुदाय, उदासी के बदले खुशी और भय से विश्वास में विकास करते हैं। हम अपनी आंखों को जमीन की ओर झुकाये न रखें वरन येसु की ओर ऊपर उठायें। उनकी निगाहें हमें आशा से भरती देती हैं क्योंकि वे हमें कहते हैं कि तुम कितने भी बुरी स्थिति में क्योंकि न हो मेरा प्रेम तुम्हारे लिए नहीं बदलता है। हम अपने आप से पूछे, “हम अपने जीवन में किधर देखते हैंॽ क्या मैं क्रबों को देखता हूँ या जीवन कोॽ

जब नारियों से स्वर्गदूतों की बातों को सुना तो वे गलीयिया में येसु की कही गई बातों को याद करते हैं। उन्होंने अपनी आशा खो दी थी, क्योंकि उन्होंने येसु के वचनों को भूलता दिया था। येसु की संजीव बातों को भूलने के कारण वे क्रब की ओर देखती हैं। विश्वास हमें सदैव गलीलिया की ओर वापस जाने को कहता है जहां हम उनके प्रथम प्रेम को देखते हैं और उनकी बातों के याद करते उन्हें अपने जेहन में और हृदय में सुनते हैं। येसु के संजीव प्रेम में वापस आना हमारे लिए जरुरी है यदि ऐसा नहीं होता तो हमारा विश्वास, पास्का का विश्वास नहीं वरन ऍ संग्रहलाय की तरह हो जाता है। येसु ख्रीस्त अतीत के व्यक्ति नहीं वरन वर्तमान के जीवित व्यक्तित्व हैं। हम उन्हें इतिहास की किबातों के अनुसार नहीं जानते बल्कि उनसे अपने जीवन में मिलते हैं। आज हम उनकी बात को याद करें कि कैसे येसु ने हमें पहली बार बुलाया था। कैसे उन्होंने अपने जीवन और वचनों के द्वारा हमारे हृदयों का स्पर्श किया था।

येसु की बातों को याद करें

वे नारियाँ येसु की याद करते हुए क्रब से विदा लेती हैं। पास्का हमें यह बतलाता है कि विश्वासी क्रब के चारों ओर नहीं घूमते हैं बल्कि वे जीवित येसु से मिलने हेतु बुलाये जाते हैं। संत पापा ने कहा कि हम अपने आप से पूछें कि मैं अपने जीवन में किस ओर जा रहा हूँॽ कभी-कभी हम अपने जीवन में केवल मुश्किलों की ओर जाते हैं और केवल सहायता हेतु येसु से निवेदन करते हैं। यह हमारी जरुरत है कि हम अपने कदमों की जाँच करें। हम सदैव जीवित को मृतकों के बीच में खोजते हैं। हम कितनी बार येसु से मिलते हैं लेकिन हम पुनः मृत्यु, दोष, बुराई, चोट, असंतोष की ओर लौट आते हैं, हम येसु द्वारा अपने को परिवर्तित होने नहीं देते हैं।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि हम जीवित येसु को अपने जीवन का केन्द्र-बिन्दु बनायें। हम उनसे इस कृपा की मांग  करें कि हम धारा में न बह जाये, अपने मुसीबतों के समुद्र में न डूबें। हम उनसे उस कृपा की याचना करें कि हम अपने में भय और निराशा का शिकार न हों। हम सभी चीजों के ऊपर येसु की खोज करें। उनके साथ हम अपने जीवन में विकास करेंगे।

21 April 2019, 18:43