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संत पापा पीयुस 12वें के परमाध्यक्ष चुनाव का 80 साल

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 2 मार्च 2019 (रेई)˸ संत पापा पीयुस 12वें 2 मार्च 1939 को संत पापा चुने गये। वे शांति के अथक निर्माता थे, जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के संकट से होकर गुजरना पड़ा। उन्होंने युद्ध से तबाह लोगों के बीच ख्रीस्त की ज्योति जलायी एवं पुनः निर्माण की आशा दिलायी।

कार्डिनल यूजेनियो पाचेल्ली रोमन काथलिक कलीसिया के 260वें परमाध्यक्ष बने, जिन्होंने अपना नाम संत पापा पीयुस 12वें रखा। संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में विश्वासियों की भीड़ ने उनका स्वागत तालियों की गड़गड़ाहट के साथ किया। उन्होंने कलीसिया का संचालन 19 वर्षों तक किया।

संत पापा पीयुस 12वें का पावन धर्माध्यक्षीय अभिषेक 13 मई 1917 को फातिमा की माता मरियम के प्रथम दिव्य दर्शन के दिन हुआ था। 1940 में उन्होंने सिस्टर लुसी से मुलाकात की जो दिव्य दर्शन पाने वालों में से एक थी।

संत पापा पीयुस 12वें ने 1950 में माता मरियम के सशरीर स्वर्ग में उठा लिये जाने की घोषणा एक डोगमा के रूप में की। उन्होंने संत फ्राँसिस असीसी एवं सियेना की संत कैथरिन को इटली के संरक्षक घोषित किये। वे पहले संत पापा थे जो छोटे स्क्रीन में प्रकट हुए तथा सिनेमा, रेडियो एवं दूरदर्शन को "अनोखी तकनीकी खोज" कहा। उन्होंने परिवार एवं जीवन की रक्षा को विशेष समर्थन दिया।

द्वितीय विश्व युद्ध

द्वितीय विश्व युद्ध आरम्भ होने के साथ ही संत पापा पीयुस का परमाध्यक्षीय काल आरम्भ हुआ। 24 अगस्त 1939 को रेडियो द्वारा नेताओं एवं लोगों को सम्बोधित करते हुए संत पापा ने कहा था। "मानव परिवार के लिए एक अत्यन्त गंभीर समय की ध्वनि फिर सुनाई दे रही है। एक जबरदस्त विवेचना जिसके प्रति हमारा हृदय उदासीन नहीं रह सकता, हमें अपने आध्यात्मिक अधिकारियों पर भरोसा नहीं खोना चाहिए जो ईश्वर की ओर से आते हैं ताकि न्याय एवं शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने हेतु प्रेरित कर सकें।"

02 March 2019, 14:55