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ब्रुसेल्स में आयोजित मौत की सजा पर 7वां विश्व कांग्रेस ब्रुसेल्स में आयोजित मौत की सजा पर 7वां विश्व कांग्रेस  (ANSA)

मौत की सजा पर विश्व कांग्रेस को संत पापा का वीडियो संदेश

संत पापा फ्राँसिस ने मौत की सजा के खिलाफ हो रहे 7वें विश्व कांग्रेस के प्रतिभागियों को वीडियो संदेश दिया जिसका आयोजन 26 फरवरी से 1 मार्च तक ब्रुसेल्स में किया गया है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार,27 फरवरी 2019 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने ब्रुस्सेल्स में मौत की सजा के खिलाफ 7वें विश्व कांग्रेस के प्रतिभागियों को वीडियो संदेश में शासकों और उन सभी लोगों का समर्थन किया कि वे मृत्युदंड के कुल उन्मूलन की दिशा में आवश्यक कदम उठाएं।

संत पापा ने कांग्रेस के आयोजकों और प्रतिभागियों का अभिवादन किया और कहा, मानव जीवन जो हमें प्राप्त हुआ है, सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिक उपहार है। यह अन्य सभी उपहारों और अन्य सभी अधिकारों का स्रोत है और इसलिए इसे सुरक्षित करने की आवश्यकता है। एक विश्वासी के लिए मनुष्य, ईश्वर की छवि और समानता में बनाया गया है। लेकिन, विश्वासियों और गैर-विश्वासियों दोनों के लिए, हर व्यक्ति का जीवन अच्छा है और इसकी गरिमा को अपवाद के बिना संरक्षित किया जाना चाहिए।

मृत्युदंड जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन

संत पापा ने कहा कि मृत्युदंड जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। यह सच है कि मानव समुदाय अक्सर बहुत गंभीर अपराधों का सामना करती है जो आम भलाई और लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा है। यह भी सच है कि आज अपराधों के लिए प्रायश्चित करने के अन्य साधन भी हैं, कुछ लोगों द्वारा किये गये नुकसान से समाज को बचाना है। दूसरी ओर, अपराधियों को अपने अपराधों की सजा के तहत उनके पश्चाताप की संभावना को भी कभी छोड़ा नहीं जा सकता है।

इस कारण से, यह एक सकारात्मक संकेत है कि अधिक से अधिक देश जीवन पर दांव लगा रहे हैं और अब मृत्युदंड का उपयोग नहीं करते हैं, या इसे अपने आपराधिक कानून से पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।

संत पापा ने कहा कि कलीसिया ने हमेशा जीवन का बचाव किया है और मृत्युदंड के प्रति उसकी दृष्टि परिपक्व हो गई है। इस कारण से, वे चाहते थे कि इस बिंदु को काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा में संशोधित किया जाए जो लंबे समय के लिए मौत की सजा को कुछ अपराधों की गंभीरता के लिए पर्याप्त प्रतिक्रिया के रूप में और आम भलाई की रक्षा के लिए रखा गया था। हालांकि, संगीन अपराध करने पर भी व्यक्ति की गरिमा खो नहीं सकती। कोई भी उसका जीवन नहीं ले सकता है और  न ही उसे उस समुदाय को फिर से गले लगाने के अवसर से वंचित कर सकता है जिसे उसने आघात और हानि पहुँचाया है।

मनुष्य की गरिमा

संत पापा ने कहा कि दुनिया भर में मौत की सज़ा के उन्मूलन का उद्देश्य मानव की गरिमा के सिद्धांत का साहस के साथ पुष्टि करना है कि मानव जाति अपराध का सामना कर सकती है, बुराई को अस्वीकार कर सकती है, साथ ही अपराधी को अपने अपराधों द्वारा हुए नुकसान की मरम्मत करने का समय देती है इस तरह कि वे आंतरिक रूप से अपने जीवन को बदलने में सक्षम हो सकें।

अंत में संत पापा ने अपनी प्रार्थना का आश्वासन देते हुए मृत्युदंड के पूर्ण उन्मूलन के लिए आवश्यक कदम उठाने हेतु प्रोत्साहित किया, ताकि व्यक्ति की गरिमा और जीवन समाप्त न हो।  

27 February 2019, 15:13