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नेशनल मजिस्ट्रेट एसोसिएशन के सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस नेशनल मजिस्ट्रेट एसोसिएशन के सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

नेशनल मजिस्ट्रेट एसोसिएशन को संत पापा का संदेश

संत पापा ने शनिवार को नेशनल मजिस्ट्रेट एसोसिएशन के सदस्यों से मुलाकात की और अपने संबोधन को एक समाज को संतुलन करने वाले प्रधान गुण ‘न्याय’ पर केंद्रित किया, क्योंकि न्याय "सही दिशा को इंगित करता है।"

वाटिकन सिटी, शनिवार 9 फरवरी 2019 (रेई) :  संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के कार्डिनल मंडल सभागार में नेशनल मजिस्ट्रेट एसोसिएशन के सदस्यों से मुलाकात की जो अपने एशोसिएशन की स्थापना के 110 साल पूरे होने के अवसर पर, "हमारा इतिहास, प्रकोप देख रहा है" विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम (8-9 फरवरी) में भाग लेने रोम आये हुए हैं।

संत पापा ने एसोसिएशन के अध्यक्ष को उनके परिचय भाषण के लिए धन्यवाद दिया। संत पापा ने कहा कि एक समाज के संतुलन के लिए न्याय एक "प्रधान गुण" है, क्योंकि यह समाज को "सही दिशा देता है।" "न्याय के बिना सभी सामाजिक जीवन ठप पड़ जाता है"। "नागरिकों के जीवन का प्रत्यक्ष ज्ञान" एवं राज्य के विधायी अंगों के "विशेषाधिकार प्राप्त वार्ताकार- मजिस्ट्रेट का महत्वपूर्ण कार्य हैः "संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देना, लोकतांत्रिक नियमों की निगरानी और आम लोगों की सेवा करना ।

सत्य का पता लगाने के लिए न्याय

संत पापा फ्राँसिस ने अपने प्रेरितिक उद्बोधन ‘इवांजेली गौदियम’ के हवाले से कहा कि एक ऐसी दुनिया में जो सत्य की जानकारी के साथ अतिशयोक्ति करती है, "यह आवश्यक है कि आप इस विचार पर वास्तविकता की श्रेष्ठता की पुष्टि करें। संत पापा ने “सत्य” और “विचार” के बीच डाले गए विधायी अंतराल को रेखांकित किया। विधायी शक्तियाँ जो जीवन की शुरुआत से लेकर अंत तक, परिवार के कानूनों को यहां तक कि "आप्रवासियों की जटिल वास्तविकता" जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को छूती हैं। जब भी न्याय को इन मुद्दों पर उच्चारण करने के लिए कहा जाता है, तो मजिस्ट्रेट को जिम्मेदारी की धारणा के लिए कहा जाता है जो उसके सामान्य कर्तव्यों से परे है। समाज में परिवर्तनों को बेहतर ढंग से समझने और कानूनों की विकासवादी व्याख्या को बुद्धिमानी से लागू करने में सक्षम होने के लिए मजिस्ट्रेट को वर्तमान ज्ञान से पारंगत होना चाहिए।

गरिमा के संबंध में न्याय

संत पापा ने कहा कि जब वे न्याय की कुर्सी पर बैठते हैं तो सबसे कमजोर लोगों के "जीवित शरीर" को छूते हैं और अदालत का फैसला राहत एवं सांत्वना दे सकता है, या यह चोट व भेदभाव भी कर सकता है। न्याय को प्रशासित करने के अपने तरीके में, मजिस्ट्रेट को हमेशा हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करने की कोशिश करनी चाहिए।  दयालुता जो कि अधिक प्रामाणिक तरीके से सत्य की खोज का पक्षधर है। "आप अधिकारियों से दयालुता की अपेक्षा की जाती है। आप "सभी नागरिकों, खासकर युवा लोगों के लिए “आदर्श” हैं, जिन्होंने प्राथमिक मूल्य ‘न्याय’ के प्रति निष्ठावान बने रहने और जीनव देने का प्रण किया है।  

09 February 2019, 15:41