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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

संत पापा के चालीसा काल के संदेश में मन-परिवर्तन

चालीसा काल के लिए संत पापा फ्राँसिस के प्रेरितिक पत्र को कार्डिनल पीटर टर्कसन ने मंगलवार को एक प्रेस सम्मेलन में प्रस्तुत किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा के प्रेरितिक पत्र को प्रस्तुत करते हुए समग्र मानव विकास हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कसन ने कहा कि संत पापा फ्राँसिस विश्वासियों का आह्वान कर रहे हैं कि वे चालीसा काल की कृपा को व्यर्थ न जाने दें तथा ईश्वर के पुत्र-पुत्रियों की तरह जीते हुए उनके नियमों को स्वीकार करें और उनका पालन करें, खासकर, अपने भाई-बहनों एवं सृष्टि के बीच।

उन्होंने बतलाया कि इस वर्ष के चालीसा काल के संदेश में संत पापा निमंत्रण दे रहे हैं कि हम पास्का पर्व के रहस्य को मनाने की तैयारी नवीकृत मन और हृदय से करें। संत पापा चेतावनी दे रहे हैं कि पाप व्यक्ति को उस बात के लिए प्रेरित करता है कि वह अपने को सृष्टि का देवता मानें, अपने आपको सब कुछ का स्वामी समझे तथा सृष्टि का प्रयोग सृष्टिकर्ता की इच्छा के अनुसार नहीं बल्कि अपनी रूचि के अनुसार करे।   

संत पापा के प्रेरितिक पत्र को मंगलवार को वाटिकन प्रेस कार्यालय में प्रस्तुत किया गया। इस वर्ष के लिए इसकी विषयवस्तु है, "क्योंकि समस्त सृष्टि उत्कण्ठा से उस दिन की प्रतीक्षा कर रही है, सब ईश्वर के पुत्र प्रकट हो जायेंगे।"

चालीसा काल की शुरूआत 6 मार्च को राखबुध से शुरू होगा और इसका अंत 20 अप्रैल पुण्य शनिवार से समाप्त होगा। चालीसाकाल के अंत में पास्का पर्व मनाया जाता है।

2019 के चालीसाकाल के संदेश द्वारा संत पापा ने आह्वान किया है कि "आइये हम अपने स्वार्थ और आत्‍मलीनता का त्याग करें तथा येसु के पास्का की ओर लौटें। आइये हम अपने भाई-बहनों की जरूरतों में उनके साथ खड़ें हों, उनके साथ हमारे आध्यात्मिक और भौतिक वस्तुओं को साझा करें।"

रोमियों के नाम संत पौलुस के पत्र पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा है कि पास्का के पहले का यह समय "पाप और मृत्यु पर ख्रीस्त के विजय का स्वागत हमारे जीवन में करने का समय है" तथा समस्त सृष्टि में उनके परिवर्तन की शक्ति की ओर आकृष्ट होना है।

26 February 2019, 17:18