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आमदर्शन समारोह में लोगों को सम्बोधित करते संत पापा आमदर्शन समारोह में लोगों को सम्बोधित करते संत पापा 

संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा, ईश्वर का अचरज

पिछले दिनों मैंने संयुक्त अरब अमीरात की लघु प्रेरितिक यात्रा सम्पन्न की है। एक संक्षिप्त यात्रा किन्तु अत्यन्त महत्वपूर्ण जो मिस्र के अल-अजहर में 2017 की मुलाकात का स्मरण दिलाता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 6 फरवरी 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर, वाटिकन के पौल षष्ठम सभागार में, विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को संयुक्त अरब अमीरात की प्रेरितिक यात्रा का वृतांत बतलाते हुए उन्हें सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

पिछले दिनों मैंने संयुक्त अरब अमीरात की लघु प्रेरितिक यात्रा सम्पन्न की है। एक संक्षिप्त यात्रा किन्तु अत्यन्त महत्वपूर्ण जो मिस्र के अल-अजहर में 2017 की मुलाकात का स्मरण दिलाता है। जिसने मानवीय भाईचारा के आधार पर दुनिया में शांति को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता में, ख्रीस्तीय एवं ईस्लाम धर्मावलम्बियों के बीच संवाद की कहानी में एक नया अध्याय लिखा है। यह पहली बार था जब एक संत पापा ने अरब प्रायद्वीप की यात्रा की है। फ्राँसिस नाम के एक संत पापा के लिए यह एक सौभाग्य की बात है कि असीसी के संत फ्राँसिस की सुलतान अल मलिक अल कमिल से मुलाकात के 800 वर्षों बाद, उन्हें मुलाकात करने का यह सुअवसर मिला है।  

ईश्वर के प्रेम को हृदय में रखना

इस यात्रा के दौरान में संत फ्राँसिस को कई बार याद किया। उन्होंने मुझे यात्रा के विभिन्न कार्यक्रमों के बीच सुसमाचार और येसु ख्रीस्त के प्रेम को अपने हृदय में धारण करने में मदद दी। संत पापा ने कहा, "मेरे हृदय में ख्रीस्त का सुसमाचार था, अपने सभी बच्चों के लिए पिता की प्रार्थना, विशेषकर, गरीबों, अन्याय, युद्ध एवं त्रासदी के  शिकार लोगों के लिए। प्रार्थना, क्योंकि ख्रीस्तीय और इस्लाम धर्मावलम्बियों के बीच संवाद, आज की दुनिया में शांति के लिए एक निर्णायक कारक है। मैं क्राउन प्रिंस, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और संयुक्त अरब अमीरात के सभी अधिकारियों को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने बहुत सम्मान के साथ मेरा स्वागत किया।" विगत दशकों में यह देश काफी प्रसिद्ध हुआ। यह पूर्वी और पश्चमी देशों का चौराहा बन गया है एक बहुराष्ट्रीय एवं बहुधार्मिक नख़लिस्तान और इस तरह मुलाकात की संस्कृति को बढ़ावा देने का एक उत्तम स्थान। संत पापा ने अपना आभार प्रकट करते हुए कहा, "मैं धर्माध्यक्ष पौल हिंदर, दक्षिण अरब के प्रेरितिक विकर के प्रति अपना आभार प्रकट करता हूँ जिन्होंने ख्रीस्तीय समुदाय के लिए इस अवसर का आयोजन किया। संत पापा ने वहाँ के सभी पुरोहितों, धर्मसमाजियों एवं लोक धर्मियों को धन्यवाद दिया जो ख्रीस्तीय समुदाय को प्रेरित करते हैं।"

यात्रा की पराकाष्ठा

क्राऊन प्रिंस तथा वारिष्ठों के मुस्लिम परिषद के साथ व्यक्तिगत मुलाकात के बाद यात्रा की पराकाष्ठा थी, संयुक्त अरब अमीरात के संस्थापक शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के स्मारक पर, अधिकारियों और राजनायिक ईकाइयों की मौजूदगी में हुई एक अंतरधार्मिक सभा। मैंने राजकुमार और अल-अजहर के महान इमाम से बात करने के बाद, ईश्वर के सामान्य मूल पर स्थापित भाईचारे के मूल्य पर ध्यान केंद्रित किया, जहाँ से हर व्यक्ति की अमूल्य गरिमा प्रवाहित होती हैं। अतः ईश्वर के नाम पर हिंसा के कृत्य को न्यायसंगत ठहराया नहीं जा सकता, बल्कि, यह इसकी गंभीरता और धार्मिक भावना के विपरीत है। हम किस तरह मानव परिवार में भाईचारे की रक्षा कर सकते हैं? इसकी रक्षा दूसरों के साथ मुलाकात करने, वार्ता तथा प्रार्थना के द्वारा ही संभव है। सिर्फ इसी से हम शिक्षा एवं न्याय के दो पंखों द्वारा शांति के कपोत के रूप में उड़ सकते हैं।  

ईश्वर के पुत्र-पुत्रियाँ

संत पापा ने बतलाया कि आबू धाबी में और एक कदम लिया गया। उन्होंने कहा, "मैं और अल-अजहर के ग्रेट इमाम ने मानव भाईचारा पर एक दस्तावेज पर संयुक्त हस्ताक्षर किया जिसमें हमने एक साथ सभी पुरुषों और महिलाओं को ईश्वर के बेटे और बेटियाँ होने के नाते भाई-बहन होने की आम बुलाहट को पुष्ट किया, विशेष, हमने धार्मिक प्रेरणा तथा दुनिया भर में प्रामाणिक मूल्यों और शांति के प्रसार के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया।

मूल्यों की रक्षा

एक ऐसे युग में जब ख्रीस्तीय एवं इस्लामिक सभ्यताओं के बीच संघर्ष का प्रलोभन तेज हो गया है तथा धर्मों को तनाव का स्रोत माना जा रहा है, हम आगे स्पष्ट एवं निर्णायक संकेत देना चाहते हैं कि न केवल मुलाकात करना संभव है बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान एवं उनसे संवाद करना भी संभव है। संस्कृतियों एवं परम्पराओं में अंतर होने के बावजूद ख्रीस्तीय एवं इस्लामिक जगत, जीवन, परिवार, धार्मिक भावना, बुजूर्गों के सम्मान और युवाओं की शिक्षा आदि आम मूल्यों की सराहना एवं उनकी रक्षा करते हैं।

शांति एवं न्याय के लिए प्रार्थना

संयुक्त अरब अमीरात में करीब एक मिलियन लोग रहते हैं। जो एशिया के विभिन्न देशों से काम करने आये हैं। कल मैंने काथलिक समुदाय के प्रतिनिधियों से आबू धाबी के संत जोसेफ महागिरजाघर में मुलाकात की। यह एक साधारण महागिरजाघर है जहाँ मैंने सभी के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित किया। शहर के खेल स्टेडियम में आयोजित इस ख्रीस्तयाग समारोह में अनेक लोगों ने भाग लिया। प्राधिधर्माध्यक्ष, महाधर्माध्यक्षों तथा धर्माध्यक्षों की उपस्थिति में अर्पित इस ख्रीस्तयाग समारोह में हमने शांति एवं न्याय के लिए प्रार्थना की, खासकर, मध्यपूर्व एवं यमन के विशेष मतलबों के लिए।

संत पापा ने कहा कि यह प्रेरितिक यात्रा ईश्वर की ओर से एक आश्चर्यजनक यात्रा थी। अतः हम उनकी कृपा के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं तथा प्रार्थना करते हैं कि बोया गया बीज ईश्वर की पवित्र इच्छा अनुसार फल उत्पन्न करे।  

यह कहते हुए संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया, खासकर, उन्होंने अमरीका से आये तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया।

अंत में, संत पापा ने सभी विश्वासियों और उनके परिवारों पर प्रभु येसु ख्रीस्त के आनन्द एवं शांति की कामना करते हुए, हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

06 February 2019, 15:05