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अगुस्तीनियानुम के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से संत पापा ने कहा कि वे परम्परा को गहरा बनायें अगुस्तीनियानुम के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से संत पापा ने कहा कि वे परम्परा को गहरा बनायें   (ANSA)

"अगुस्तीनियानुम" की स्थापना की स्वर्ण जयन्ती, संत पापा का संदेश

संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 16 फरवरी को वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में, "अगुस्तीनियानुम" धर्माचार्य शिक्षण संस्थान की स्थापना की स्वर्ण जयन्ती के अवसर पर संस्थान के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से मुलाकात की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा ने कहा, "मैं जुबिली के इस अवसर को आप लोगों के साथ मनाने के लिए खुश हूँ।" इसका अर्थ है सबसे पहले अगुस्तीनियानुम आज जो कुछ है तथा अर्ध-शताब्दी पूरी कर ली है उसके लिए ईश्वर को धन्यवाद देना। यह समय हमें पीछे मुड़कर कृपाओं के उन क्षणों को देखने हेतु प्रेरित करती है।

अगुस्तीनियानुम की स्थापना

प्रज्ञा की खोज में काथलिक परम्परा के रक्षक के रूप में अगुस्तीनियानुम की स्थापना की गयी थी, खासकर, कलीसिया के धर्माचार्यों की परम्पराओं की रक्षा के लिए। कलीसिया के लिए यह योगदान महत्वपूर्ण है। इसकी आवश्यकता हमेशा रही है किन्तु विशेषकर, इस समय में, जैसा कि संत पौल छाटवें कहते हैं, "कलीसिया के धर्माचार्यों की ओर ध्यान दिये बिना, जो ख्रीस्तीय धर्म के विकास का हिस्सा है, इसके बिना वाटिकन द्वितीय ख्रीस्तीय एकता समिति की इच्छा, बाईबिल नवीकरण, धर्मविधिक सुधार एवं ईशशास्त्रीय खोज को लागू किया जाना संभव नहीं है।" संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने सन् 1982 में संस्थान का दौरा किया था तब उन्होंने कहा था कि "धर्माचार्यों के स्कूल में अपने को डालने का अर्थ है ख्रीस्त को अधिक अच्छी तरह से जानना और लोगों को भी अच्छी तरह समझना और यही ज्ञान कलीसिया को मिशन में बड़ी सहायता प्रदान करती है।

चुनौतियों का विवेकपूर्ण सामना करने में सहायक

अतः संत पापा ने प्रोत्साहन दिया कि वे अपने मूल और कर्तव्यों के प्रति वफादार रहें और बौद्धिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों को प्रदान करने की प्रतिबद्धता में धीर बने रहें, जो विद्यार्थियों को कलीसिया तथा इस समय की चुनौतियों का सामना विवेकपूर्ण तरीके से करने हेतु तैयार करेगा। संत पापा ने कहा कि यह सेवा सुसमाचार प्रचार एवं ईश्वर की पूर्णता की ओर मानव परिवार के विकास को प्रोत्साहन देने में मदद देता है।

सच्चाई के आनन्द की खोज

संत पापा ने प्रेरितिक संविधान "वेरितातिस गौदियुम" के शब्दों का स्मरण दिलाते हुए कहा, "सच्चाई का आनन्द उस तीव्र अभिलाषा को व्यक्त करता है जो तब तक उन सभी लोगों के हृदय को बेचैन बना देता है जब तक कि वे ईश्वर की सभी प्रकाशनाओं से भेंट नहीं कर लेते, उसे नहीं जीते और नहीं बांटते हैं। संत अगुस्टीन के शब्द यहाँ स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं, जिन्होंने ईश्वर में विश्राम पाने के लिए मनुष्यों के हृदय की बेचैनी को प्रस्तुत किया था। ईश्वर जो येसु ख्रीस्त में प्रकट हुए, जीवन की सबसे गहरी सच्चाई एवं उसके अंतिम लक्ष्य को दिखलाते हैं।  

संत पापा ने अगुस्तीनियानुम के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को अपनी प्रार्थना का आश्वासन दिया तथा आग्रह किया कि जब वे जयन्ती मना रहे हैं तब एक-दूसरे के लिए प्रार्थना करें ताकि प्रभु उन्हें खोजने, शिक्षा देने एवं अध्ययन करने के दैनिक समर्पण में शक्ति प्रदान करे। उन्होंने संत अगुस्तीन एवं संत मोनिका की मध्यस्थता द्वारा उनके लिए प्रार्थना करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

16 February 2019, 15:31