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पनामा यात्रा से लौटते समय पत्रकारों से बातचीत पनामा यात्रा से लौटते समय पत्रकारों से बातचीत  (Copyright 2019 The Associated Press. All rights reserved.)

सन्त पापा ने किया नाबालिगों, आप्रवासियों की सुरक्षा का आह्वान

पनामा में अपनी चार दिवसीय प्रेरितिक यात्रा सम्पन्न कर, रोम तक वापसी यात्रा के दौरान, सन्त पापा फ्राँसिस ने नाबालिगों की सुरक्षा, गर्भपात, आप्रवासियों के उत्पीड़न आदि कई विषयों पर पत्रकारों से बातचीत की।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन रेडियो

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 29 जनवरी 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): पनामा में अपनी चार दिवसीय प्रेरितिक यात्रा सम्पन्न कर, रोम तक वापसी यात्रा के दौरान, सन्त पापा फ्राँसिस ने नाबालिगों की सुरक्षा, गर्भपात, आप्रवासियों के उत्पीड़न आदि कई विषयों पर पत्रकारों से बातचीत की.

आगामी माह वाटिकन में बच्चों की सुरक्षा तथा यौन दुराचारों के मामलों पर विचार-विमर्श हेतु सन्त पापा फ्राँसिस ने विश्व के काथलिक धर्माध्यक्षों को एक शीर्ष सम्मेलन के लिये बुलाया है. स सन्दर्भ में होंन्होंने चेतावनी दी कि बच्चों की सुरक्षा पर आयोजित इस सम्मेलन से लोग आडम्बरी और बढ़ी-चढ़ी षक्षाओं की उम्मीद नहीं करें.

सन्त पापा ने कहा कि यौन दुराचार की समस्या एक मानवीय समस्या है और इसका अस्तित्व मानव के साथ रहेगा, तथापि, कलीसिया में इस समस्या का समाधान ढूँढ़कर हम इसका हल समाज में एवं परिवारों में भी ढूँढ़ पायेंगे.  

धर्माध्यक्षों के लिये धर्मशिक्षा

फरवरी माह के लिये निर्धारित सम्मेलन के उद्देश्य को समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह जान लेने के बाद कि कई धर्माध्यक्षों को यौन दुराचार के मामलों से निपटने का रास्ता नहीं पता था इस शीर्ष सम्मेलन का आयोजन अनिवार्य समझा गया. सन्त पापा ने कहा, "धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों को इस विषय पर मशर्मशिक्षा प्रदान करना हमने अपनी ज़िम्मेदारी महसूस की." उन्होंने बताया कि फरवरी सम्मेलन में इस त्रासदी की गहराई को समझने के लिये धर्माध्यक्षों में चेतना जागरण का प्रयास किया जायेगा तथा एक निर्देशिका तैयार की जायेगी जिसका अनुसरण कर धर्माध्यक्ष दुराचार के मामलों से निपटने के लिये मार्गदर्शन पा सकेंगे.

कलीसिया में युवाओं का स्थान

पनामा सिटी में 34 वें शिश्व युवा दिवस के समारोहों का नेतृत्व कर रोम लौटते सन्त पापा फ्राँसिस से एक पत्रकार ने प्रश्न किया कि "युवा व्यक्ति क्यों कलीसिया को छोड़ देते हैं?" इसके उत्तर में सन्त पापा ने कहा कि ख्रीस्तानुयायियों में और, विशेष रूप से, पुरोहितों एवं मर्माध्यक्षों में साक्ष्य की कमी कारण ऐसा होता है. उन्होंने कहा कि जो स्वतः को ख्रीस्त के अनुयायी कहते और ख़ुद येसु की शिक्षाओं पर नहीं चलते हैंन्हें स्वतः को काथलिक कहने का कोई अधिकार नहीं है.

पूर्वधारणाओं से दूर रहें

आप्रवासियों और उनकी व्यथा से सम्बन्धित प्रश्न के जवाब में सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि यह समस्या बहुत ही जटिल है, तथापि, ज़रूरतमन्द का स्वागत करना तथा अजनबी के प्रति उदार रहना महत्वपूर्ण है. इसके साथ ही, उन्होंने कहा, "सरकारी नेताओं को विवेक का उपयेग कर सुनिश्चित्त करना चाहिये कि मेजबान देशों में व्रवासियों का एकीकरण सम्भव बनें." उन्होंने यूरोप में ग्रीस और इटली तथा मध्यपूर्व में लेबनान एवं जॉर्डन को उदारता और एकात्मता के आदर्श निरूपित किया और कहा, "प्रवसन एक बहुत जटिल मुद्दा है जिसपर बिना किसी पूर्वधारणा के बातचीत की जाना अनिवार्य है."  

 

29 January 2019, 10:32