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संत जोन बोस्को संत जोन बोस्को  

संत पापा फ्राँसिस पुरोहितों सेः डॉन बोस्को का अनुकरण करें

डॉन बोस्को में मानवीय नजरों और ईश्वर की नजरों से वास्तविकता को देखने का साहस था।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, गुरुवार 31 जनवरी 2019 (रेई) : काथलिक कलीसिया 31 जनवरी को संत डॉन बॉस्को का स्मरण करती है। संत डॉन बॉस्को ने युवाओं को आशा, अशियाना और भविष्य दिया। एक पुरोहित के रुप में संत डॉन बॉस्को  युवाओं के मार्गदर्शक और पिता माने जाते थे। संत पापा ने डॉन बॉस्को के त्योहार पर सभी पुरोहितों को वर्तमान समय की वास्तविकता देखने हेतु डॉन बोस्को से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।  

उन्होने संदेश में लिखा, “डॉन बोस्को में मानवीय नजरों और ईश्वर की नजरों से वास्तविकता को देखने का साहस था। हर पुरोहित मानवीय नजरों और ईश्वर की नजरों से वास्तविकता देखने में डॉन बोस्को का अनुकरण करें।”

जोन बोस्को 

संत जोन बोस्को सलेसियन समाज के संस्थापक हैं। इनका जन्म 1815 ई. में इटली में पियेमोंते के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने 16 साल की उम्र में चिएरी के गुरुकुल में प्रवेश किया और तूरीन में उनका पुरोहिताभिषेक हुआ। अभिषेक के बाद अपने अधिकारियों की अनुमति लेकर नगर के छोटे मजदूर बच्चों के लिए और अवारा बच्चों के लिए रविवारीय धर्मशिक्षा एवं मनोरंजन का आयोजन करने लगे। ।

दिसम्बर 1859 में अपने 22 साथियों के साथ संत जोन बोस्को ने नये समाज की स्थापना करने का निश्चय किया। उनके समाज के नियम को संत पापा पीयूस नवें ने स्वीकार किया। धर्म समाज में उनकी संख्या बढती गई।

31 जनवरी 1888 को उनकी मृत्यु तूरीन में हुई। उस समय कुल सदस्यों की संख्या 768 थी। 2000 में, इस धर्मसमाज के 2,711 घरों में 17,000 से अधिक सदस्य थे। यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मिशनरी संगठन है।

1934 ई. में जोन बोस्को संत घोषित हुए।

31 January 2019, 16:12