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सान्ता मरिया ला आन्तिग्वा महागिरजाघर में सन्त पापा फ्राँसिस सान्ता मरिया ला आन्तिग्वा महागिरजाघर में सन्त पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

पुरोहित बुलाहट की चिंगारी से प्रस्फुटित आनन्द की पुनर्खोज करें

केन्द्रीय अमरीका के पनामा राष्ट्र में अपनी चार दिवसीय प्रेरितिक यात्रा की पूर्वसन्ध्या, शनिवार को, सन्त पापा फ्राँसिस ने काथलिक पुरोहितों एवं धर्मबहनों का आह्वान किया कि वे उस आनन्द की पुर्नखोज करें जो उनकी बुलाहट की चिंगारी से प्रस्फुटित हुआ था।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 27 जनवरी 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): केन्द्रीय अमरीका के पनामा राष्ट्र में अपनी चार दिवसीय प्रेरितिक यात्रा की पूर्वसन्ध्या, शनिवार को, सन्त पापा फ्राँसिस ने काथलिक पुरोहितों एवं धर्मबहनों का आह्वान किया कि वे उस आनन्द की पुर्नखोज करें जो उनकी बुलाहट की चिंगारी से प्रस्फुटित हुआ था.

पनामा के ऐतिहासिक केन्द्र एवं यूनेस्को द्वारा घोषित राष्ट्रीय धरोहर के "सान्ता मरिया ला आन्तिग्वा" मरियम महागिरजाघर के घण्टे की गूँज के बीच सन्त पापा फ्राँसिस ख्रीस्तयाग समारोह के लिये पधारे. महागिरजाघर में एक वर्ष तक्णोद्धार के उपरान्त शनिवार को सन्त पापा ने महागिरजाघर की प्रमुख वेदी पर तेल विलेपन कर उसका अनुष्ठान किया.

नये मार्गों की तलाश

मरियम महागिरजाघर में पुरोहितों, धर्मबहनों तथा लोकधर्मी विश्वासी संगठनों के प्रतिनिधियों के लिये सन्त पापा ने ख्रीस्तयाग कर प्रवचन किया. यह स्वीकार करते हुए कि "आज के पुरोहित कलीसिया में किये पापों के घावों से थक चुके हैं" सन्त पापा ने उन्हें प्रेरित किया कि वे समर्पित जीवन की बुलाहट के क्षण को याद कर नवीन स्फूर्ति के साथ कलीसिया को नवीकृत करने के लिये नये मार्गों की तलाश करें.

धर्मसमाजियों एवं धर्मसंघियों का को उन्होंने स्मरण दिलाया कि ख्रीस्त का सुससाचार ही उनका मार्गदर्शक है हालांकि, द्रुतगति से बदलते विश्व में कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि काथलिक सन्देश की कोई जगह नहीं है. उन्होंने कहा कि वे पुरोहितों एवं धर्मबहनों में व्याप्त कठिनाइयों से वाकिफ़ हैं तथा सचेत हैं कि उन्हें कई प्रकार दबाव के नीचे अपनी प्रेरिताई का निर्वाह करना पड़ता है जो निराशा, कुंठा एवं गहन व्यथा का कारण हो सकता है.

पुरोहित भरोसा रखें

सन्त पापा ने चेतावनी दी कि काम का बोझ तथा कुछेक समुदायों के भीतर उपस्थित "विषाक्त" स्थितियों से उत्पन्न, थकावट कभी-कभी गतिहीनता का कारण बन सकती है. पुरोहितों एवं धर्मबहनों में खोई उम्मीदों के सन्दर्भ में सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, "धूमिल होती आशा से उत्पन्न थकावट स्वयं कलीसियाई सदस्यों के पाप से घायल कलीसिया को देखने से आती है जो प्रायः उस रुदन को सुनने में असमर्थ रही जिसमें स्वयं उसके प्रभु और गुरु येसु की पुकार प्रतिध्वनित हुई थी: 'मेरे ईश्वर, मेरे ईश्वर तूने मुझे क्यों छोड़ दिया है? "


सन्त पापा फ्राँसिस ने हालांकि, किसी विशिष्ट "पाप" का ज़िक्र नहीं किया तथापि, यह किसी से छिपा नहीं है कि हाल के वर्षों में विश्व के कई राष्ट्रों से पुरोहितों द्वारा बच्चों के विरुद्ध यौन दुराचार के कई मामले सामने आये हैं. इसी के सन्दर्भ में सन्त पापा फ्राँसिस ने "कलीसियाई सदस्यों के पाप" तथा "घायल कलीसिया", जैसे वाक्यांशों का प्रयोग किया. सार्वभौमिक कलीसिया में व्याप्त दुराचारों के मामलों से निपटने के लिये उन्होंने फरवरी माह में विश्व के काथलिक धर्माध्यक्षों की एक शीर्ष बैठक भी बुलाई है.
 

27 January 2019, 12:06