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पापस्वीकार पीठिका में संत पापा फ्राँसिस पापस्वीकार पीठिका में संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

पाकोरा के युवा कारावास में पश्चताप धर्मविधि समारोह

पानामा में विश्व युवा दिवस के दौरान संत पापा फ्राँसिस लास गारसास दे पाकोरा” में युवाओं से मुलाकात की और उनके लिए पश्चताप की धर्मविधि और पापस्वीकार संस्कार दिया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

पकोरा,शनिवार 26 जनवरी 2019 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार के दिन करुणा     के कार्यों को जारी रखते हुए पनामा सिटी के बाहर “लास गारसास दे पाकोरा” में युवाओं से मुलाकात की और उनके लिए पश्चताप की धर्मविधि और कुछ युवाओं को पापस्वीकार संस्कार दिया।

पश्चताप धर्मविधि के दौरान संत पापा ने अपना प्रवचन संत लूकस के सुसमाचार के इस वाक्य से शुरु किया,“यह मनुष्य पापियों का स्वागत करता है और उनके साथ खाता-पीता है।” संत पापा ने कहा कि फरीसी और शास्त्री येसु के विरुद्ध भुनभुनाते थे क्योंकि वे येसु के जीने के तौर तरीकों से परेशान थे। वे येसु को दूसरों की नजर में नीचा दिखाना चाहते थे।

येसु समाज से परित्यक्त और पापी लोग जैसे चुंगी जमा करने वालों के साथ उठते-बैठते थे। वे जानते थे कि निन्यानबे धर्मियों की अपेक्षा,जिन्हें पश्चताप की आवश्यकता नहीं है,एक पश्चतापी पापी के लिए स्वर्ग में अधिक आनंद मनाया जाएगा। (लूकस 15:7)

फरीसी और शास्त्रियों को किसी भी प्रकार के परिवर्तन, हृदय परिवर्तन को रोकने या शिकायत करने में आत्मसंतुष्टि मिलती थी। जबकि येसु ने दूसरों को बचाने में अपनी प्रतिष्ठा को भी खतरे में डाल कर दिया। येसु और फरीसियों के दृष्टिकोण में बहुत अंतर था। दो बहुत अलग और विरोधाभासी दृष्टिकोण।

भुनभुनाने और गपशप का दृष्टिकोण

संत पापा ने फरीसियों और शास्त्रियों के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फरीसी और बहुत से अन्य लोग भी येसु के व्यवहार और जीवन जीने के तरीके को पसंद नहीं करते थे। वे जीवन में किसी तरह का परिवर्तन नहीं चाहते थे। वे नियम कानून के आगे लोगों को महत्व नहीं देते थे। वे लोगों पर लेबल लगाते थेः ये लोग अच्छे हैं और वे बुरे हैं, ये लोग धर्मी हैं और ये लोग पापी हैं। और इस तरह के लेबल से परे वे सोच भी नहीं सकते थे कि एक पापी भी धर्मी की गिनती में आ सकता है।

संत पापा ने कहा कि इस तरह का दृष्टिकोण सब कुछ खराब कर देता है, क्योंकि यह एक अदृश्य दीवार बनाता है और वे सोचते हैं कि अगर वे दूसरों को अलग रखें, हाशिये पर रखें तो उनकी समस्याएँ स्वतः दूर हो जाएगी। इस तरह समाज में विभाजन बढ़ता है। ये लोग भी प्रधानयाजक कैफस के समान सोचते हैं जिन्होंने कहा था,“ हमारा कल्याण इसी में है कि एक ही मनुष्य जनता के लिए मर जाये और समस्त राष्ट्र का सर्वनाश न हो।” (योहन 11:50) आम तौर पर धागे को सबसे पतले हिस्से में काटा जाता है: जो सबसे कमजोर होता है।

संत पापा ने कहा कि यह देखना कितना दर्दनाक है जब एक समाज अपनी सारी ऊर्जा को शिकायत करने और गपशप करने में लगाती है जबकि उसे परिवर्तन और नये अवसरों की खोज में खर्च करनी चाहिए।

हृदयपरिर्तन का दृष्टिकोण            

संत पापा ने कहा कि फरीसियों द्वारा पापियों की गिनती में आने वाले लोगों के प्रति येसु का दृष्टिकोण उस पिता के हृदय के समान था जो अपने बच्चों के घर लौटने की राह देखता है और उनके लौटने पर आनंद मनाता है। (लूक.15:11-31). येसु भी उन लोगों के साथ अपने पिता के प्रेम और करुणा को साझा किया। ऐसा प्रेम जो शिकायत नहीं करता परंतु हर परिस्थिति में आगे बढ़ने और सभी को स्वीकारने की शक्ति देता है, हृदय के घावों और नासूर को चंगा करता है और मुक्ति के मार्ग पर आगे ले चता है। चूंगी लेने वालों और पापियों के साथ खाना खाते हुए येसु फरीसियों और शास्त्रियों की उस मानसिकता को तोड़ता है जो लोगों के बीच "अच्छा और बुरा" “धर्मी और पापी” का विभाजन लाती है।    

संत पापा ने कहा कि हम में से प्रत्येक हमारे लेबल से कहीं बढ़कर हैं। येसु आज हमें यही शिक्षा देते और विश्वास करने को कहते हैं।  उनका दृष्टिकोण हमें चुनौती देता है कि सुधार के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए हम मदद मांगे और मदद लें। उन आवाज़ों को सुनें जो आपको आगे देखने के लिए प्रोत्साहित करती है, न कि उन्हें जो आपको गर्त की ओर खींचती है।

संत पापा ने कहा कि हर ख्रीस्तीय की खुशी और आशा उस ईश्वर के पास से आती है जो कहते हैं,“आप मेरे परिवार के सदस्य हैं, आपका स्थान बाहर नहीं परंतु मेरे पास मेरी बगल में है।” ईश्वर हम सभी को अपने प्रेम का अनुभव करने का अवसर देते हैं। आप यहाँ रहकर उसके प्रेम का अनुभव दूसरों के द्वारा करते हैं जो आपको नई राह और नये लक्ष्य को प्राप्त करने में आपकी मदद करते हैं। संत पापा ने कहा कि वे इस बड़े परिवार के सदस्य हैं और उन्हें बहुत कुछ एक दूसरे को साझा करना है। उन्हें एक दूसरे की मदद करते हुए जीवन में परिवर्तन लाना है।

संत पापा ने कहा कि एक समाज जब अपने बेटों और बेटियों में बदलाव की खुशी मनाने में असमर्थ होता है,तब हमें समझना चाहिए कि वह बीमार है उसी प्रकार एक समुदाय अगर लगातार नकारात्मक और हृदयहीन शिकायत करता है, तो वह समुदाय बीमार है। एक समाज तब फलदायी होता है जब वह समुदाय, शिक्षा और रोजगार के माध्यम से भविष्य का निर्माण करने के लिए युवाओं को नई संभावनाओं की पेशकश करने वाले अवसरों और विकल्पों को बनाने और शामिल करने की कोशिश करता है। हम सभी को इन तरीकों को खोजने के लिए, एक समुदाय के रूप में सीखने में मदद करनी होगी। आप एक दूसरे को प्रोत्साहित करें। अपने जीवन में परिवर्तन ने हेतु प्रभु आपका मार्ग दर्शन करे और अपनी आशीष दे और सदा आपके साथ रहे। 

26 January 2019, 14:52