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मध्य अमेरिका के धर्माध्यक्षों को संदेश देते हुए संत पापा फ्राँसिस मध्य अमेरिका के धर्माध्यक्षों को संदेश देते हुए संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

एक विनम्र कलीसिया जो खुद को घायल होने देती है, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने विश्व युवा दिवस के लिए पनामा में एकत्रित मध्य अमेरिका के धर्माध्यक्षों से मुलाकात की। उन्होंने संत ऑस्कर रोमेरो, युवाओं पर हुई धर्मसभा और मसीह के (केनोसिस) ईश्वरता के त्याग के संदर्भ में संदेश दिया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

पनामा सिटी, शुक्रवार 25 जनवरी 2019 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस 34 वें विश्व युवा दिवस के समारोह में शरीक होने के लिए पनामा गये हैं। संत पापा फ्राँसिस ने पनामा में अपनी यात्रा के पहले दिन गुरुवार शाम को संत फ्राँसिस असीसी महागिरजाघर में मध्य अमेरिका के धर्माध्यक्षों के साथ मुलाकात की। संत पापा ने संत साल्वादोर के महाधर्माध्यक्ष को उनके स्वागत भाषण के लिए धन्यवाद दिया। संत पापा ने कहा कि मध्य अमेरिका धर्माध्यक्षीय सचिवालय की स्थापना के 75 वर्षों के दौरान कलीसिया ने अनेक उताव चढ़ाव देखे हैं। अनेक कठिनाइयों के बावजूद कलीसिया में विश्वासियों की संख्या में वृद्धि और विश्वास में प्रौढ़ता आयी है। मध्य अमेरिका के फलदायी होने का सबसे बड़ा उदाहरण हैं संत ओस्कार रोमेरो जिन्हें संत पापा ने हाल ही में युवाओं पर हो रहे धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के दौरान संत घोषित किया। उनका जीवन और उनकी शिक्षाएँ हमारी कलीसिया के लिए और विशेष रुप से हम धर्माध्यक्षों के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत है।

कलीसिया के साथ सोच

संत पापा ने कहा कि संत ऑस्कर रोमेरो के धर्माध्यक्षीय आदर्श वाक्य "कलीसिया के साथ सोच" को उनकी समाधि पर अंकित किया गया है। संत ऑस्कर रोमेरो ने अपने जीवन के भारी उथल-पुथल समय में भी अपने सिद्धांत के अनुसार कलीसिया की अगुवाई की। यह उनके जीवन और निष्ठा का कम्पास था।  संत पापा ने धर्माध्यक्षों को याद दिलाया कि "कलीसिया के साथ सोच" का अर्थ है "ईश्वर की पीड़ा और आशा से भरे लोगों के साथ सोच।"

संत पापा ने कहा अगर आप एक धर्मशास्त्री नहीं होते,तो केनोसिस शब्द से आपका वास्ता दिन प्रति दिन के जीवन में नहीं हो पाता। यह ग्रीक भाषा से आता है जिसका अर्थ है “अपने आप को खाली करना।” इसका प्रयोग संत पौलुस ने अपने पत्र में फिलिप्पियों को यह बताने के लिए किया है कि कैसे येसु ने "अपने आप को खाली किया" ताकि वह अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए पूरी तरह से खुला और ग्रहणशील बन सके।

मध्य अमेरिका के धर्माध्यक्ष धर्मशास्त्री हैं। वे समझ गए कि संत पापा किस बात का जिक्र कर रहे हैं। धर्माध्यक्ष रोमेरो ने केनोसिस शब्द का उपयोग कलीसिया के अस्थित्व का वर्णन करने के लिए किया था। कलीसिया विनम्र और अकिंचन है क्योंकि "कलीसिया में, मसीह हमारे बीच रहते हैं।"

मसीह के केनोसिस युवा हैं

संत पापा ने कहा कि वे सभी युवाओं के साथ 34वां युवा दिवस समारोह में भाग ले रहे हैं। यह युवाओं से मिलने, उनको करीब से जानने और अनुभव करने का "एक अनूठा अवसर" है। युवा लोग "आशा और अभिलाषाओं से भरे होने के बावजूद कईयों ने जीवन में भारी दुख और कष्टों का भी अनुभव किया है। उनके साथ, "हम हमारी दुनिया की नए तरीके से व्याख्या कर सकते हैं और समय के संकेतों को पहचान सकते हैं।"

संत पापा ने कहा, “युवा लोग बैरोमीटर की तरह होते हैं, वे हमें बताते हैं कि समाज और समुदाय में हमारा स्थान कहाँ है।” संत पापा फ्राँसिस ने युवा लोगों पर धर्माध्यक्षों की धर्मसभा में भी बार-बार इस संदर्भ में चर्चा की थी । उन्होंने कहा, "भविष्य की मांग है कि हम वर्तमान का सम्मान करें।" यह गरिमा का सवाल है, "सांस्कृतिक आत्मसम्मान" का सवाल है।”

संत पापा ने प्रवास के मुद्दे पर विचार करने के लिए धर्माध्यक्षों को आमंत्रित किया: "अधिकांश प्रवासियों का चेहरा युवा चेहरा है, वे अपने लिए बेहतर भविष्य की खोज में जोखिम लेने और सब कुछ पीछे छोड़ने से डरते नहीं हैं। हम इन युवाओं के प्रति उदासीन नहीं रह सकते।" उन्होंने कहा कि भले ही दुनिया इन लोगों को नकार सकती या पीछे छोड़ सकती है, पर  मसीह का केनोसिस नहीं।" क्योंकि मसीह के केनोसिस युवा हैं।

मसीह के केनोसिस पुरोहित हैं

संत पापा फ्राँसिस ने संत ऑस्कर रोमेरो का उदाहरण देते हुए कहा कि संत सल्वाडोर के शहीद महाधर्माध्यक्ष महाधर्मप्रात के "मानव संसाधन प्रबंधक मात्र नहीं" थे परंतु वे “एक पिता, एक मित्र और एक भाई” थे। "वे हमारे लिए एक मानदंड के रूप में काम कर सकते हैं।" धर्माध्यक्ष के रुप में हम अपने हृदय की परख करें, हमारे पुरोहितों का जीवन हमें कितना प्रभावित करता है?" इस चुनौती भरी दुनिया का सामना करने वाले हमारे पुरोहितों को हमारे सहयोग, प्रोत्साहन और हमारे पितृत्व की आवश्यकता है।"

संत पापा ने कहा कि  मसीह का केनोसिस, "पिता के करुणा की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है"। एक पल्ली पुरोहित आप में उस पिता की छवि को देख पाये जो मात्र प्रशासक न हो अपितु अपने लोगों की चिंता करे उनके लिए समय दे और उनकी सुने।

मसीह का केनोसिस गरीब हैं

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को "आध्यात्मिक सांसारिकता" के बारे में चेतावनी दी जो एक धार्मिकता और पवित्रता के लिबास में अभिमान, घमंड और अहंकार की इच्छा को डालता है। धर्माध्यक्ष अपनी शक्ति और प्रभाव का गलत प्रयोग करने से बचें। संत पापा ने कहा कि कलीसिया तभी इनसे मुक्त हो सकती है जब वह "अपने प्रभु के केनोसिस में अपने आप को केंद्रित करे।"

 संत रोमेरो का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि कलीसिया "नहीं चाहती कि उसकी ताकत शक्तिशालियों या राजनीतिक नेताओं के समर्थन में हो"। इसके बजाय, वह "उनके साथ व्यापक फासला बनाते हुए, गरीबों और जरुरतमंदों को साथ आगे बढ़े।" यह स्पष्ट और व्यावहारिक संकेत है, "यह हमें चुनौती देती है और हमें हमारे संसाधनों, प्रभाव और पद के उपयोग में हमारे निर्णयों और प्राथमिकताओं के प्रति हमारे विवेक की जांच करने के लिए प्रेरित करता है।"

25 January 2019, 15:08