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देवदूत प्रार्थना करते पोप फ्राँसिस देवदूत प्रार्थना करते पोप फ्राँसिस   (AFP or licensors)

प्रभु के इन्तजार का रास्ता है, मन-परिवर्तन, संत पापा

पिछले रविवार का धर्मविधिक पाठ आगमन काल एवं प्रभु के इन्तजार की घड़ी को जागते एवं प्रार्थना करते हुए जीने का निमंत्रण दिया था। आज, आगमन का दूसरा रविवार दिखला रहा है कि उस उम्मीद को मन-परिवर्तन की यात्रा द्वारा किस तरह दृढ़ता प्रदान किया जा सकता है और उस आशा को ठोस बनाया जा सकता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 10 दिसम्बर 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 9 दिसम्बर को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो सुप्रभात।

पिछले रविवार के धर्मविधि पाठ आगमन काल एवं प्रभु के इन्तजार की घड़ी को जागते एवं प्रार्थना करते हुए जीने का निमंत्रण दिया था। आज, आगमन का दूसरा रविवार दिखला रहा है कि उस उम्मीद को मन-परिवर्तन की यात्रा द्वारा किस तरह दृढ़ता प्रदान किया जा सकता है जिससे कि उस आशा को ठोस बनाया जा सके।

यात्रा के लिए मार्गदर्शक

इस यात्रा हेतु मार्गदर्शक के रूप में, सुसमाचार पाठ संत योहन बपतिस्ता का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो यर्दन के आस-पास के समस्त प्रदेश में घूम-घूम कर पाप क्षमा के लिए पश्चात्ताप के बपतिस्मा का उपदेश देता था।( लूक. 3,3) योहन बपतिस्ता के मिशन का वर्णन करते हुए, सुसमाचार लेखक संत लूकस नबी इसायस के एक प्राचीन भविष्यवाणी का भी जिक्र करते हैं जो इस प्रकार है, "जैसा कि नबी इसायस की पुस्तक में लिखा है: निर्जन प्रदेश में पुकारने वाले की आवाज’- प्रभु का मार्ग तैयार करो; उसके पथ सीधे कर दो। हर एक घाटी भर दी जायेगी, हर एक पहाड़ और पहाड़ी समतल की जायेगी, टेढ़े रास्ते सीधे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते बराबर कर दिये जायेंगे।" (पद. 4-5)

संत पापा ने कहा, "प्रभु के आगमन के रास्ते को तैयार करते हुए हमें मन-परिवर्तन की आवश्यकता पर ध्यान देना है जिसके लिए योहन बपतिस्ता हमें निमंत्रण देते हैं।

घाटी और पहाड़

मन-परिवर्तन हेतु ये आवश्यकताएँ कौन-सी हैं? सबसे पहले हमें निराशा द्वारा उत्पन्न गुनगुनापन एवं उदासीनता में सुधार लाना तथा येसु के समान अपने आपको दूसरों के लिए खोलना है अर्थात् भाईचारापूर्ण मनोभाव धारण करते हुए, अपने पड़ोसियों की आवश्यकताओं के लिए जिम्मेदारी लेना है। जिस तरह हम एक गड्ढे वाले रास्ते पर नहीं चल सकते उसी तरह दूसरों के साथ प्रेम, उदारता, भाईचारा का संबंध स्थापित किये बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते। इसके लिए मन-परिवर्तन की आवश्यकता है तथा उन लोगों के प्रति विशेष ध्यान देने की जरूरत है जो सबसे अधिक जरूरतमंद हैं। हमें अपने घमंड एवं अभिमान को भी कम करना है। कितने लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि घमंड कठोर होता और सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित नहीं कर सकता। हमें अपने भाई-बहनों के साथ मेल-मिलाप के ठोस चिन्ह द्वारा अपनी गलतियों के लिए उनसे क्षमा मांगने की आवश्यकता है। संत पापा ने कहा कि मेल-मिलाप करना आसान नहीं है क्योंकि कई बार हम सोचते हैं कि कौन पहला कदम लेगा। यदि हमारा मनोभाव अच्छा है तो पहला कदम लेने के लिए प्रभु हमें सहायता देते हैं। मन-परिवर्तन वास्तव में एक ऐसी क्रिया है जो हमें अपनी गलतियों, सीमाओं एवं कमजोरियों को दीनता पूर्वक स्वीकार करने हेतु प्रेरित करता है।

कोमलता एवं क्षमाशीलता का मनोभाव

एक विश्वासी वह है जो अपने भाई के करीब रहता है जैसा कि योहन बपतिस्ता ने निर्जन प्रदेश में रास्ता खोल दिया, जो असफलता एवं हार के कारण असंभव लगने वाली परिस्थिति में भी आशा का संकेत देता है। हमें बंद एवं बहिष्कार की नकारात्मक परिस्थिति को अनुमति नहीं देना चाहिए और न ही दुनियादारी के मनोभाव के गुलाम बनना चाहिए क्योंकि हमारे जीवन के केंद्र येसु हैं एवं हमें उनके वचन, प्रेम एवं सहानुभूति से प्रकाश प्राप्त होता है। योहन बपतिस्ता ने अपने समय के लोगों को बल, शक्ति और गंभीरता के साथ मन-परिवर्तन का निमंत्रण दिया, फिर भी वे जानते थे कि उन्हें किस तरह सुनना है। वे उन सभी लोगों को जो अपने पापों को स्वीकार करने एवं पश्चाताप का बपतिस्मा लेने उनके पास आते थे, उन्हें कोमलता एवं क्षमाशीलता के मनोभाव के साथ सुनना जानते थे।  

मसीह का इन्तजार

योहन बपतिस्ता के जीवन का साक्ष्य, हमें अपने जीवन के साक्ष्य की ओर आगे बढ़ने में मदद करे। उनकी घोषणा की शुद्धता, सच्चाई को प्रकट करने का साहस, मसीह की आशा जगाने में सक्षम है जो लम्बे समय तक निष्क्रिय थी। संत पापा ने कहा कि आज भी येसु के शिष्य उनके विनम्र किन्तु साहसी साक्षी बनने एवं आशा जगाने के लिए बुलाये जाते हैं। इस बात को स्पष्ट करने के लिए कि इन सारी बाधाओं के बावजूद पवित्र आत्मा के सामर्थ्य से स्वर्ग का राज्य फैलता ही जाता है। हम प्रत्येक अपने आप में सोचें कि मैं प्रभु का रास्ता तैयार करने के लिए किस तरह अपने मनोभाव में परिवर्तन ला सकता हूँ?

धन्य कुँवारी मरियम हमें हरेक दिन, दृढ़ धैर्य, शांति, न्याय और बंधुता के बीज द्वारा अपने आप से शुरू करते हुए, अपने आस-पास प्रभु के लिए रास्ता तैयार करने में मदद करे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

10 December 2018, 15:22