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देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा का संदेश देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा का संदेश  (Vatican Media)

नाजरेत के परिवार पर चिंतन

संत पापा फ्रांसिस ने 30 दिसम्बर के देवदूत प्रार्थना के पूर्व दिये गये अपने संदेश मेंं पवित्र परिवार पर चिंतन किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 31 दिसम्बर 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने 30 दिसम्बर को संत पेत्रुस महागिरजा घर के प्रांगण में देवदूत प्रार्थना हेतु जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को  संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाई और बहनो, सुप्रभात।

आज की धर्मविधि में हम पवित्र परिवार का त्योहार मनाते हैं जो हमें मरियम, योसेफ और येसु के अनुभवों पर चिंतन करने का निमंत्रण देती है, जहाँ हम उन्हें ईश्वर के अतुल्य प्रेम और विश्वास से भरा पाते हैं। आज का सुसमाचार नाजरेत के परिवार का पास्का पर्व मनाते हेतु येरुसालेम जाने की चर्चा करता है। लेकिन येरुसालेम से लौटने के क्रम में माता-पिता यह देखते हैं कि येसु भीड़ में नहीं है। तीन दिनों से भयभीत येसु की खोज करते हुए वे उसे येरुसालेम मंदिर में शस्त्रियों और फरीसियों के साथ वाद-विवाद करता हुआ पाते हैं। बेटे को देख कर मरियम औऱ योसेफ को आश्चर्य होता है और मरियम अपने हृदय की बात कहती है, “तेरे पिता और मैं कितना दुःखी हो कर तुमको खोजते रहे।”

आश्चर्य और दुःख

संत पापा ने कहा कि मैं उनके “आश्चर्य और दुःख” इन दो बातों पर आप का ध्यान आकर्षित कराना चाहूंगा। नाजरेत के परिवार में आश्चर्य अपने में कभी समाप्त नहीं होता यहाँ तक उस नाटकीय परिस्थिति में भी जब येसु येरुसालेम में खो जाते हैं। ईश्वर का पुत्र हमारे लिए धीरे-धीरे अपने आश्चर्य को प्रकट करते हैं। येरुसालेम के मंदिर में संहिता के ज्ञानियों को भी येसु अपनी बुद्धिमता और उत्तरों से आश्चर्यचकित करते हैं। संत पापा ने कहा कि हमारे लिए यहाँ आश्चर्य क्या है, हम किस बात से अपने को आश्चर्यचकित पाते हैंॽ आश्चर्य और अचंभित होने के द्वारा हम उन आश्चर्यचकित करने वाली बातों को साधारण तरीके से नहीं लेते हैं। एक व्यक्ति जो उन आश्चर्यजनक चीजों को करता है अपने में यह नहीं जानता कि आश्चर्य क्या है। आश्चर्यचकित होना अपने को दूसरे के लिए खोलना है जो हमें दूसरों को समझने में मदद करता है। यह मनोभाव हमारे लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके द्वारा हम एक संबंध में प्रवेश करते और यह हमारे परिवार के घावों की चंगाई में सहायक होता है। जब हम अपने परिवारों में मुसीबतों को देखते हैं तो हम अपने को सही मानते हुए दूसरों के लिए अपने दरवाजे को बंद कर देते हैं। इसके विपरीत हमें चाहिए कि हम अपने से पूछे, “उस व्यक्ति में कौन-सी अच्छी चीज हैॽ और हमें उस अच्छाई पर आश्चर्य करने की जरूरत है।” यह हमारे परिवारों को संगठित रखने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि जब हमारे परिवारों में एक मुसीबत आ जाती है तो हमें अपने परिवार की अच्छी बातों को सोचते हुए उन पर आश्चर्य करने की आवश्यकता है। हमारा ऐसे करना हमारे परिवारों के घावों की चंगाई हेतु मदद करता है।

दुःख में येसु को खोजना

दुःखित होकर मरियम और योसेफ का बालक येसु को खोजना, सुसमाचार की वह दूसरी बात है जिसे हमें समझने की जरूरत है। यह दुःख येसु को पवित्र परिवार के क्रेन्द-बिन्दु पर रखता है।  मरियम और योसेफ ने येसु का स्वागत इस दुनिया में किया था, वे उनकी देख-रेख करते जहाँ वे अपनी उम्र के साथ ज्ञान और विवेक में बढ़ते जाते हैं इससे भी बढ़ कर वे उनके हृदयों में वृद्धि करते हैं। इस तरह धीरे-धीरे उनके हृदय में येसु के लिए प्रेम और समझ विकसित होता है। संत पापा ने कहा कि यही कारण है कि नाजरेत का परिवार अपने में पवित्र है क्योंकि मरियम और योसेफ अपने जीवन को येसु में क्रेन्दित करते हैं।

येसु को खोने का दुःख

उन्होंने तीन दिनों तक अपने जीवन में येसु को खोने का दर्द अनुभव किया, उसी तरह हमें भी अपने जीवन में येसु को खोने का दर्द होना चाहिए जब हम उनसे दूर चले जाते हैं। जब हम तीन दिनों तक येसु को भूल जाते, बिना प्रार्थना, सुसमाचार का अध्ययन किये बिना रहते, हम अपने जीवन में उनकी उपस्थिति की चिंता नहीं करते और उनके सांत्वनापूर्ण मित्रता से दूर रहते हैं, तो यह हमारे लिए दुःखायी लगे। बहुत बार तो ऐसा भी होता है कि हम कितने दिनों तक हम उनकी याद किये बिना रहते हैं जो अपने में बहुत खराब बात है। मरियम और योसेफ उन्हें खोते और वे येसु को मंदिर में शिक्षा देते हुए पाते हैं। हम भी अपने जीवन के मुक्तिदाता को मंदिर पिता के घर में पाते और उनके मुक्तिदायी संदेश को अपने जीवन में ग्रहण करते हैं। हम येसु को यूख्रारीस्तीय बलिदान में जीवित पाते हैं जो हमसे बातें करते, अपने वचनों को हमें देते, हमारा पथ प्रकाशित करते, अपने शरीर हमें देते जिसके द्वारा हम अपने जीवन में शक्ति का अनुभव करते औऱ प्रतिदिन के जीवन की कठिनाइयों का समाना करने में सक्षम होते हैं।

आश्चर्यजनक चीजें हमें विस्मित करती है

संत पापा ने कहा कि आज हमें सुसमाचार के दो शब्दों “आश्चर्य और दुःख” को लेकर अपने घर जायें। हम दूसरे के जीवन में आश्चर्यजनक चीजों को देख कर विस्मित होते हैं क्या वे हमें अपने परिवार की कठिनाइयों पर विजय होने में सहायता करते हैंॽ क्या येसु से दूर रहना हमारे लिए दुःखदायी होता हैॽ  

आज हम विश्व के सभी परिवारों के लिए प्रार्थना करें विशेषकर उनके लिए जो विभिन्न कारणों से  अपने में अमन और चैन की कमी का एहसास करते हैं। हम उन्हें नाजरेत के पवित्र परिवार की सुरक्षा में सुपुर्द करें।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने अपने सबों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

31 December 2018, 15:47