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संत पापा फ्रांसिस वैज्ञानिकों के संग संत पापा फ्रांसिस वैज्ञानिकों के संग 

विज्ञान करुणा का ज्ञान

संत पापा फ्रांसिस ने विज्ञान संबंधी परमधर्मपीठीय संस्थानों की आमसभा के प्रतिभागियों को अपना संदेश दिया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि विज्ञान की दुनिया नें अपनी स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता के कारण अतीत में आध्यात्मिक और धार्मिक मूल्यों पर अविश्वास प्रकट किया जो वर्तमान परिवेश में विश्व की जटिलता औऱ मानव संबंधी बातों को लेकर और भी सर्तक हो गया है। उन्होंने कहा कि यह विज्ञान और तकनीकी समाज को प्रभावित करती है लेकिन लोग भी अपने मूल्यों और मान्यताओं के कारण विज्ञान को प्रभावति करते हैं। वैज्ञानिक विकास और खोज का संबंध मानवीय स्वाभाव में व्याप्त इच्छाओं की प्राप्ति करना है। यद्यपि आज हमें मूलभूत मूल्यों पर ध्यान देने का जरुरत है जो समाज और विज्ञान के बीच संबंध को कायम रखता है। यह हमें पुन-विचार करने को प्रेरित करता है जिससे हम मानव की सम्पूर्ण भलाई का ध्यान रख सकें। विज्ञान के सदंर्भ में जो बातें मानवीय जीवन को प्रभावित करते हैं वे हमसे वार्ता और आत्म-निरिक्षण की मांग करती है जो अपने में अति महत्वपूर्ण है। आज सामाजिक विकास और वैज्ञानिक परिवर्तन में तीव्रता आई है। यह विज्ञान संबंधी परमधर्मपीठीय संस्थानों से इस बात की मांग करती है कि वे इस परिवर्तन के बीच कैसे सामजस्य स्थापित करें। वैज्ञानिक समुदाय समाज के अंग हैं अतः वे अलग और स्वतंत्र न समझा जाये बल्कि उनका बुलावा मानव परिवार के समग्र विकास हेतु हुआ है।

वैज्ञानिकों का उत्तदायित्व

संत पापा ने कहा कि इस प्रेरितिक कार्य का फल अपने में अंनत है। सर्वप्रथम हम पार्यवरण में एक वहृद परिवर्तन को पाते हैं जो प्रगति औऱ परमाणु भय को उत्पन्न करता है। इस संदर्भ में मैं अपने पूर्वावती अधिकारियों की तरह इस बात की महत्वपूर्ण पर बल देता हूँ कि हम परमाणु रहित विश्व के लिए समर्पित हों। संत पापा ने कहा कि मैं संत पापा पौल 6वें औऱ जोन पौल द्वितीय की तरह वैज्ञानिक से कहता हूँ कि आप अपने देश के नेताओं को इस हथियार से मानव के जीवन और पृथ्वी पर होने वाली अपूरणीय क्षति के बारे में विश्वास दिलायें। संत पापा ने कहा कि मैं संत पापा योहन पौलुस की द्वितीय की तरह ईश्वर का शुक्रिया अदा करते हूँ क्योंकि मेरे परमधर्मपीठीय काल के दौरान एक परमाणु युद्ध होते-होते बचा।

हमारा उत्तरदायित्व

वैश्विक परिवर्तन मानव के कार्यों को प्रभावित कर रहे हैं। अतः हमें अधिक उत्तदायी बनने की जरुरत है जिसेस हम पृथ्वी और मानव के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकें मानव के क्रियाकलापों से होता है। वैज्ञानिक समुदाय को इस समय विश्व के नेताओं और कम्पनियों को यह बतलाने की जरुरत है कि इसका समाधान कैसे निकालें और उसका अनुपालन कैसे किया जाये।

संत पापा ने कहा कि यह आप की बुलाहट है कि आप भौतिकी, नक्षत्र, जीवविज्ञान ,आनुवंशिकी और रसायन शास्त्र के क्षेत्रों में नये खोजों के माध्यम मानवता को अपनी सेवा दें।

मैं संस्थानों का स्वागत करता हूँ कि वे नये ज्ञान की खोज करें जिसे समकालीन समाज में साझा किया जा सके। लोग अपने समाज के निर्माण में सहभागी होने का चाह रखते हैं। वैश्विक मानव अधिकार सभों के जीवन में फलप्रद हो, विज्ञान इस संदर्भ में कठिनाइयों को दूर करते हुए निश्चित रुप से मदद कर सकता है। संत पापा ने विज्ञान परमधर्मपीठीय संस्थाओं के प्रति विभिन्न समस्य़ाओं देह व्यापार, बंधुवा मजदूरी, वैश्यवृति और मानव शरीर अंग तस्करी के समाधान हेतु दी गई सहायता के लिए कृतज्ञता अर्पित की।

संत पापा ने इस बात पर बल देते हुए कहा कि मावन के समग्र आतंरिक और स्थायी विकास हेतु हमें अब भी बहुत कुछ करना है। भूख और प्यास पर विजयी होना, उच्च नौतिकता और गरीबी विशेष कर आठ सौ मिलियन जरूरतमंद लोग और पृथ्वी से हमारा अलगाव अपने में हासिल नहीं किया जा सकता यदि हम अपने जीवन शैली में परिवर्तन न लायें। संत पापा ने वर्तमान परिवेश में विपत्तियों के निवारण हेतु राजनैतिक उदासीनता के प्रति अपनी चिंता जताई।  

उन्होंने कहा कि कलीसिया विज्ञान से यह आशा नहीं करती कि वह केवल नैतिक सिद्धांतों का अनुपालन करे जो मानव जाति की विरासत को सुरक्षित रखती है बल्कि वह यह चाहती है कि वह सकारात्मक रुप में मानवता की सेवा करे जो कि “करूणा का ज्ञान” कहलाती है। संत पापा ने वैज्ञानिकों से कहा कि आप को ज्ञान की चाभी दी गई है। मैं चाहता हूँ कि मानव समाज में लोगों की भलाई हेतु साझा करें। मानव समाज की ओर से मैं कहता हूँ कि आप की खोज सभों के लिए हित कर हो सकती है विशेषकर गरीबों और जरूरत में पड़े लोगों और पृथ्वी की भलाई के लिए।

12 November 2018, 16:52