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नेत्रहीनों से मुलाकात करते संत पापा नेत्रहीनों से मुलाकात करते संत पापा  (ANSA)

नेत्रहीनों द्वारा गरीबों की सहायता पर संत पापा की सराहना

संत पापा फ्राँसिस ने 17 नवम्बर को नेत्रहीनों के प्रेरितिक आंदोलन (एमएसी) के 400 सदस्यों से, आंदोलन की स्थापना की 90वीं वर्षगाँठ पर मुलाकात की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 17 नवम्बर 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार को इटली के नेत्रहीनों के प्रेरितिक आंदोलन को, प्रेम के सुसमाचार के मिशनरी शिष्य के रूप में उनके साक्ष्य के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने उन्हें प्रोत्साहन दिया कि वे बांटने एवं मित्रता के रास्ते पर आगे बढ़ें, खासकर, विश्व के गरीबों एवं परित्यक्त लोगों के साथ।   

इटली के नेत्रहीनों का प्रेरितिक आंदोलन नेत्रहीनों एवं नेत्र सहित दोनों तरह के लोगों को आपसी आदान-प्रदान एवं मानवीय प्रोत्साहन के लिए  एक-साथ लाता है। यह न केवल इटली में है किन्तु विभिन्न गरीब देशों में भी अनेक प्रेरिताई कार्यों द्वारा अपना योगदान देता है। 

नेत्रहीन एवं नेत्रसहित दोनों एक साथ

नेत्रहीनों एवं नेत्रसहित दोनों की गहरी एकता पर गौर करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने कहा, हमारे समाज को पेश करने का सबसे अच्छा जवाब, कभी-कभी, लोगों को विकलांग बना कर रख देता है, जिसका हथियार है प्रेम। प्रेम ऐसा न हो जो व्यक्ति को झूठा, मीठा तथा प्रभावित करने वाला बनाये बल्कि उसे सच्चा, ठोस और सम्मानजनक बनाये।

संत पापा ने कहा, व्यक्ति को उचित रूप से स्वागत करने, प्यार करने, समुदाय का हिस्सा मानने तथा भविष्य को दृढ़ता से देख पाने में साथ देने के द्वारा, हम जीवन के सच्चे रास्ते का विकास करते तथा स्थायी शांति का अनुभव करते हैं। 

संत पापा ने संतोष व्यक्त किया कि सुसमाचार के एक सच्चे मिशनरी के रूप में प्रेरितिक नेत्रहीन आंदोलन (एमएसी) के सदस्य विश्व के सबसे गरीब एवं पीड़ित लोगों के प्रति खुले हैं। विकलांग होने के कारण अपने आप में सिमट कर रह जाने के अपेक्षा वे साहस के साथ येसु के निमंत्रण (जब मैं भूखा था तुमने मुझे खिलाया, जब मैं नंगा था तुमने मुझे पहनाया, जब मैं बीमार था तुम मुझसे मिलने आये) का प्रत्युत्तर दे रहे हैं। 

संत पापा ने यह भी गौर किया कि एमएसी ने विश्व के गरीब देशों के साथ 50 वर्षों से सहयोग करते आ रहा है जहाँ नेत्रहीन लोगों की संख्या अधिक है तथा वे बहुत ही दयनीय स्थिति में जीते हैं। आंदोलन ने इन पाँच दशकों में अपने सैंकड़ों मिशनरियों एवं सहयोगियों द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा एवं समाज में एकीकरण में मदद दी है।

गरीबों के लिए गरीब कलीसिया

संत पापा ने एमएसी की विशिष्ठता की दो मुख्य चीजों पर प्रकाश डाला। पहला, नेत्रहीनों एवं नेत्रसहित लोगों के बीच आदान-प्रदान, कलीसियाई एवं सामाजिक समावेश की एकजुटता का फल है, और दूसरा, गरीबों को विभिन्न प्रकार से मदद करने का चुनाव पूरी कलीसिया के लिए उत्तम है। इस तरह हम गरीब कलीसिया को बढ़ने में मदद देते हैं। 

संत पापा ने उनके साक्ष्यों के लिए धन्यवाद देते हुए उन्हें प्रोत्साहन दिया कि वे अपनी यात्रा में एक बात के प्रति सचेत रहें कि मानवता का भविष्य, बांटने और मित्रता में है, खासकर, गरीबों एवं परित्यक्त लोगों के साथ।

 

17 November 2018, 17:35