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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

दया में पवित्रता कलीसिया और दुनिया को बदल देती है, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 1 अक्टूबर को चारिटी धर्मसमाज (रोसमिनियानी) की महासभा के प्रतिभागियों से रोसमिनियन करिश्मा की विशिष्टता के साथ, सुसमाचार की घोषणा करने हेतु प्रोत्साहित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार,1 अक्टूबर 2018(रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 1 अक्टूबर को वाटिकन के परमाध्यक्षों के सभागार में चारिटी धर्मसमाज (रोसमिनियानी) की महासभा के प्रतिभागियों से मुलाकात की।

संत पापा ने धर्मसमाज के जेनरल फादर वीतो नारदिन को परिचय भाषण के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इस मुलाकात से आप अपने संस्थापक धन्य अंतोनियो रोसमिनी की संत पापा और परमधर्मपीठ के प्रति आकर्षण और एकात्मकता की इच्छा को पूरा कर रहे हैं। वे बारंबार कहा करते थे, “पेत्रुस के आसन के प्रति निष्ठा अनेकता में एकता और कलीसियाई सहभागिता व्यक्त करती है, जो मिशन के लिए एक उपयोगी और अनिवार्य तत्व है।”

पवित्र और दयालु बनें

सभा की विषयवस्तु पर गौर करते हुए संत पापा ने कहा, “महासभा में आप "परिपूर्ण बनें ... दयालु बने रहें," विषय पर मनन चिंतन और विचार-वमर्श कर रहे हैं। प्रत्येक ख्रीस्तीय पवित्र जीवन जीने के लिए बुलाया गया है। दया के कार्यों को करते हुए हम प्रभु के सुसमाचार को दूसरों तक पहुँचाते हैं।  उत्तम तरह से सुसमाचार प्रचार का यह परिप्रेक्ष्य, आपके संस्थापक के शिक्षण का एक केंद्र बिंदु है, जिसे मैक्सिम की पुस्तक में विशेष तरीके से पाया जा सकता है। पवित्रता और गुणों का अभ्यास कुछ के लिए और किसी विशेष समय के लिए आरक्षित नहीं है, हर कोई इसे अपने दैनिक जीवन में इसका अभ्यास कर सकते हैं। विशेष रूप से, धार्मिक कार्यों के प्रति वफादार बने रहने का व्रत लेने वालों को इसका गंभीरता से पालन करना चाहिए। इस अर्थ में, धन्य रोस्मिनी प्रार्थना करते थे : "हे ईश्वर, हमें आपके नायकों को भेजें।" संत पापा ने धन्य रोस्मिनी की प्रार्थना पर गौर करते हुए कहा, “मैंने जीवन के वीरता पर हाल ही में मोतु प्रोप्रियो ‘मेजरम हाक डिलेक्शनम’ में जोर दिया, यानी जीवन की वीरता दूसरो के लिए मृत्यु तक अपने जीवन की आहूति देना है।” (संख्या 5)। पवित्रता ही सही मायने में कलीसिया में सुधार लाने का मार्ग है जिसे धन्य रोस्मिनी ने स्पष्ट रूप से देखा। उन्होंने खुद को सुधारते हुए दुनिया को बदलने की कोशिश की थी।  

दया का धर्मसंघ

संत पापा ने कहा, "आपके संस्थापक अपने धर्मसमाज को दया के गुण की सर्वोच्चता को उजागर करने के लिए विशेष रूप से ‘दया धर्मसंघ’ नाम दिया, जैसा कि प्रेरित कहते हैं, "सब से ऊपर" रखा जाना चाहिए (कलो. 3:14)। और रोस्मिनी ने "मौन" रहते हुए "आंतरिक दृढ़ता" के साथ दया के कार्यों को किया। उसका उदाहरण आपको आंतरिक मौन की तीव्रता और बाहरी मौन की वीरता में प्रगति करने के लिए प्रेरित करता है। यह वह मार्ग है जो अच्छे और पवित्रता के फल पैदा करता है, संतों ने इस मार्ग की यात्रा की है। लोयोला के संत इग्नासियुस से आपके संस्थापक ने "पवित्र उदासीनता" को बनाए रखने के महत्वपूर्ण तथ्य को लिया इसके बिना एक सच्चे सार्वभौमिक दया को लागू करना संभव नहीं है।"

संत पापा ने उन्हें कलीसियाई गतिविधियों में शारीरिक, बौद्धिक, आध्यात्मिक और दया के कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए पवित्र आत्मा को शामिल करने के लिए आमंत्रित किया जिससे कि पवित्र आत्मा उन्हें कहां, कब और कैसे प्यार किया जाए, इसे इंगित करता रहे। संत पापा ने कहा कि धर्मशिक्षा वह विज्ञान है जो ईश्वर के वचन से शुरू होती है, जिसका पूर्णता येसु मसीह है, शब्द ने शरीर धारण किया। उन्होंने भारत, तंजानिया, केन्या और संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में उनके प्रेरितिक कार्यों की सराहना की।  

अंत में संत पापा ने उन्हें माता मरियम के संरक्षण में रखते हुए रोसमिनियन करिश्मा की विशिष्टता के साथ, सुसमाचार की घोषणा करने हेतु प्रोत्साहित किया।

01 October 2018, 16:38