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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

महिमा की खोज करने वालों के लिए सेवा एक अच्छी दवाई

वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 21 अक्टूबर को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

आज का सुसमाचार पाठ (मार. 10,35-45) फिर एक बार येसु के बारे बतलाता है जो बड़े धीरज के साथ, दुनियावी मनोभाव से शिष्यों के मन को ईश्वर की ओर प्रेरित करते हुए, उन्हें सुधारने की कोशिश करते हैं। यह अवसर उन्हें दो भाइयों, याकूब और योहन द्वारा मिला था, जिनसे येसु ने सबसे पहले मुलाकात की थी तथा उन्हें अपना अनुसरण करने के लिए बुलाया था। उन्होंने येसु के साथ एक लम्बी यात्रा तय कर ली थी और वे अब बारह शिष्यों के दल के सदस्य भी थे। अतः जब वे येरूसालेम की यात्रा पर थे जहाँ शिष्य बड़ी उत्सुकता के साथ आशा कर रहे थे कि पास्का महोत्सव के अवसर पर, येसु ईश्वर के राज्य की स्थापना करेंगे, तब दो शिष्य साहस करके येसु के करीब आये और प्रभु के सामने अपनी अर्जी रखी, "अपने राज्य की महिमा में हम दोनों को अपने साथ बैठने दीजिए, एक को दायें और एक को बायें।" (पद.37)

याकूब और योहन की मांग

येसु जानते थे कि याकूब और योहन उनके तथा स्वर्ग राज्य के लिए बहुत अधिक उत्साहित थे किन्तु वे यह भी जानते थे कि उनकी आशा एवं उत्साह दुनियावी मनोभाव से प्रदूषित थी। इसलिए उन्होंने कहा, "तुम नहीं जानते कि क्या मांग रहे हो" (पद. 38) और जब वे "महिमा के सिंहासन" में ख्रीस्त राजा के अगल-बगल बैठने की बात कर रहे थे तब उन्होंने प्याले को पीने की बात की, एक बपतिस्मा लेने की, अर्थात् उनके दुःखभोग एवं मृत्यु में सहभागी होने की। याकूब और योहन ने सौभाग्यपूर्ण आशा की उम्मीद करते हुए जल्दबाजी में कहा कि "हम ऐसा कर सकते हैं" किन्तु यहाँ भी वे पूरी तरह सचेत नहीं थे कि क्या बोल रहे हैं।

प्रेम का अर्थ सेवा के लिए स्वार्थ एवं अहम का त्याग

तब येसु ने कहा, "मेरा प्याला तो तुम पीयेंगे और बपतिस्मा भी ग्रहण करेंगे, अर्थात् दूसरे शिष्यों की तरह समय आने पर वे भी उनके क्रूस में सहभागी जरूर होंगे, पर वे अंत में कहते हैं "किन्तु तुम्हें मेरे बायें और दायें बैठने देने का अधिकार मेरा नहीं है, वे स्थान उन लोगों के लिए हैं जिनके लिए वे तैयार किये गये हैं। (पद.40) येसु कहना चाहते हैं कि अभी तुम मेरा अनुसरण करो तथा उस प्रेम के रास्ते पर चलना सीखो जो त्याग की मांग करता है और बाकी चीजों की चिंता स्वयं पिता ईश्वर करेंगे। संत पापा ने कहा कि प्रेम का रास्ता हमेशा त्याग का रास्ता है क्योंकि प्रेम का अर्थ है दूसरों की सेवा के लिए स्वार्थ एवं अहम का त्याग करना।

अधिकारी होने का अर्थ सेवक बनना

येसु ने महसूस किया कि अन्य दस प्रेरित याकूब और योहन पर क्रूद्ध थे, जो उनकी ही तरह दुनियावी मनोभाव रखते थे। तब उन्होंने उन्हें एक शिक्षा दी जो युग के ख्रीस्तीयों के लिए है। "तुम जानते हो कि जो संसार के अधिपति माने जाते हैं वे अपनी प्रजा पर निरंकुश शासन करते हैं और सत्ताधारी लोगों पर अधिकार जताते हैं। तुम लोगों में ऐसी बात नहीं होगी। जो तुम लोगों में बड़ा होना चाहता है वह तुम्हारा सेवक बने।" (पद.42-44) संत पापा ने कहा कि यह ख्रीस्तीय जीवन का नियम है। प्रभु की शिक्षा स्पष्ट है संसार के अधिपति कहे जाने वाले अपनी सत्ता के लिए गद्दी की खोज करते हैं जबकि ईश्वर ने एक उलटे तरह की गद्दी, क्रूस को चुना, जिसपर वे प्राण देकर शासन करते हैं। येसु कहते हैं कि मानव पुत्र सेवा कराने नहीं बल्कि सेवा करने आये।"

प्रथम स्थान खोजने की बीमारी

सेवा का रास्ता, प्रथम स्थान (बड़ाई) खोजने की बीमारी के रोकथाम के लिए एक प्रभावशाली औषधि है। प्रथम स्थान खोजने की बीमारी मानव समाज पर दुष्प्रभाव डालती है। यह ख्रीस्तियों को भी नहीं छोड़ती और यहाँ तक कि कलीसियाई अधिकारियों को भी नहीं। इस तरह कलीसिया में, ख्रीस्त की शिष्य के रूप में हम सुसमाचार को मन-परिवर्तन के बुलावे के रूप में स्वीकार करने, कलीसिया का साक्ष्य साहस एवं उदारता पूर्वक देने के लिए बुलाये गये हैं जिससे कि सबसे कमजोर लोगों के चरणों पर झुककर हम उन्हें प्रेम एवं सादगी के साथ सेवा कर सकें।

माता मरियम दीनता की आदर्श

संत पापा ने विश्वासियों का ध्यान माता मरियम की ओर प्रेरित करते हुए कहा, "धन्य कुँवारी मरियम जिन्होंने पूर्णता एवं दीनता से ईश्वर की इच्छा का पालन किया, हमें सहायता दे कि हम आनन्द पूर्वक सेवा के रास्ते पर चल सकें, उस रास्ते पर जो हमें स्वर्ग की ओर ले चलता है।"

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

22 October 2018, 17:01