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संत पेत्रुस महागिरजाघर जिसके प्रांगण में संत घोषणा समारोह में भाग ले रहे लोग संत पेत्रुस महागिरजाघर जिसके प्रांगण में संत घोषणा समारोह में भाग ले रहे लोग   (ANSA)

संत घोषणा की धर्मविधि एवं संत पापा का प्रवचन

वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 14 अक्टूबर को, संत पापा फ्राँसिस ने सात नये संतों की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने हजारों विश्वासियों के साथ समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा ने प्रवचन की शुरूआत इब्रानियों के पत्र से लिए गये पाठ से किया। उन्होंने कहा, "दूसरा पाठ हमें बतलाता है कि ईश्वर का वचन जीवन्त, सशक्त और किसी भी दूधारी तलवार से तेज है।" (इब्रा. 4:12) उन्होंने कहा कि यह सचमुच ईश्वर का वचन है न कि कोई सत्य वचन अथवा कोई आध्यात्मिक मार्गदर्शन। यह जीवित वचन है जो हमारे जीवन को स्पर्श करता एवं उसे बदल देता है। ये येसु ईश्वर के जीवित वचन हैं जो हमारे हृदय में बोलते हैं।

धनी युवक और उसकी चाह

संत मारकुस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा, "सुसमाचार पाठ, हमें विशेष रूप से निमंत्रण देता है कि हम प्रभु से मुलाकात करें। यह हमारे लिए एक युवक का उदाहरण प्रस्तुत करता है जो उनके पास आया।"  (मार. 10:17) संत पापा ने कहा कि हम अपने आप को उस व्यक्ति के रूप में देख सकते हैं जिसका नाम पाठ में जिक्र नहीं किया गया है इससे लगता है वह हम प्रत्येक का प्रतिनिधित्व करता है। वह येसु से पूछता है, "भले गुरू अनन्त जीवन पाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?" (पद. 17) वह अनन्त जीवन की खोज कर रहा था। संत पापा ने कहा कि हम में से कितने लोग हैं जो अनन्त जीवन प्राप्त करना नहीं चाहेंगे? हम यहाँ गौर कर सकते हैं कि वह उसे अपनी धरोहर बनाना चाहता था। अपने प्रयासों द्वारा उसे हासिल करना चाहता था। वास्तव में, उसने इस धरोहर को प्राप्त करने के लिए युवास्था से ही आज्ञाओं का पालन किया था और अब वह दूसरों का अनुसरण करने के लिए तैयार था, अतः उसने पूछा, "अनन्त जीवन प्राप्त करने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?"

येसु ने उसे ध्यान पूर्वक देखा और उसके हृदय में प्रेम उमड़ आया। (पद. 21) येसु ने पुरस्कार पाने के लिए आज्ञा पालन के दृष्टिकोण को स्वतंत्र एवं पूर्ण प्रेम में बदल दिया। युवक मांग और पूर्ति के आधार पर बातें कर रहा था किन्तु येसु ने उससे प्रेम की कहानी का प्रस्ताव रखा। सहिंता के पालन को आत्म बलिदान में परिवर्तित करने की सलाह दी। खुद के लिए जीने के बदले ईश्वर के साथ रहने की सलाह दी। येसु ने युवक को परामर्श दिया कि वह अपनी सम्पति बेचकर उसे गरीबों के बीच बांट दे और उनका अनुसरण करे।  

येसु का निमंत्रण

संत पापा ने कहा, "आपको भी येसु बुलाते हैं, आओ और मेरा अनुसरण करो। स्थिर खड़े मत रहो क्योंकि येसु के साथ रहने के लिए बुराई से बचना काफी नहीं है। जब आप चाहते हैं तब केवल येसु का अनुसरण न करें बल्कि हर दिन उनकी खोज करें। आज्ञाओं का पालन करके, थोड़ा दान देकर एवं थोड़ी प्रार्थना कर संतुष्ट न हो जाएँ किन्तु उनकी खोज करें जो आपको प्यार करते हैं। ईश्वर जो येसु के रूप में प्रकट हुए उनमें अपने जीवन का अर्थ खोजें, क्योंकि वहीं हमें शक्ति प्रदान करते हैं।

ईश्वर हमसे पूर्ण हृदय की मांग करते  

येसु ने युवक से कहा, "जाओ, अपना सबकुछ बेचकर गरीबों को दे दो।" संत पापा ने कहा कि येसु ने गरीबी एवं धन के सिद्धांत पर चर्चा नहीं की किन्तु सीधे जीवन को महत्व दिया। उन्होंने उसे वह सब कुछ छोड़ने के लिए कहा जो उसके हृदय पर भार डाल रहा था, उसके हृदय को खाली करने के लिए ताकि ईश्वर के लिए जगह बनाया जा सके। हम तब तक येसु का अनुसरण नहीं कर सकते हैं जब तक कि हमारा हृदय चीजों के भार से दबा हो क्योंकि यदि हमारा हृदय चीजों से भरा होगा, तब वहाँ प्रभु के लिए कोई स्थान नहीं होगा। यही कारण है कि धन खतरनाक है और येसु कहते हैं कि यह हमारी मुक्ति प्राप्ति को कठिन बना देता है। इसलिए नहीं कि ईश्वर कठोर हैं बल्कि समस्या हमारी है। हम बहुत अधिक पाना चाहते हैं, बहुत अधिक पाने की चाह हमें हृदय का दम घुटाता है जिसके कारण हम प्रेम करने के योग्य नहीं रह जाते हैं।

संत पौलुस की सलाह

संत पौलुस लिखते हैं, "धन का लालच सभी बुराइयों की जड़ है।" (1 तिम. 6:10) हम इसे महसूस करते हैं जब धन केंद्र-बिन्दु बन जाता तथा व्यक्ति में ईश्वर के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता।

येसु सच्चे हैं। वे पूर्ण रूप से देते तथा पूरा मांगते हैं। वे हमें पूर्ण रूप से प्रेम करते हैं तथा हम प्रत्येक से हमारा हृदय मांगते हैं। जीवित रोटी के रूप में आज वे हमसे मांग रहे हैं, क्या हम बदलें में उन्हें एक छोटा टुकड़ा दे दें? जिन्होंने हमारे लिए सेवक बनकर, क्रूस उठाया, क्या हम उन्हें उसका बदला कुछ ही आज्ञाओं का पालन करके नहीं चुका सकते हैं। जिन्होंने हमें अनन्त जीवन प्रदान किया है क्या हम उन्हें कुछ समय देकर, संतुष्ट नहीं हो सकते हैं। येसु प्रेम का कुछ प्रतिशत नहीं चाहते। हम उन्हें 20 अथवा, 30 या 60 प्रतिशत प्रेम नहीं कर सकते। हम या तो उनके प्रेम कर सकते हैं अथवा उनसे प्रेम नहीं कर सकते हैं।

चुनने की आवश्यकता

संत पापा ने सभी विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, कि हमारा हृदय एक चुम्बक के समान है। यह अपने आप प्रेम की ओर खिंच जाता है किन्तु केवल एक से ही जुड़ पाता है, अतः हमें चुनने की आवश्यकता है कि क्या हम ईश्वर के प्रेम में संयुक्त होना अथवा दुनियावी खजाने पर आसक्त होना चाहते हैं। (मती. 6:24); हम अपने आप से पूछें कि हम ईश्वर के साथ प्रेम की कहानी में कहाँ हैं? क्या हम कुछ आज्ञाओं का पालन कर संतुष्ट हैं अथवा क्या हम येसु का अनुसरण अपने प्रेमी के रूप में करते हैं, उनके खातिर क्या हम अपना सब कुछ छोड़ सकते हैं? आज येसु हम प्रत्येक से पूछ रहे हैं, क्या हम एक ऐसी कलीसिया हैं जो आज्ञाओं की शिक्षा देती है अथवा ऐसी कलीसिया जो दुल्हन है जो प्रभु के प्रेम हेतु अपने को समर्पित करती है? क्या हम उनका अनुसरण कर रहे हैं अथवा क्या हम सुसमाचार के धनी युवक की तरह दुनिया की राहों पर लौटना चाहते हैं? क्या हमारे लिए येसु सब कुछ हैं अथवा हम दुनिया की सुरक्षा की खोज करते हैं।

प्रभु से प्रार्थना

आइये, हम कृपा मांगें कि हम प्रभु के प्रेम के लिए सब कुछ पीछे छोड़ सकें, धन, सत्ता एवं वे सारी चीजें जो सुसमाचार प्रचार के लिए उपयुक्त नहीं हैं जो हमारी प्रेरिताई को भारी बना देती हैं। वे धागे जो हमें दुनिया से बांध देते हैं। प्रेम में बढ़े बिना हमारा जीवन और हमारी कलीसिया आत्म-संतुष्टि एवं आत्म भोग की बीमारी से ग्रसित हो जाती है। हम क्षणिक चीजों में आनन्द की प्राप्ति चाहते हैं। हम बेकार के गपशप में समय व्यतीत करते हैं, नीरस ख्रीस्तीय जीवन में ठहर जाते हैं, जहाँ अहंकार अधूरी रह जाने की हमारी उदासी को ढ़क लेता है।

उदासी अधूरे प्रेम का प्रमाण

उस युवक के लिए ऐसा ही था जिसके बारे सुसमाचार बतलाता है कि वह उदास होकर चला गया।” (पद. 22) उसका हृदय नियमों और अपनी बहुत सारी सम्पतियों से बंधा हुआ था, फिर भी, उसने येसु से मुलाकात की और उनकी प्रेमी दृष्टि प्राप्त की। संत पापा ने कहा कि युवक उदास होकर चला गया। उदासी अधूरे प्रेम का प्रमाण है, ठंढे हृदय का चिन्ह। दूसरी ओर एक ऐसा हृदय जो सम्पति के बोझ से दबा हुआ नहीं है। वह मुक्त रूप से येसु से प्रेम करता है तथा हमेशा आनन्द बिखेरता है। उस आनन्द को पाने के लिए आज बहुत कुछ करने की आवश्यकता नहीं है। संत पापा पौल षष्ठम ने लिखा है, "निश्चय ही अपनी परेशानियों के बीच हमारे भाई-बहनों को आनन्द को जानने की आश्यकता है, उसके संगीत को सुनने की।" आज येसु हमें आनन्द के स्रोत की ओर लौटने का निमंत्रण देते हैं। जिसको हम उनके साथ मुलाकात करने के द्वारा प्राप्त कर सकते हैं, सारी चीजों को छोड़कर उनका अनुसरण करने की जोखिम उठाने के द्वारा। उनके रास्ते का आलिंगन करने के लिए कुछ त्यागने की संतुष्टि प्राप्त करने के द्वारा। संतों ने इसी रास्ते को अपनाया।

संतों का जीवन

संत पापा पौल षष्ठम् ने प्रेरित संत पौलुस के पदचिन्हों पर चलकर, उनके समान अपना जीवन ख्रीस्त के सुसमाचार प्रचार हेतु व्यतीत किया। नयी सीमाओं को पार किया। एक नबी की तरह वे कलीसिया से बाहर निकले। भटके हुए लोगों की खोज और गरीबों की सहायता की। थकान एवं गलतफहमी के बीच संत पापा पौल छाटवें ने पूर्णता से ख्रीस्त का अनुसरण करने के आनन्द एवं सुन्दरता को प्रस्तुत किया। आज वे हमारा आह्वान कर रहे हैं कि हम पवित्रता की अपनी बुलाहट को जीयें। आधा नहीं किन्तु पूर्णरूप से। यह अनोखा है कि आज संत पापा पौल षष्ठम एवं अन्य नये संतों जिनमें महाधर्माध्यक्ष ऑस्कर ने दुनिया की सुरक्षा को त्याग दिया, यहाँ तक कि सुसमाचार के लिए जीवन अर्पित करने हेतु खुद की सुरक्षा का ख्याल भी नहीं किया। नयी सीमाओं को पार किया। एक नबी की तरह वे कलीसिया से बाहर निकले। भटके हुए लोगों की खोज और गरीबों की सहायता की। थकान एवं गलतफहमी के बीच संत पापा पौल छःवें ने पूर्णता से ख्रीस्त का अनुसरण करने के आनंद एवं सुन्दरता को प्रस्तुत किया। आज वे हमारा आहृवान कर रहें हैं कि हम पवित्रता की बुलाहट को जीयें, आधा नहीं बल्कि पूर्णरूप से। यह अनोखा है कि आज संत पापा पौल षष्ठम एवं अन्य नये संतों जिनमें महाधर्माध्य ऑस्कर ने दुनिया की सुरक्षा को त्याग दिया। वे गरीबों एवं अपने लोगों के करीब रहे। उनका हृदय प्रभु और अपने भाई बहनों से जुड़ा था। संत फ्रंचेस्को स्पीनेली, संत भिन्चेंसो रोमानो, मरिया कतेरिया कास्पर, नाजारिया इग्नासिया तथा अब्रूत्सो के हमारे युवा संत नूनत्सियो सुलप्रित्सयो के साथ भी यही बात थी। इन सभी संतों ने अलग-अलग पृष्ठभूमि पर आज के सुसमाचार पाठ को जीया। उनका हृदय कभी ठंढा नहीं पड़ा, न ही हिसाब किया किन्तु प्रेम के कारण हर चीज का जोखिम उठाया तथा सब कुछ पीछे छोड़ दिया। प्रभु हमें उनके उदाहरणों पर चलने में मदद करे।

15 October 2018, 16:31