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आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा   (ANSA)

मानव का अपमान हत्या के बराबर

बुधावरीय आमदर्शन में संत पापा फ्रांसिस ने संहिता की पांचवीं आज्ञा के गूढ़ रहस्य का मर्म समझाया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 17 अक्टूबर 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को ईश्वर की दस आज्ञाओं पर अपनी धर्मशिक्षा माला को आगे बढ़ते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

आज की धर्मशिक्षा में मैं संहिता की पांचवीं आज्ञा “हत्या मत करो” पर अपनी चर्चा जारी रखूंगा। हमने पहले ही इस आज्ञा पर चिंता करते हुए इस बात को रेखाकिंत किया है कि ईश्वर की नजरों में मनुष्य कितना मूल्यवान, पवित्र और अलंघनीय है। हम न तो किसी दूसरे के जीवन से और न ही अपने जीवन से घृणा कर सकते हैं। वास्तव में मानव अपने में ईश्वर के प्रतिरुप को वहन करता है जो उसे अनंत प्रेम के योग्य बनाता है, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में अपना जीवन यापन क्यों न कर रहा हो।

पाँचवीं आज्ञा का गूढ़ अर्थ

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार में हमने सुना कि येसु संहिता की इस आज्ञा के गूढ़ अर्थ को हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। ईश्वर के न्यायासन के सम्मुख वह व्यक्ति भी हत्यारे के समान है जो अपने भाई से क्रोध करता है। संत योहन इसे अपने पत्र में लिखे हैं, “जो अपने भाई से घृणा करता है वह हत्यारे के समान है।(1 यो.3.15) इतना ही नहीं येसु इसकी व्याख्या करते हुए आगे कहते हैं जो अपने भाई का अपमान करता और उससे घृणा करता है वह भी हत्यारे के समान है। हम अपने जीवन में एक दूसरे का अपमान करने के आदी हैं,जो सत्य है। संत पापा ने कहा, “यह हमारे लिए सांस लेने के समान है”। येसु हमें कहते हैं, “हमें इसपर विराम लाने की जरुरत है क्योंकि यह मानव को घायल करता और उसे मार डालता है”। “मैं इन लोगों से घृणा करता हूँ”। यह किसी व्यक्ति के सम्मान की हत्या करना है। उन्होंने कहा,“यह हमारे लिए अच्छा होगा यदि हम येसु ख्रीस्त की शिक्षा को अपने मन, हृदय में प्रवेश करने दें, जिसके फलस्वरुप हम कह सकेंगे, “मैं किसी का कभी अपमान नहीं करूँगा, क्योंकि येसु हमें कहते हैं यदि तुम किसी से घृणा किसी का अपमान और तिरस्कार करते तो यह उनकी हत्या करने के समान है।”

भाई से मेल-मिलाप

येसु हमें कहते हैं कि जब तुम बलिदान चढ़ा रहे होते और वहाँ तुम्हें इस बात की याद आती है कि तुम्हारे भाई को तुमसे किसी बात की शिकायत है तो वेदी पर अपने दानों को छोड़कर पहले अपने भाई से मेल कर लो और तब आकर अपनी भेंट चढ़ाओं। संत पापा ने कहा कि हमें भी उनके प्रति मेल-मिलाप के मनोभाव अपनाने की जरूर है जिनसे हमें कोई शिकायत है। “हम अपने में किसी का अपमान, तिरस्कार, घृणा करने के महत्व पर चिंतन करें, येसु ऐसा करने को, हत्या करने की श्रेणी में रखते हैं”।  

मानव का जीवन अति महत्वपूर्ण

संहिता की पांचवीं आज्ञा का विस्तार करते हुए येसु हमें क्या कहना चाहते हैंॽ मनुष्य का जीवन अपने में कीमती, अति संवेदनशील है, वह अदृश्य रुप में एक अति महत्वपूर्ण प्रतिरुप को वहन करता जो उसके भौतिक रुप से भी बढ़कर है। वास्तव में किसी निर्दोष बच्चे को हानि पहुँचाने के लिए मानव का एक छोटा शब्द ही प्रार्याप्त है। किसी नारी के प्रति हमारी उदासीनता उसे हानि पहुँचाने के लिए काफी है। किसी युवक के विश्वास को तोड़ना उसके हृदय को चोट पहुँचाने हेतु काफी है। किसी व्यक्ति को मार डालने हेतु उसकी ओर ध्यान न देना ही प्रार्याप्त है। प्रेम नहीं करना हत्या करने का प्रथम कदम है और हत्या न करना प्रेम की प्रथम सीढ़ी है।

हमारे जीवन का मार्ग

धर्मग्रंथ बाईबल के प्रारांभ में हम पढ़ते हैं कि हत्यारे काईन के मुख से अपने भाई के लिए कितनी घिनौनी बात निकली। ईश्वर ने काईन से पूछा कि तुम्हार भाई कहाँ है, “मैं नहीं जानता, क्या मैं अपने भाई का रखवाला हूँ।”(नि.4.9) उसी तरह हत्यारे कहते हैं, “मुझे इसकी कोई परवाह नहीं, वे तुम्हारे हैं।” संत पापा ने कहा कि आइए हम इस सवाल का जवाब दें, “क्या हम अपने भाइयों के रखवाले हैंॽ” जी हाँ, हम सभी हैं। हममें से प्रत्येक एक दूसरे के रखवाले हैं। यही हमारे जीवन का मार्ग है।”

प्रेम क्षमा करता है

मानव जीवन को प्रेम की आवश्यकता है। हमारे लिए सच्चा प्रेम क्या हैॽ येसु ख्रीस्त उस सच्चे प्रेम को हमारे लिए व्यक्त करते हैं, जो कि करुणा है। प्रेम जिसके बिना हम कुछ नहीं कर सकते, वह क्षमा देना में व्यक्त होता है। यह उनका स्वागत करता है जिन्होंने हमें हानि पहुँचाया है। इस क्षमा के बिना हममें से कोई भी जीवित नहीं रह सकता है। संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि यदि हत्या करने का अर्थ जीवन का विनाश करना, किसी को दबाना, किसी को खत्म कर देना है तो हत्या नहीं करना दूसरों की चिंता करना, उन्हें महत्व देना है। यह हमारे द्वारा दूसरों को क्षमा करना है।

अच्छा होना, अच्छे कार्य की मांग

हम यह कहते हुए अपने को धोखा नहीं दे सकते हैं, “मैं अच्छा हूँ क्योंकि में किसी की बुराई नहीं करता हूँ।”  संत पापा ने कहा कि ये पेड़-पौधे, पत्थर जिन्हें हम देखते हैं किसी की बुराई नहीं करते हैं वे अपने में बने हैं लेकिन मनुष्य के साथ ऐसा नहीं है। एक स्त्री या एक पुरूष अपने में ऐसे नहीं रह सकते हैं। एक मानव के रुप में हमसे एक अच्छी चीज की मांग की जाती है। “हत्या मत करो”, यह एक अपील है जो हमसे प्रेम और करूणा की मांग करता है। यह येसु के समान हमें अपने जीवन को जीने का आहृवान करता है जिन्होंने हमारे लिए अपने को दे दिया। संत पापा ने तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को इस बात की याद दिलाते हुए कहा, “हमने इसी प्रांगण में एक बार अपने लिए इस बात को कहा था, किसी को हानि न पहुँचाना अच्छा है। लेकिन अच्छाई न करना अपने में बुराई है। हमें सदैव भलाई करने की जरुरत है, अपने आप से बाहर जाने की मांग है।”

ईश वाणी की पुकार

येसु जो मानव बन कर इस धरती पर आये उन्होंने हमारे जीवन को पवित्र किया है। उन्होंने अपने लोहू से हमें कीमती बनाया है। वे हमारे जीवन के दाता हैं, जिसके लिए हम पिता ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। हम येसु ख्रीस्त में जिनका प्रेम हमारे लिए मौत से भी अधिक शक्तिशाली है, पवित्र आत्मा की कृपा से जिसे पिता हमें प्रदान करते हैं हम ईश वाणी को स्वीकार करें, “हत्या मत करो।” यह हमारे लिए ईश्वर की ओर से आने वाला एक अति महत्वपूर्ण अपील है जो हमें एक दूसरों के प्रेम करने का आहृवान करता है।

17 October 2018, 15:43