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संत पापा धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा धर्माध्यक्षों के साथ  (AFP or licensors)

मिशन क्षेत्रों से आये धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा की मुलाकात

धर्माध्यक्ष, पुरोहित और चरवाहे येसु ख्रीस्त का प्रतिरुप होता है। धर्माध्यक्ष एक भला चरवाहा है जो अपने लिए नहीं अपितु अपने लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित करता है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 8 सितम्बर 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 8 सितम्बर को वाटिकन के संत क्लेमेंटीन सभागार में 34 देशों से आये 74 धर्माध्यक्षों से मुलाकात की, जो लोकधर्मियों के लिए सुसमाचार प्रचार हेतु गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ द्वारा आयोजित सेमिनार में भाग लेने हेतु रोम आये हुए हैं।

संत पापा ने सभी धर्माध्यक्षों का सहृदय स्वागत करते हुए परिचय भाषण के लिए कार्डिनल फिलोनी को धन्यवाद दिया। संत पापा ने अपने संदेश की शुरुआत अपनी पहचान की जांच करने हेतु एक प्रश्न से की, “धर्माध्यक्ष कौन है?” धर्माध्यक्ष, पुरोहित और चरवाहे येसु ख्रीस्त का प्रतिरुप होता है। धर्माध्यक्ष एक भला चरवाहा है जो अपने लिए नहीं अपितु अपने लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित करता है। विशेषकर कमजोर, खोई और भटकी हुई भेड़ों की खोज करता (मारकुस 6,34) और पुन­: उन्हें अपनी चरागाह में ले आता है।

धर्माध्यक्ष-प्रार्थना के व्यक्ति

संत पापा ने धर्माध्यक्षों के तीन महत्वपूर्ण गुणों पर जोर देते हुए कहा कि धर्माध्यक्ष एक प्रार्थना करने वाला, उद्घोषणा करने वाला और मिलनसार व्यक्ति है। धर्माध्यक्ष प्रेरितों का उत्तराधिकारी है जिन्हें येसु ने अपने साथ रहने के लिए बुलाया है।(मरकुस 3,14) धर्माध्यक्ष पवित्र संदूक के सामने अपने आप को सौंपता है। उसके लिए प्रार्थना व्यक्तिगत भक्ति ही नहीं अपितु एक आवश्यकता है। प्रार्थना में वह प्रतिदिन अपने लोगों और दैनिक परिस्थितियों को प्रभु के सामने लाने हेतु प्रतिबद्ध है। चरवाहे के रुप में मूसा की तरह अपने हाथों को उपर उठाता और अपने लोगों के लिए प्रार्थना करता है। (निर्गमन,17,8-13) अपने लोगों के साथ प्रार्थना में संयुक्त रहकर उनके दैनिक क्रूस को ढोने में सहायक बनता है।

 धर्माध्यक्ष-सुसमाचार उद्घोषक

संत पापा ने कहा कि धर्माध्यक्ष प्रेरितों का उत्तराधिकारी है जिन्हें येसु ने सुसमाचार की घोषणा करने की आज्ञा दी थी, (मारकुस 16:15) अतः धर्माध्यक्ष अपने कार्यालय में बैठा प्रशासनिक कार्यों में ही अपना पूरा समय नहीं बिताता, परंतु येसु के समान रास्ता तय करते हुए अपने लोगों की खोज में निकलता है। वह गरीबी और निराशा में पड़े लोगों के पास जाता और उन्हें प्रभु की सांत्वना का संदेश देता और उनकी पीड़ा में सहभागी होता है। जो खुद की प्रतिष्ठा और आरामदायक जिन्दगी चाहता है वह सुसमाचार का सच्चा प्रेरित नहीं हो सकता।

धर्माध्यक्ष-येसु का प्रतिरुप

संत पापा ने कहा, “कलीसिया के सामने आप येसु के प्रतिरुप हैं। आप अपने उदाहरण द्वारा कलीसिया को सुसमाचार घोषणा के लिए प्रेरित करें।” एक धर्माध्यक्ष सर्वगुण संपन्न नहीं हो सकता परंतु प्रभु उन्हें अपने धर्मप्रांत को एकता के सूत्र में बांधने की कृपा देते हैं। धर्माध्यक्ष अपने नाम और मान-सम्मान के लिए या समाचार पत्रों में अपना नाम आने के लिए कार्य नहीं करता। वह अपने धर्मप्रांत में अपने विश्वासियों के साथ मिलकर रहता और कलीसिया के हित के लिए कार्य करता है।(1पेत्रुस 5,3)

याजकवाद से बचें

संत पापा फ्राँसिस ने उन्हें याजकवाद से बचने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि कलीसिया में अपने अधिकार और शक्ति का गलत प्रयोग के कारण ही यौन शोषण जैसी समस्यायें सामने आयी हैं। संत पापा ने उन्हें परिवारों, धर्मप्रांतीय सेमिनरियों, धर्मप्रांत के युवाओं, गरीबों और बीमारों पर विशेष ध्यान देने और उनकी देखभाल करने को कहा। अपना पूरा समय और शक्ति इनकी देखभाल में लगाये। इनकी सेवा में अपना हाथ गंदा करने से न हिचकें। प्रभु की शांति का प्रचारक बनें। अंत में संत पापा ने उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया और अपने लिए प्रार्थना की मांग करते हुए उनसे विदा ली।

विदित हो कि रोम में नये धर्माध्यक्षों के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया है जो 3 से 15 सितम्बर तक चलेगा। विश्व के चार महादेशों से कुल 74 धर्माध्यक्ष, विश्व के 34 देशों से, सेमिनार में भाग ले रहे हैं, जिनमें 17 अफ्रीका, 8 एशिया, 6 ओशिनिया तथा 3 लातीनी अमरीका के हैं। सेमिनार रोम के संत पौल परमधर्मपीठीय कॉलेज में चल रहा है।

08 September 2018, 15:53