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कौऊनास में विश्वासगण धर्मविधि के दौरान कौऊनास में विश्वासगण धर्मविधि के दौरान   (ANSA)

कौऊनास में देवदूत प्रार्थना

संत पापा फ्रांसिस ने कौनास के संताकोस पार्क में मिस्सा बलिदान की समाप्ति उपरांत देवदूत प्रार्थना के पूर्व विश्वासियों को एक परीक्षा से बचे रहने का आहृवान किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

संत पापा  फ्रांसिस ने अपने संदेश में विश्वासियों से कहा कि प्रज्ञा ग्रंथ से लिया गया आज का पहला पाठ धर्मी व्यक्ति को प्रताड़ित किये जाने की बात कहता है। विधर्मी वे लोग हैं जो गरीबों और विधवाओं को सताते तथा अपने से बड़े जनों का आदर नहीं करते हैं। वे “शक्ति को न्याय का आधार” मानते हैं। वे कमजोरो पर दबाव डालते और अपनी शक्ति के द्वारा अपनी सोच-विचार को दूसरों पर थोपते हैं। वे हिंसा के द्वारा ईमानदार, सत्याभाषी, कठिन मेहनत करने वालों का दमन करते हुए एक अलग तरह की व्यवस्था स्थापित करने की कोशिश करते हैं। वे अपने जीवन के बुरे कार्यों द्वारा सदैव अच्छाई का नाश करना चाहते हैं।

75 साल पहले इस देश को विनाश के एक इसी दौर से हो कर गुजरना पड़ा था जब हजारों की संख्या में यहूदी मारे गये थे। यहूदी लोगों को अपमान और क्रूर सजा झेलनी पड़ी जैसा की धर्मग्रंथ का प्रज्ञा ग्रंथ हमें बतलाता है। हम उन बीते समय की याद करते हुआ अपने आत्मपरिक्षण हेतु ईश्वर से निवेदन करें जिससे हम उन समय के हानिकारक मनोभावनाओं से अपने को पृथक रख सकें।

परीक्षा से बचें

सुसमाचार में येसु हमें एक परीक्षा से सचेत कराते हैं, जहाँ हम अपने में सबसे बड़ा और दूसरों पर रोब जमाने की अभिलाषा रखते हैं, यह लालसा हर मानव के हृदय में निवास कर सकती है। ऐसी भावनाओं और विचारों की उत्पति पर येसु हमें क्या सुझाव देते हैंॽ वे हमें सबसे छोटा और सबका सेवक बनने को कहते हैं, उन स्थानों पर जाने को कहते जहाँ कोई जाना नहीं चाहता, उनकी सेवा करने को कहते जो समाज के द्वारा छोड़ दिये गये हैं, जो हाशिए में पड़े हुए हैं।

संत पापा ने कहा कि यदि हम सुसमाचार के अनुसार येसु के वचनों को मानव जीवन की गहराई में उतरने दें तो हम “वैश्वकिक एकात्मकता” को साकार होता हुआ पायेंगे। “आज के परिवेश में विशेष रुप से कुछ देशों में कई तरह के युद्ध और लड़ाई पुनः उत्पन्न हो रही है, यद्पति हम ख्रीस्तीय अपने मनोभावों में दूसरों का आदर करने, दूसरे के घावों में महलम पट्टी लगाने, सेतु का निर्माण करने, अपने संबंधों को मजबूत बनाते हुए “एक दूसरे के भार को अपने में वहन करते हैं।” (गला.6.2, एभंजेली गौदियुम 67)

क्रूसों का पहाड़

लिथुवानिया में क्रूसों का पहाड़ है जहाँ हजारों लोगों ने सदियों से अपने क्रूस के चिन्ह को गाड़ा है। संत पापा ने कहा कि जब हम देवदूत प्रार्थना करने वाले हैं हम माता मरियम से सहायता हेतु प्रार्थना करें जिससे हम अपने जीवन की सेवा और दूसरों की आवश्यकता की पूर्ति करने हेतु हमारी निष्ठा भरे कार्यो के क्रूस को उस पहाड़ में आरोपित कर सकें जहां गरीब निवास करते हैं, जहाँ समाज से बहिष्कृत और नाबालिकों के प्रति हमें चिंता और उनकी देख-रेख करने की जरुरत है। ऐसा करते के द्वारा हम अपने जीवन में दूसरों को नाशा करने की अपने संभावनाओं और संस्कृति को दूर कर पायेंगे, जो हमारे जीवन में परेशानी या असुविधाजनक होते हैं।

येसु ने एक छोटे बच्चे को चेलों के बीच उपस्थिति किया यह हमें चुनौती प्रदान करें। हम माता मरियम के “हाँ” की भी याद करें और उनसे निवेदन करें कि हम इस “हाँ” को उदारतापूर्ण ढ़ग से उनकी तरह फलहित बना सकें। 

23 September 2018, 13:32