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आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा   (ANSA)

प्रेम में सच्ची स्वतंत्रता

बुधवारीय आम दर्शन के दौरान संत पापा फ्रांसिस ने संहिता के तीसरे निमय पर धर्मशिक्षा देते हुए मानव की सच्ची स्वतंत्रता के बारे में कहा।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 12 सितम्बर 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को ईश्वर की दस आज्ञाओं पर अपनी धर्मशिक्षा माला को आगे बढ़ते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

आज की धर्मशिक्षा में हम तीसरी आज्ञा के बार में चर्चा करेंगे जो हमें पुनः विश्राम दिवस की याद दिलाती है। ईश्वर की दस आज्ञाएं जो निर्गमन ग्रंथ में घोषित की गई हैं उन्हें हम विधि-विवरण ग्रंथ में दुहराया हुआ पाते हैं सिवाय इस तीसरे वाक्य के जहां हम एक विशेष अन्तर को पाते हैं। निर्गमन ग्रंथ में विश्राम का अर्थ सृष्टि के लिए ईश्वर का धन्यवाद अदा करना है तो वहीं विधि-विवरण ग्रंथ में यह गुलामी के अंत की यादगारी है। इस दिन दास भी अपने स्वामी की आराम करता है जो हमें पास्का के मुक्ति की याद दिलाती है।

हमारी गुलामी  

संत पापा ने कहा कि परिभाषा के अनुसार वास्तव में गुलाम आराम नहीं कर सकता है। लेकिन गुलामी के कई रुप हैं जो वाह्य और आंतरिक दोनों तरह के हो सकते हैं। प्रताड़ना वाह्य अवरोध के रुप में होती है जहाँ हम जीवन को हिंसा और विभिन्न तरह के अन्याय से घिरा हुआ पाते हैं। दूसरी ओर हम आंतरिक गुलामी को पाते हैं जैसे कि मनोवैज्ञानिक अवरोध, जटिलताएं, चरित्र की सीमाएं तथा अन्य बातें। क्या इन परिस्थितियों में कोई आराम हैॽ क्या कोई व्यक्ति गुलामी और हिंसा की स्थिति में स्वतंत्र हैॽ क्या कोई व्यक्ति अपने जीवन की आंतरिक समस्याओं से घिरे होते हुए अपने में स्वतंत्र हो सकता हैॽ

संत पापा ने कहा कि वास्तव में कुछ लोग हैं जो कैदखाने में रहते हुए भी अपने को मानसिक रुप से स्वतंत्र अनुभव करते हैं। हम संत मैक्सिमिलन कोल्बे या कार्डिनल वान ताऊन का उदाहारण ले सकते हैं जिन्होंने अंधकार में स्थानों को ज्योर्तिमय बना दिया। बहुत से लोगो हैं जो आंतरिक रुप से अपने में दुर्बलता का एहसास करते हैं लेकिन वे करुणामय आराम को जानते हैं जो उन्हें उसे दूसरों तक प्रसारित करने में मददगार होता है।

मानव की सच्ची स्वतंत्रता

उन्होंने ने विश्वासियों और तीर्थयात्रियो से पूछा, “सच्ची स्वतंत्रता क्या हैॽ” “क्या यह हमारे चुनाव करने की संभावना में निहित हैॽ” निश्चित ही यह हमारी स्वतंत्रता का एक अंग है जिसे हम अपनी ओर से हर संभंव प्रत्येक नर और नारी के लिए प्रतिभूत करते हैं। (cf. CONC, ECUM VAT, II, Pastoral Constitution Gaudium et Spes, 73).  लेकिन क्या इस बात का ज्ञान मात्रा हमें न तो सच्चे रूप में स्वतंत्रता और न ही हमें सच्ची खुशी प्रदान करती है। सच्ची स्वतंत्रता हमारे लिए इससे भी बढ़कर है।

वास्तव में यह “अहम” की गुलामी है जो हमें अपने जीवन में कैदखाने और अन्य डरवानी कठिनाइयों से भी अधिक मजबूती से जकड़ लेती है। अहम हमारे लिए सतावट का कारण बन सकती है, हम जहाँ कहीं भी रहें यह हमें सताती और हमें सबसे अधिक प्रताड़ना प्रदान करती है। इसे हम “पाप” की संज्ञा देते हैं जो कि संहिता के नियमों को तोड़ना मात्र नहीं वरन अपने जीवन में असफल होने के साथ गुलामों जैसा जीवन जीना है।

मानव बुराइयों का गुलाम

हमारे जीवन में लोभ, वासना, क्रोध, ईर्ष्या, सुस्तीपन और घमंड जैसी बुराइयों के हम सभी गुलाम हैं जो हमें भयभीत और प्रताड़ित करते हैं। यदि हम अपने जीवन को विलासिता में व्यतीत करते तो इसके द्वारा हम लोभ और वासना को कोई आराम नहीं देते हैं। हमारे जीवन में धन प्राप्ति की चिंता हमारी कंजूसी को नष्ट करती है। क्रोध की आग और ईर्ष्या की गर्मी हमारे व्यक्तिगत संबंधों को नष्ट कर देती है, हमारा सुस्तीपन जिसके कारण हम मेहनत नहीं करते तो जीवन हमारा असंभव बन जाता है, हमारा घमंड और हमारा आत्म-केन्द्रित होना हमारे और दूसरों के बीच एक गहरी खाई उत्पन्न करती है। संत पापा ने कहा, “कौन इसलिए सच्ची अर्थ में गुलाम हैॽ” वह कौन है जो आराम करना नहीं जानताॽ यदि ऐसा है तो हम अपने जीवन में प्रेम करना नहीं जानते हैं।  

सच्चा प्रेम सच्ची स्वतंत्रता

तीसरी आज्ञा हमें अपनी स्वतंत्रता में आराम करने हेतु निमंत्रण देती है। हम ख्रीस्तियों के लिए येसु ख्रीस्त यह कहते हैं कि जो पाप की अपनी आतंरिक गुलामी से मुक्त होता है वही प्रेम करने के योग्य बनता है। सच्चा प्रेम सच्ची स्वतंत्रता है जो धन-संपति से विमुख होता, संबंध स्थापित करता, अपने में यह जानता कि कैसे दूसरों का स्वागत करते हुए उन्हें साम्मान देना चाहिए। वह अपने सभी अवसरों को खुशी के उपहार में तब्दील करते हुए समुदाय की स्थापना करता है। प्रेम हमें कैदखाने में भी स्वतंत्रता में बने रहने हेतु मदद करता है यद्यपि हम अपने को दुर्बल और सीमित पाते हैं।

ख्रीस्त में हमारी स्वतंत्रता

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि यह स्वतंत्रता हम अपने मुक्तिदाता येसु ख्रीस्त से प्राप्त करते हैं जो अपने प्रेम में हमें मुक्ति देने के फलस्वरुप हमारे हृदयों को गुलामी से मुक्त करते हैं। वे हमें क्रूस काठ पर ठोंके जाने पर भी प्रेम करते रहे, वे हमसे भय को दूर करते और सच्ची स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। हममें से प्रत्येक जन उनमें करुणामय आराम और सत्य को प्राप्त करते हैं जो हमें स्वतंत्र बनाता है।

इतना कहने के बाद उन्होंने सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय के साथ हे पिता हमारे प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया। 

12 September 2018, 15:48