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सारायेवो में 2015 में संत पापा की यात्रा, वहाँ के राष्ट्रपति से मुलाकात सारायेवो में 2015 में संत पापा की यात्रा, वहाँ के राष्ट्रपति से मुलाकात  

भाईचारा के सेतु का निर्माण करें, नैतिक ईशशास्त्रियों से संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने सारायेवो में 26-27 जुलाई को आयोजित सम्मेलन के प्रतिभागियाओं को संदेश भेजा। सम्मेलन की विषयवस्तु थी, "सेतु निर्माण हेतु गंभीर समय, आज काथलिक ईशशास्त्रीय नैतिकता।"

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 28 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸  संत पापा फ्राँसिस ने काथलिकों को प्रोत्साहन दिया है कि वे ईशशास्त्रीय नैतिकता में वार्ता एवं नेटवर्किंग के द्वारा उत्साही बनें ताकि विभाजन की दीवारों को हटाया जा सके तथा विश्व के हर क्षेत्र में भाईचारा के सेतु का निर्माण किया जा सके।

संत पापा ने यह प्रोत्साहन, सारायेवो, बोस्निया और हेरजेगोविना में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन को प्रेषित संदेश में दिया। सम्मेलन में कुल 80 देशों के करीब 500 काथलिक नैतिक ईशशास्त्रियों ने भाग लिया, जिसका आयोजन विश्व कलीसिया नेटवर्क में काथलिक ईशशास्त्रीय नीति द्वारा किया गया था।

सारायेवो की याद कर संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि आज के तनावपूर्ण एवं विभाजन के परिवेश में, जहाँ डर और पीछे लौटने की स्थिति है, शहरों को चाहिए कि वे लोगों, संस्कृतियों, धार्मिक, जीवन दर्शन एवं राजनीतिक झुकाव के बीच सामीप्य हेतु नये रास्तों का निर्माण करें।  

पर्यावरणीय चुनौतियाँ

संत पापा ने संदेश में इस बात पर प्रकाश डाला है कि पर्यावरण चुनौतियों के कुछ पहलू न केवल मनुष्यों और प्रकृति के बीच संबंधों के संदर्भ में, बल्कि पीढ़ियों और लोगों के बीच संबंधों के मामले में गंभीर असंतुलन पैदा कर सकते हैं। इसके ठोस उदाहरण हैं शरणार्थी एवं आप्रवासी की समस्या।  

संत पापा ने कहा कि इस पृष्ठभूमि पर, व्यक्तियों और संस्थानों को चाहिए कि वे एक नवीकृत नेतृत्व अपनायें ताकि विश्व के सभी लोगों को एक आम भाग्य के हकदार होने एवं एक अधिक न्यायपूर्ण रास्ता अपनाने में मदद मिल सके।

व्यक्तियों का नेटवर्क

संत पापा ने सम्मेलन के प्रतिभागियों के सामने प्रस्ताव रखा कि वे विभिन्न महादेशों के लोगों के बीच नेटवर्क स्थापित करें जिसके द्वारा ईशशास्त्रीय नीति पर चिंतन किया जा सके, जो उन्हें नये एवं प्रभावशाली संसाधनों की खोज करने में मदद करेगा। यह खोज उन्हें दुःखद मानवीय परिस्थितियों के प्रति दयालु और चौकस रहने में मदद करेगा तथा उन्हें करुणामय भावना से उनका साथ देने हेतु प्रेरित करेगा।

संत पापा ने कहा किन्तु इसके लिए सभी ईशशास्त्रियों को चाहिए कि वे खुद अपने बीच सेतु का निर्माण करें ताकि वे एक-दूसरे को अपने विचार साझा कर सकें एवं एक दूसरे के साथ करीबी में बढ़ सकें।

28 July 2018, 14:33