खोज

Vatican News
संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस 

ईश्वर महामारी के शिकार लोगों का स्वागत करे, संत पापा

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में मंगलवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने उन सभी लोगों की याद की जो कोविड-19 के कारण मौत के शिकार हो गये। उपदेश में उन्होंने उन मनोभावों पर प्रकाश डाला जो हमें येसु की भेड़ होने से रोकता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 5 मई 2020 (रेई)- 5 मई को ख्रीस्तयाग आरम्भ करते हुए संत पापा ने कोरोना वायरस महामारी के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा, "आज हम उन मृतकों के लिए प्रार्थना करते हैं जो महामारी के कारण मृत्यु के शिकार हो गये। अपने प्रियजनों के स्नेह से रहित, वे अकेले मर गये। उनमें से कई की दफन क्रिया भी नहीं हो पायी। प्रभु उन्हें अपने महिमा में प्रवेश पाने दे।" 

विश्वास के लिए रूकावटें

अपने उपदेश में संत पापा ने आज के सुसमाचार पाठ (यो. 10:22-30) पर चिंतन किया, जिसमें यहूदी येसु से स्पष्ट शब्दों में जानना चाहते हैं कि क्या वे मसीह हैं? येसु उन्हें उत्तर देते हैं कि उन्होंने उन्हें बता दिया है फिर भी वे विश्वास नहीं करते।  

संत पापा ने कहा कि यह पाठ हमें अपने विश्वास पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है। क्या मैं विश्वास करता हूँ? मुझे द्वार, जो स्वंय येसु हैं उनसे होकर प्रवेश करने में क्या बाधक है? संत पापा ने कई पूर्वाग्रही मनोभाव बतलाये जो हमें येसु का ज्ञान प्राप्त करने से रोकते हैं।

धन का गुलाम

संत पापा ने कहा कि मुख्य बाधा है धन। हम में से कई ने प्रभु के द्वार में प्रवेश किया, किन्तु उसमें आगे नहीं बढ़ पाये क्योंकि हम धन के गुलाम हैं। उन्होंने धन को बहुत बड़ी बाधा कहा जो हमें आगे जाने से रोकती है। तब क्या हमें गरीब हो जाना है? संत पापा ने कहा कि "हमें गरीबी में गिरना नहीं है बल्कि धन का गुलाम नहीं बनना है जो इस दुनिया का स्वामी है क्योंकि हम दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकते हैं।"

कठोरता के कारण स्वतंत्रता खोना

संत पापा ने कहा कि हृदय की कठोरता विश्वास के लिए दूसरी बाधा है। "येसु सहिंता के पंडितों को नियमों की व्याख्या करने में उनकी कठोरता के लिए फटकारते हैं, जो सच्ची निष्ठा नहीं है। निष्ठा ईश्वर का वरदान है, जबकि कठोरता स्वयं की सुरक्षा मात्र।"

संत पापा ने याद किया कि एक बार एक महिला उनसे सलाह लेने आयी। वह एक शनिवार को दूसरी बेला एक शादी में गई थी और उसने सोचा कि उस मिस्सा के द्वारा रविवार का मिस्सा पूरा किया (चूँकि शनिवार शाम को रविवार का मिस्सा किया जाता है)। किन्तु बाद में उसे मालूम हुआ कि मिस्सा का पाठ रविवार का नहीं था। तब उसे लगा कि उसने आत्मामारू पाप किया है क्योंकि उसने रविवार के मिस्सा पूजा में भाग नहीं लिया था।  

संत पापा ने कहा कि इस तरह की कठोरता हमें "प्रभु की प्रज्ञा एवं सुन्दरता से दूर कर देती है और हमारी आजादी छीन लेती है।"

उदासीनता में फंसा, याजकवाद

संत पापा ने कहा कि उदासीनता, याजकवाद और दुनियावी भावना ये तीन मनोभाव हैं जो हमें ईश्वर का ज्ञान प्राप्त करने से रोक देते हैं।

उदासीनता एक प्रकार की थकान है जो प्रभु की ओर बढ़ने की चाह को छीन लेती है तथा हमें गुनगुना बना देती है।

याजकवाद, येसु का स्थान लेना चाहता है। प्रभु को मार्गदर्शन करने देने के बदले, याजकवाद, विश्वास के द्वार में प्रवेश करने पर रोक लगाता है।

संत पापा ने कहा कि "यह एक गंभीर बीमारी है जो हमारे विश्वास की स्वतंत्रता को छीन लेती और येसु की ओर बढ़ने से रोक देती है।"

दुनियादारी में फंसा

दुनियावी मनोभाव का शिकार होना हमें विश्वास के द्वार पर रोक देती है। हम सोच सकते हैं कि कई पल्लियों में किस तरह से संस्कारों का अनुष्ठान किया जाता है, जहाँ कई बार येसु की कृपा एवं उनकी उपस्थिति को समझ पाना भी मुश्किल है।

संत पापा ने कहा कि ये सभी चीजें, हमें येसु के झुंड के सदस्य होने से रोक देती हैं। हम, धन, उदासीनता, कठोरता, दुनियादारी, याजकवाद और विचारधारा की भेड़ें बनकर रह जाते हैं। इनमें स्वतंत्रता की कमी है और स्वतंत्रता के बिना हम येसु का अनुसरण नहीं कर सकते। कई बार स्वतंत्रता हमसे दूर चली जाती है और हम फिसलकर गिर जाते हैं। जी हाँ, यह सच है कि हम गिरते हैं किन्तु हम स्वतंत्र होने से पहले ही गिर जाते हैं।

येसु के ज्ञान में बढ़ने के लिए स्वतंत्रता

अपने उपदेश के अंत मे संत पापा ने सभी विश्वासियों को निमंत्रण दिया कि हम अपने आप पर गौर करें कि क्या हम इन प्रलोभनों से मुक्त हैं जिससे कि हम प्रभु के ज्ञान में बढ़ सकें?

उन्होंने प्रार्थना की कि प्रभु हमें आलोकित करे ताकि हम अपने आपको देख पायें कि हम मुक्त हैं अथवा नहीं। वह आजादी, जिसके द्वारा हम द्वार (येसु) से प्रवेश कर सकें जिससे कि हम उनके झुंड में, उनकी भेड़ें बन सकें।

संत पापा का ख्रीस्तयाग 5 मई 2020
05 May 2020, 10:11
सभी को पढ़ें >