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संत पापा फ्राँसिस ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए 

सरकारी अधिकारियों हेतु प्रार्थना, संत पापा

वाटिकन के संत मर्था प्रार्थनालय में शनिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने सरकारी अधिकारियों के लिए प्रार्थना की तथा चिंतन किया कि संकट के समय को किस तरह जीया जाए।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 2 मई 2020 (रेई)- संत पापा ने 2 मई को मिस्सा के दौरान सरकारी अधिकारियों, राष्ट्रों के शीर्ष नेताओं, विधायक, महापौर एवं मुख्यों के लिए प्रार्थना की। उन्होंने प्रार्थना की कि प्रभु उन्हें सहायता एवं शक्ति प्रदान करे क्योंकि उनके कार्य आसान नहीं हैं। जब उनके बीच विभाजन हो, संकट के इस समय में वे समझ सकें कि उन्हें अपने लोगों की भलाई के लिए एकजुट होना है क्योंकि एकता हर विभाजन से बढ़कर है।

उपदेश में उन्होंने आज के पाठों पर चिंतन किया तथा वर्तमान स्थिति पर गौर किया जिसमें कलीसिया और सभी लोग, संकट की घड़ी और अपने जीवन में शांति की स्थिति से गुजर रहे हैं। पहले पाठ (9:31-42) में कहा गया है कि आरम्भिक कलीसिया में शांति थी। सुसमाचार पाठ (6:31-42) में संत योहन संकट की घड़ी को प्रस्तुत करते हैं जब कई शिष्यों ने येसु से दूर चले जाने का निश्चय किया।

कलीसिया में शांति थी

पहले पाठ पर चिंतन करते हुए संत पाप फ्राँसिस ने कहा, "कलीसिया में शांति थी। उसका विकास होता जा रहा था और वह प्रभु पर श्रद्धा रखती हुई, पवित्र आत्मा की सांत्वना द्वारा बल प्राप्त करती हुई बराबर बढ़ती जाती थी।" इस वर्णन से पता चलता है कि कलीसिया उस समय शांत थी और सांत्वना महसूस कर रही थी।

संकट को टाला नहीं जा सकता

संत पापा ने कहा कि जीवन में सिर्फ शांति के अवसर नहीं हैं बल्कि संकट के काल भी हैं। आज सुसमचार पाठ येसु के उन शिष्यों को प्रस्तुत करता है जिनके लिए येसु की शिक्षा अत्यन्त कठिन लगी। येसु ने कहा था कि जो मेरा मांस खायेगा एवं जो मेरे रक्त पीयेगा, वह अनन्त जीवन प्राप्त करेगा।

निर्णय का समय

संत पापा ने कहा कि कठिन समय जब हमें निर्णय करने पड़ते हैं वैसे ही बारह शिष्यों को निर्णय करना था कि क्या वे भी येसु से अलग होकर, चले जाना चाहते हैं। तब पेत्रुस तुरन्त जवाब देता है, "प्रभु, हम किसके पास जाएँ आप ही के शब्दों में अनन्त जीवन का संदेश है। हम विश्वास करते और जानते हैं कि आप ईश्वर के भेजे हुए परमपावन पुरूष हैं।" संत पापा ने कहा कि "पेत्रुस येसु के शब्दों को नहीं समझता है किन्तु प्रभु पर भरोसा रखता है।"

संकट में किस तरह जीना

संत पापा ने अर्जेनटीना के एक कहावत का हवाला देते हुए संकट के समय में विश्वास को किस तरह जीना है इसकी व्याख्या की। उन्होंने कहा, "जब आप घोड़े पर जा रहे हों और आपको नदी पार करनी हो, तो नदी की मझधार में घोड़े को न बदलें।" जिन्होंने येसु को छोड़ देने का निर्णय लिया उन्होंने मझधार में घोड़े को बदल दिया। जबकि संकट के समय में चाहिए कि हम शांत रहें, अपनी आस्था में स्थिर बने रहें। यह बदलने की घड़ी नहीं है, बल्कि विश्वस्त बने रहने की घड़ी है। यही वह घड़ी है जब ईश्वर विश्वस्त रहते हैं। संकट की घड़ी मन परिवर्तन की घड़ी है जिसमें हमें विश्वस्त बनें रहना है। बेहतर हेतु परिवर्तन के लिए प्रेरित होना है किन्तु अपने आपको अच्छाई से दूर नहीं कर देना है।    

शांति और संकट में सामंजस्य करना

संत पापा ने कहा कि हम ख्रीस्तियों को शांति और संकट दोनों ही क्षणों में सामंजस्य करना है। विश्वास में संकट की घड़ी को आध्यात्मिक लेखकों ने इस प्रकार वर्णन किया है कि यह आग पर चलने के समान है ताकि मजबूत हो सकें।  

संत पापा ने प्रार्थना की कि प्रभु हमारे लिए पवित्र आत्मा भेज दे, जिससे कि हम जान सकें कि संकट के समय में प्रलोभन से किस तरह बचना है... हम जान सकें कि किस तरह आशा के साथ निष्ठावान बने रहना है जिससे हम शांति के समय तक पहुँच सकें। प्रभु हमें संकट की घड़ी में शक्ति प्रदान करे ताकि हम अपने विश्वास को न त्याग दें।

संत पापा का ख्रीस्तयाग 2 मई 2020

 

02 May 2020, 10:29
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