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संत मर्था प्रार्थनालय संत मर्था प्रार्थनालय  

संत पापा ने नर्सों के साहस की सराहना की

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में मंगलवार को संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए नर्सों के लिए प्रार्थना करने का निमंत्रण दिया। अपने उपदेश में उन्होंने ईश्वर प्रदत्त शांति एवं दुनिया से मिलने वाली शांति के बीच अंतर स्पष्ट किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 12 मई 2020 (रेई)- 12 मई को ख्रीस्तयाग के आरम्भ में संत पापा ने कहा, "आज नर्सों का दिवस है। कल मैंने एक संदेश भेजा। आज हम नर्सों के लिए प्रार्थना करें, पुरूष, महिला, युवक, युवती जिन्होंने इस पेशा को अपनाया है यह पेशा से बढ़कर एक बुलाहट है एक समर्पण है। ईश्वर उन्हें आशीष प्रदान करे। महामारी के इस समय में उन्होंने साहसी होने का आदर्श प्रस्तुत किया है और कई लोगों ने जीवन ही अर्पित कर दिया है। हम नर्सों के लिए प्रार्थना करें।" 

दुनिया की शांति एवं ख्रीस्त की शांति

उपदेश में संत पापा ने संत योहन रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु अपने चेलों से कहते हैं, "मैं तुम्हारे लिए शांति छोड़ जाता हूँ अपनी शांति तुम्हें प्रदान करता हूँ। वह संसार की शांति जैसी नहीं है।" (यो. 14:27)

संत पापा ने कहा, "विदा होने से पहले प्रभु ने अपने शिष्यों से भेंट की और उन्हें शांति का वरदान दिया।" संत पापा ने कहा कि यह शांति दुनिया की शांति नहीं है जो युद्ध नहीं होने से आती है जिसको हम सभी चाहते हैं। बल्कि हृदय की शांति, आत्मा की शांति है जो हम सभी के अंदर है।

सुसमाचार में येसु कहते हैं कि जो शांति वे प्रदान करते हैं वह दुनिया की शांति जैसी नहीं है। इस दुनिया की शांति एक ऐसी शांति है जिसे चीज वस्तुओं द्वारा प्राप्त की जाती है जो ऊपरी खुशी प्रदान करती है। यह शांति व्यक्ति की सम्पति के समान है जो दूसरों से अलग सिर्फ अपने लिए होता, जिसको सिर्फ वह अपने लिए रखता है। संत पापा ने कहा कि बिना महसूस कराये ही यह शांति हमें निंद्रा की स्थिरता में अचेत कर देती है जहाँ हम अपने आप में बंद होकर रह जायेंगे। यह एक स्वार्थपूर्ण शांति है।  

संत पापा ने कहा कि यह एक दामी शांति है क्योंकि जो लोग इसकी खोज करते हैं वे एक के बाद एक, नई-नई चीजों में इसे खोजते हैं। यह कीमती है क्योंकि यह अस्थायी एवं बंजर है।

शांति जो स्वर्ग की ओर देखती है

संत पापा ने कहा, "जो शांति येसु प्रदान करते हैं वह इससे बहुत अलग है। वह शांति आपको सक्रिय बनाती। आपको अलग नहीं करती और दूसरों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करती है, समुदाय का निर्माण एवं सम्पर्क कराती है। दुनिया की शांति की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है जबकि येसु द्वारा प्रदत्त शांति बिलकुल मुफ्त है, प्रभु की ओर से एक उपहार है।"  

संत पापा ने सुसमाचार के धनी व्यक्ति का उदाहरण दिया जिसका भंडार अनाजों से भरा था जिसने सोचा कि वह अब आराम से रह सकता है और उसने दूसरा भंडार बनाना चाहा किन्तु ईश्वर ने उससे कहा, "मूर्ख, इसी रात तुम्हारे प्राँण तुमसे ले लिये जायेंगे और तुमने जो धन इकट्ठा किया है वह अब किसका होगा? (लूक 12:20)”

दुनियावी शांति भविष्य के लिए स्वर्ग का द्वार नहीं खोलती बल्कि यह सिर्फ अपनी चिंता करती है। दूसरी ओर जो शांति येसु प्रदान करते हैं वह प्रभु पर ध्यान केंद्रित करती। यह शांति केवल आज के लिए नहीं है बल्कि भविष्य के लिए है। यह स्वर्गीय परिणामों के साथ, स्वर्ग में जीने की शुरूआत है। दुनियावी शांति हमें नशीली पदार्थ के समान निंद्रा की शांति प्रदान करती है किन्तु इसके लिए हमें निरंतर दूसरे खुराक की आवश्यकता होती है। दुनियावी शांति सीमित है क्योंकि यह हमेशा अस्थायी है किन्तु जो शांति येसु प्रदान करते हैं वह निश्चय ही फलप्रद और प्रभावकारी होती है।

उपदेश के अंत में संत पापा ने प्रार्थना की कि प्रभु हमें वह शांति प्रदान करे जो आशा प्रदान करती, समुदाय का निर्माण करती और स्वर्ग की स्थायी शांति की ओर देखती है।  

संत पापा का ख्रीस्तयाग 12 मई 2020
12 May 2020, 09:52
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