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ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्राँसिस ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्राँसिस  

महामारी से मुक्ति हेतु हम भाई बहनों की तरह प्रार्थना करें, पोप

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में 14 मई को, ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने विश्व प्रार्थना दिवस की याद की तथा स्मरण दिलाया कि हम सभी भाई-बहन हैं। प्रवचन में उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के अलावा और भी महामारियाँ हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 14 मई 2020 (रेई)- बृहस्पतिवार को ख्रीस्तयाग आरम्भ करते हुए संत पापा ने प्रार्थना, उपवास एवं भलाई के कार्य करने का प्रोत्साहन देते हुए कहा, "मानव बंधुत्व के लिए उच्च समिति ने आज प्रार्थना और उपवास दिवस घोषित किया है कि हम महामारी के इस संकटपूर्ण समय में प्रभु से दया एवं करुणा की याचना करें। हम सभी भाई-बहन हैं। संत फ्राँसिस असीसी कहा करते थे, "सभी भाई-बहनें", और इसलिए सभी धर्मों के पुरूष और स्त्री आज प्रार्थना एवं प्रायश्चित में एक साथ आयें तथा इस महामारी से चंगाई की कृपा की याचना करें।"

महामारी के सामने भय का आतंक

अपने उपदेश में संत पापा ने नबी जोना के उदाहरण पर चिंतन किया। उन्होंने कहा, "निन्हवे शहर किसी महामारी के चपेट में आ गया था। शायद वह एक नैतिक महामारी थी और उसका विनाश होनेवाला था। ईश्वर ने जोना को वहां प्रार्थना, प्रायश्चित और उपवास का उपदेश देने भेजा।" संत पापा ने कहा कि जोना शुरू में डर गया इसलिए अपने मिशन से भाग गया। ईश्वर ने उसे फिर बुलाया, तब नबी उपदेश देने निन्हवे गया।

संत पापा ने कहा कि सभी धर्मों एवं परम्परा के लोग महामारी से मुक्ति हेतु प्रार्थना एवं उपवास करने के लिए बुलाये गये हैं जैसा कि निन्हवे के लोगों ने जोना का उपदेश सुनकर किया। मानव बंधुत्व के लिए उच्च समिति ने इस एक दिवसीय प्रार्थना का आह्वान किया है।

स्वार्थी सुरक्षा से बाहर निकलना

संत पापा ने कहा, "हम में से किसी ने कोरोना वायरस महामारी की उम्मीद नहीं की थी। अब यह हमारे ऊपर है और बहुत सारे लोग मर रहे हैं, कई लोग अकेले ही मौत के शिकार हो रहे हैं।"

संत पापा ने उन लोगों को चेतावनी दी जो महामारी के प्रभाव से बच गये हैं कि वे इसके लिए खुशी न मनायें। "अक्सर ऐसा विचार उठता है कि अच्छा हुआ मैं इस बीमारी से प्रभावित नहीं हुआ। ईश्वर को धन्यवाद कि मैं सुरक्षित हूँ। बल्कि हम दूसरों के बारे सोचें। त्रासदी और अर्थव्यवस्था एवं शिक्षा पर इसके प्रभाव की कल्पना करें। इसके बाद क्या होगा उसके बारे सोचें।" उन्होंने कहा कि आज हम प्रार्थना में एकजुट हों ताकि इस स्वार्थी मनोभाव से ऊपर उठ सकें।

मानवता पिता के सामने एकजुट

संत पापा ने स्पष्ट किया कि एक साथ प्रार्थना करना किसी भी तरह से "धार्मिक सापेक्षवाद" नहीं है। "हम पिता से कैसे प्रार्थना नहीं कर सकते? हर कोई अपने अनुसार प्रार्थना करे जैसा वह कर सकता है और जैसा उसने अपनी संस्कृति से सीखा है। हम एक-दूसरे के विरूद्ध प्रार्थना नहीं कर रहे हैं...बल्कि हम मानवता में, भाई और बहन की तरह एकजुट हैं।" उन्होंने सभी से आग्रह किया कि हम अपने पापों की क्षमा के लिए प्रार्थना करें ताकि ईश्वर इस महामारी का अंत कर दें।

कई महामारियाँ

संत पापा ने कई महामारियों की याद की जो मानवता को प्रभावित करते हैं। आधिकारिक आंकड़े का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "साल के पहले चार महीनों में भूख से करीब 3.7 मिलियन लोग मर चुके हैं।"

महामारी के खिलाफ आज की प्रार्थना हमें अन्य महामारियों के बारे सोचने के लिए प्रेरित करे, जैसे युद्द एवं भूखमरी की महामारियाँ।

करुणा के ईश्वर

नबी जोना के ग्रंथ पर पुनः लौटते हुए संत पापा ने कहा कि निन्हवे के लोगों ने नबी का उपदेश सुना और अपने बुरे रास्तों से वापस लौटे। ईश्वर ने उनके मन-परिवर्तन को देखा और महामारी को रोक दिया।

संत पापा ने प्रार्थना की कि "प्रभु इस संकट, इस महामारी का अंत कर दें और हम पर दया करें। वे भूखमरी, युद्ध और बच्चों की अशिक्षा जैसी अन्य भयंकर महामारियों को भी समाप्त कर दें। इसकी याचना हम भाई-बहनों के रूप में एक साथ करते हैं। ईश्वर हम सभी को आशीष दे और हम पर करुणा करे।

संत पापा का ख्रीस्तयाग 14 मई 2020

 

14 May 2020, 09:39
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