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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस 

संत पापा ने आवासहीन लोगों के लिए प्रार्थना की

संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग में कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव से पीड़ित लोगों की याद की, विशेषकर, जिनके पास घर नहीं है। उपदेश में उन्होंने याद दिलाया कि ख्रीस्तीय जीवन में, ईश्वर द्वारा चुने जाने की याद करना, आनन्द से उनकी प्रतिज्ञा की ओर बढ़ना और उनके व्यस्थान को बनाये रखना है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 2 अप्रैल 20 (रेई)- संत पापा ने कहा, “इन दिनों की पीड़ा और उदासी कई लोगों की छिपी समस्याओं को प्रकट करती है। आज के समाचार पत्र में एक फोटो है जो हृदय को स्पर्श कर जाता है। शहर के कई बेघर लोग, पार्किंग स्थल पर निगरानी में रखे गये हैं... आज बहुत सारे लोग बेघर हैं। हम कलकत्ता की संत मदर तेरेसा की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना करें कि समाज के उन सभी लोगों के प्रति सामीप्य का भाव जागे जो इस संकट की घड़ी में बेघर लोगों की तरह छिपी जिंदगी जीने के लिए बाध्य हैं।”

उपदेश में संत पापा ने आज के पाठों पर चिंतन किया जिन्हें उत्पति 17,3-9 और संत योहन. 8, 51-59 से लिया गया है। पाठों के केंद्र में अब्राहम का चित्रण है जिनके साथ ईश्वर ने व्यवस्थान स्थापित किया था। येसु हमारे पापों को क्षमा कर उसी व्यवस्थान को नवीकृत करने आये। संत पापा ने कहा, “हम ख्रीस्तीय हैं क्योंकि हम ईश्वर द्वारा चुने गये हैं और हमने एक महान प्रतिज्ञा प्राप्त की है अतः हमें इस व्यवस्थान का प्रत्युत्तर निष्ठा के साथ देना है।” संत पापा ने कहा कि ईश्वर हमेशा अपने विधान की याद करते हैं। जिसको हमने स्तोत्र पाठ में भी दोहराया। ईश्वर कभी नहीं भूलते। वे केवल एक चीज को भूलते हैं, जब वे पापों को क्षमा कर देते उसके बाद वे उसे फिर कभी याद नहीं करते।  वे अपने लोगों के साथ अपनी निष्ठा को नहीं भूलते, अब्राहम के साथ की गयी अपनी प्रतीज्ञा की याद वे सदा बनाये रखे।

ईश्वर ने अब्राहम को चुना कि वह एक रास्ता तय करे। ईश्वर ने उन्हें चुना था, उसी चुनाव में उन्होंने एक विरासत की प्रतिज्ञा की थी। इस प्रतिज्ञा में वह दूर भविष्य में अपनी फलप्रदता को देखता है, तुम राष्ट्रों के पिता बनोगे। चुनाव, प्रतीज्ञा और व्यवस्थान, ये ख्रीस्तीय जीवन में विश्वास के तीन आयाम हैं। हम प्रत्येकजन चुने गये हैं, कोई भी व्यक्ति हर प्रकार की संभवनाओं के बावजूद अपने आपसे ख्रीस्तीय होने का चुनाव नहीं कर सकता, जिसको धर्म की दुकानें प्रस्तुत करती हैं।

हम ख्रीस्तीय हैं क्योंकि हम चुने गये हैं। इस चुनाव में आशा की प्रतिज्ञा है, फलप्रद होने का चिन्ह है। विश्वास अच्छे कार्यों में प्रकट होता है अर्थात विश्वास फलप्रद होता है। प्रभु कहते हैं किन्तु तुम्हें और एक कदम आगे जाना है, मेरे साथ अपने विधान का पालन करना है। यह निष्ठा का विधान है, तुम्हें निष्ठावान बने रहना है। हम चुने गये हैं ईश्वर ने हमसे एक प्रतिज्ञा की है और अब एक विधान स्थापित करना चाहते हैं। येसु कहते हैं कि अब्राहम अपने फलप्रद होने, पुत्र प्राप्त करने के दिन की कल्पना कर आनन्दित हुए, येसु अब्राहम के पुत्र हैं जो सृष्टि को नवीकृत करने आये, जिसको नवीकृत करना बहुत कठिन था। वे हमें पापों से मुक्त करने और हमें बचाने आये।

संत पापा ने कहा कि एक ख्रीस्तीय इसलिए ख्रीस्तीय नहीं होता कि उसने बपतिस्मा प्राप्त किया है। हम अपने को ख्रीस्तीय तभी कह सकते हैं जब हम ईश्वर द्वारा चुने गये, उनकी प्रतीज्ञाओं के पीछे जाते और ईश्वर के विधान के अनुसार जीते हैं। यही ख्रीस्तीय जीवन हैं। पाप की यात्रा हमेशा इन आयामों के विपरीत जाती, जिसमें हम चुने जाने को स्वीकार नहीं करते और देवमूर्तियों का चुनाव करते, उन चीजों को अपनाते हैं जो ईश्वर की नहीं हैं, आशा की प्रतिज्ञा को स्वीकार नहीं करते और प्रतिज्ञाओं को दूर से देखते हैं।  

संत पापा ने कहा कि आज हम जो देवमूर्तियाँ बनाते हैं, वे इस प्रकार हैं- विधान को भूल जाना, व्यवस्थान के बिना जीना, मानो कि कोई व्यवस्थान ही न बनायी गई हो। निष्ठा में आनन्द होता है वह आनन्द जिसको अब्राहम ने येसु के दिनों के रूप में महसूस किया और आनन्द से प्रफूलित हो उठा। यही प्रकाशना आज, ईश वचन हमारे ख्रीस्तीय जीवन के लिए करता है। संत पापा ने ख्रीस्तयाग के अंत में सभी विश्वासियों को पवित्र संस्कार की आशीष प्रदान की।

02 April 2020, 17:12
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