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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

संत पापा ने महामारी से डरते बुजूर्गों के लिए प्रार्थना की

संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार को पवित्र मिस्सा में उन बुजूर्गों के लिए प्रार्थना की जो इस महामारी के कारण डरे हुए हैं। वे विश्राम घरों में या अपने घरों में अलग-थलग पड़े हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार,15 अप्रैल 2020 (रेई): वाटिकन स्थित संत मर्था निवास में पास्का अठवारे के तीसरे दिन बुधवार को संत पापा फ्राँसिस ने पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान किया और बुजूर्गों के लिए विशेष प्रार्थना की।

 संत पापा फ्राँसिस ने पवित्र मिस्सा के शुरुआत में कहा, ʺहम आज बुजूर्गों के लिए प्रार्थना करते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो अलग-थलग हैं या नर्सिंग होम में हैं। वे डरते हैं, अकेले मरने से डरते हैं। वे इस महामारी को एक आक्रामक चीज के रूप में महसूस करते हैं। बुजूर्ग हमारी जड़ें हैं, हमारा इतिहास हैं। उन्होंने हमें विश्वास, परंपरा, अपनेपन की भावना दी। हम उनके लिए प्रार्थना करते हैं कि प्रभु अभी उनके करीब हों।ʺ

अपने प्रवचन में, संत पापा फ्राँसिस ने आज के पहले पाठ पर टिप्पणी की, जो प्रेरित चरित (3, 1-10) से लिया गया, जिसमें पेत्रुस ने "येसु मसीह के नाम पर" प्रार्थना कर एक जन्म से अपंग व्यक्ति को चंगा किया। आज के सुसमाचार (लूकस 24, 13-35) में पुनर्जीवित येसु एम्माउस जाने वाले शिष्यों के साथ चलते है, उन्हें अपनी मृत्यु का रहस्य समझाते हैं। दोनों शिष्य उन्हें अपने घर आने हेतु आमंत्रित करते हैं ओर जब प्रभु खाने की मेज पर रोटियों के आशीष देते हुए तोड़ते और उनहें देते हैं तो उनकी आँखे खुल जाती है और वे प्रभु के पहचानते हैं।

मनुष्यों के प्रति ईश्वर की निष्ठा

संत पापा ने कहा कि ईश्वर हमेशा अपनी प्रतिज्ञा के प्रति निष्ठावान हैं। उनकी वफादारी हमेशा हमें आनंद और उल्लास से भर देती है जैसा कि एम्माउस में उन दो चेलों ने अनुभव किया। उन्होंने आपस में कहा, ʺहमारे हृदय कितने उदीप्त हो रहे थे जब वे रास्ते में हमसे बातें कर रहे थे और हमारे लिए धर्मग्रंथ की व्याख्या कर रहे थे।ʺ संत पापा ने कहा कि वे दोनों चेले वहीं नहीं रुके वे उसी घड़ी उठकर येरुसालेम लौट गये।

ईश्वर के प्रति हमारी निष्ठा

संत पापा ने कहा कि दोनों चेलों की निष्ठा पुनर्जीवित येसु की निष्ठा का प्रतिउत्तर था। हमारी आस्था कुछ और नहीं, बल्कि ईश्वर की आस्था की प्रतिक्रिया है। ईश्वर जो अपने वचन के प्रति वफादार हैं, जो अपने लोगों के साथ अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करते है। ईश्वर लगातार खुद को लोगों के उद्धारकर्ता के रूप में महसूस कराते हैं क्योंकि वे अपने वचन के प्रति वफादार है। ईश्वर, जो चीजों को फिर से बनाने में सक्षम है, जैसा कि उसने जन्म से इस अपंग के साथ किया था कि उसके पैरों को फिर से बनाया, उसे चंगा किया। चंगा होकर वह उछलता कूदता मंदिर में प्रवेश किया और ईश्वर को धन्यवाद दिया। ईश्वर हमेशा अपने लोगों के लिए एक सांत्वना लाता है।

संत पापा ने कहा कि ईश्वर अपने लोगों के प्रति हमेशा प्रयासरत हैं। ईश्वर उस चरवाहे के समान हैं जो अपनी भेड़ों की देखभाल पूरी वफादारी के साथ करते हैं। जब वे देखते हैं कि उसकी एक भेड़ नहीं लौटी है तो तुरंत ही उसकी खोज में निकलते है और पाने पर उसे गोद में उठाते हैं और वापस लाते है। संत पापा ने उस पिता का भी उदाहरण दिया जो अपने बेटे के लौटने की आशा देखते हैं और छत पर बारंबार जाकर अपने बेटे के आने की राह देखते हैं। उसके वापस लौट आने पर अपनी खुशी बांटते हुए घर पर भोज रखते हैं। संत पापा ने कहा कि ईश्वर की आस्था भोज है,यह एक ऐसी खुशी है जो हमें ईश्वर के प्रति निष्ठावान बनाती है। हमारी निष्ठा हमेशा उस निष्ठा का जवाब है जो हमें प्रेम करते हैं और उसने सबसे पहले हमपर भरोसा रखा है। वे ही पहल करते हैं, वे बादाम के पेड़ का फूल हैं,जो वसंत में सबसे पहले खिलता है।

15 April 2020, 14:28
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