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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

संत पापा फ्राँसिस ने नागरिक अधिकारियों के लिए प्रार्थना की

संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए सभी नागरिक अधिकारियों के लिए प्रार्थना की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 12 मार्च 20 (रेई)˸ संत पापा ने मिस्सा के आरम्भ में कहा, "हम उन लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं जिन्हें कोरोना वायरस संक्रमण रोकने हेतु उपाय अपनाने के लिए निर्णय लेना है। वे प्रार्थनाओं द्वारा लोगों का सहयोग महसूस कर सकें। कई बार वे निर्णय लेते हैं जो लोगों को अच्छा नहीं लगता है किन्तु यह हमारी अच्छाई के लिए है।"

संत पापा ने अपने उपदेश में संत लूकस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ (लूक. 16˸ 19-31) पर चिंतन किया जिसमें धनी व्यक्ति एवं लाजरूस की कहानी है।      

धनी व्यक्ति

संत पापा ने येसु के दृष्टांत के धनी व्यक्ति की तुलना उन लोगों से की जो सम्पन्न, आनन्दित और चिंता मुक्त लोगों से की। उन्होंने कहा कि धनी व्यक्ति के वस्त्र शायद उस समय के सबसे अच्छे फैशन डिज़ाइनरों द्वारा तैयार किये गये थे। रोज दावत देने के कारण शायद उसे कोलेस्ट्रॉल की भी दवाई लेनी पड़ती थी होगी। वह निश्चिंत होकर जी रहा था।   

नाटक

संत पापा ने कहा, "धनी व्यक्ति जनता था कि उसकी सीढ़ी पर एक गरीब आदमी रहता है। उसका नाम लाजरूस था उसे भी जानता था। समस्या यह थी कि लाजरूस उसके लिए कोई मायने नहीं रखता था। वह इस बात को सामान्य मानता था कि लाजरूस खुद अपनी चिंता करे। बाद में दोनों की मृत्यु हो जाती है।  

सुसमाचार बतलाता है कि "स्वर्गदूतों ने लाजरूस को ले जा कर इब्राहीम की गोद में रख दिया" और "धनी व्यक्ति के बारे कहा गया है कि उसे दफनाया गया।"

अगाध गर्त

संत पापा ने लाजरूस एवं धनी व्यक्ति के बीच "अथाह गर्त" पर प्रकाश डाला। अब्राहम ने कहा, "हमारे और तुम्हारे बीच एक भारी गर्त अवस्थित है ; इसलिए यदि कोई तुम्हारे पास जाना भी चाहे, तो वह नहीं जा सकता और कोई भी वहाँ से इस पार नहीं आ सकता।' संत पापा ने कहा कि यह वही गर्त था जो "धनी व्यक्ति एवं लाजरूस के बीच उनके जीवन काल में था।"

उदासीनता का नाटक

संत पापा ने धनी व्यक्ति के नाटक को "बहुत अधिक प्रशिक्षित कहा"। वह प्रशिक्षण जिसके कारण उसका हृदय कभी प्रभावित नहीं हुआ। दूसरों के दायनीय जीवन से उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि हमारा हृदय भी ऐसा ही होता है।   

"हम सभी जानते हैं क्योंकि हमने टेलीविजन में देखा है अथवा समाचार पत्रों में पढ़ा है ˸ आज दुनिया में कितने बच्चे भूखे हैं, कितने बच्चों को चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती है और कितने बच्चे स्कूल नहीं जा सकते हैं। हम उन्हें "बेचारे" कह देते और बस हो जाता है... हम जानते हैं कि ये सब हो रहा है किन्तु हमारे हृदय को नहीं छूता।"  

उदासीनता

संत पापा ने कहा कि नाटक यह है कि हमें सब सूचनाएँ मिलती हैं किन्तु हम दूसरों के जीवन की वास्तविकता को महसूस नहीं कर सकते। यही गर्त है, उदासीनता का गर्त। यह उदासीनता हमारे नाम को भी मिटा देता है जैसा कि धनी व्यक्ति के साथ हुआ जिसका नाम हमें मालूम नहीं है। यह नाम और पहचान दोनों छीन लेता और  "विशेषण की संस्कृति" की ओर ले जाता है जहाँ व्यक्ति का मूल्य उसकी सम्पति में होती है।

संत पापा की प्रार्थना

संत पापा ने अपने उपदेश के अंत में विश्वासियों से प्रार्थना का आह्वान करते हुए कहा कहा, "आज हम प्रभु से उदासीनता में नहीं पड़ने की कृपा के लिए प्रार्थना करें। उस कृपा के लिए कि हम मानवीय पीड़ा का जो भी समाचार प्राप्त करते हैं वह हमारे हृदयों को स्पर्श कर सके और हमें दूसरों की मदद हेतु प्रेरित करे।  

 

12 March 2020, 16:55
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