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संत पापा फ्राँसिस संत मार्था के प्रार्थनालय में संत पापा फ्राँसिस संत मार्था के प्रार्थनालय में  (ANSA)

बुजूर्गों के लिए प्रार्थना करें, संत पापा

संत पापा ने कोरोना वायरस से पीड़ितों के लिए प्रार्थना करते हुए बुजूर्गों के लिए विशेष प्रार्थना का निवदेन किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 17 मार्च 2020 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 17 मार्च को वाटिकन स्थित संत मर्था प्रार्थनालय में लाईव प्रसारित ख्रीस्तयाग के दौरान बुजूर्गों के लिए प्रार्थना की तथा हमेशा हृदय से क्षमा करने की अपील की।

संत पापा ने ख्रीस्तयाग को बुजूर्ग माता-पिताओं के लिए अर्पित किया जो कोरोना वायरस के कारण अलग और अपनों से दूर रहने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने  ख्रीस्तयाग शुरू करते हुए कहा कि “आइये हम हमारे नाना-नानी एवं सभी बुजूर्गों के लिए प्रार्थना करें कि प्रभु उनके करीब रहें और उन्हें शक्ति प्रदान करें जो हमें प्रज्ञा, जीवन और इतिहास प्रदान करते हैं। हम भी प्रार्थना द्वारा उनके करीब रह सकें।”

प्रवचन में संत पापा ने संत मती रचित सुसमाचार पाठ (मती.18,21-35) पर चिंतन किया जहाँ येसु अपने शिष्यों को क्षमा देने की शिक्षा देते हैं। पेत्रुस येसु से पूछता है कि हमें कितनी बार क्षमा करनी चाहिए।

भाईचारा ईश्वर की अच्छाई की ओर आकर्षित करता है

संत पापा ने प्रवचन में कहा कि येसु ने हमें भ्रातृ प्रेम की शिक्षा दी है। मैं तुम से कहता हूँ यदि पृथ्वी पर तुम लोगों में दो व्यक्ति एक मत होकर कुछ भी मांगेंगे, तो वह उन्हें मेरे स्वर्गिक पिता की ओर से निश्चय ही मिलेगा। (मती. 18:19) भाइयों के बीच एकता, मित्रता, शांति ईश्वर की अच्छाई को आकर्षित करता है।

हमेशा क्षमा करें

संत पापा ने कहा कि पेत्रुस के सवाल कि "यदि मेरा भाई मेरे विरूद्ध अपराध करे तो कितनी बार उसे क्षमा करूँ? सात बार तक?" इसके जवाब में येसु के कथन का अर्थ है "हमें निरंतर क्षमा करना चाहिए।"

संत पापा ने कहा, "क्षमा करना आसान नहीं है क्योंकि हमारा आत्मकेंद्रित हृदय घृणा, बदले की भावना और असंतोष से हमेशा आसक्त रहता है। हमने घृणा के कारण परिवारों को नष्ट होते देखा है...। यह घृणा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित की जाती है, जो अपने माता-पिता के शव के सामने भी एक-दूसरे का अभिवादन नहीं कर सकते हैं क्योंकि वे बीती कड़वी बातों की याद रखते हैं। ऐसा लगता है कि प्रेम की अपेक्षा घृणा से अधिक लगाव है।”

ईश्वर क्षमा करते और भूल जाते हैं

संत पापा ने कहा कि घृणा शैतान का खजाना है। वह सब कुछ को नष्ट करने के लिए हमारी घृणा की भावना को उकसाता है और कई बार छोटी चीजों के द्वारा हमारा विनाश करता है।

संत पापा ने कहा, “इसी ने ईश्वर को नष्ट करने का प्रयास किया जो दण्ड देने नहीं बल्कि क्षमा देने आये। ईश्वर जो उन पापियों के लिए भोज प्रदान करते हैं और सब कुछ भूल जाते हैं जो उनके नजदीक आते। जब ईश्वर क्षमा करते हैं तो वे हमारे द्वारा किये गये सभी बुरे कार्यों को भूल जाते हैं। किसी ने इसे ईश्वर की बीमारी कहा है कि उन्हें वे बातें याद ही नहीं रहतीं। ईश्वर हम पापियों की बुरी कहानियों को याद नहीं करते...सिर्फ हमसे इस बात की मांग करते हैं कि हम माफ करना सीखें।”

स्वर्ग जाने की शर्त

संत पापा ने एक अन्य सुसमाचार पाठ पर प्रकाश डाला जहाँ हमें एक-दूसरे के साथ मेल-मिलाप करने की सलाह दी गयी है। (मती.5:24) ईश्वर कहते हैं, तुम एक ओर मेरे प्रति प्रेम एवं दूसरी ओर अपने भाई-बहनों के प्रति घृणा की भावना से मत आओ।

स्वर्ग जाने की शर्त है क्षमा करना। येसु जो दृष्टांत हमें सुनाते हैं वह स्पष्ट है। वे हमें क्षमा करने की शिक्षा देते हैं जो आसान नहीं है। संत पापा ने कहा, “जब हम पापस्वीकार संस्कार ग्रहण करने जाते हैं तब पहले अपने आप से पूछे, क्या मैं क्षमा करता हूँ। यदि मुझे लगता है कि मैं क्षमा नहीं कर सकता तो मुझे यह नहीं सोचना चाहिए कि मैं क्षमा मांग सकता हूँ क्योंकि मैं उसे प्राप्त नहीं कर  सकता। क्षमा मांगने का अर्थ है क्षमा देना। ये दोनों साथ-साथ चलते हैं। उन्हें अलग नहीं किया जा सकता।”

संत पापा की प्रार्थना

संत पापा ने अपने प्रवचन का समापन एक प्रार्थना से की, प्रभु हमें इसे समझने की कृपा दे, कि हम अपना सिर झुका सकें ताकि हम घमंडी न बनें किन्तु क्षमा करने के लिए उदार बन सकें।

आराधना

ख्रीस्तयाग के अंत में आराधना हेतु पवित्र संस्कार का प्रस्तुतिकरण किया गया। संत पापा एवं मिस्सा में भाग लेनेवालों कुछ समय आराधना में व्यतीत किया। उसके बाद संत पापा ने सभी को पवित्र संस्कार की आशीष प्रदान की। 

17 March 2020, 16:29
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