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संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

छोटी प्रार्थना ईश्वर को प्रभावित करती है, संत पापा

हमारे जीवन की छोटी प्रार्थनाओं के द्वारा ईश्वर प्रभावित होते हैं।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, गुरूवार (16 जनवरी 2020) ईश्वर हमारे निकट रहते हैं, “उनकी करूणा हमारी तकलीफें, पापों और आंतरिक बीमारियों को दूर करती हैं”। उक्त बातें संत पापा फाँसिस ने संत मार्था के प्रार्थनालय में अपने मिस्सा बलिदान के दौरान, सुसमाचार में कोढ़ग्रस्त व्यक्ति की चंगाई के संदर्भ में कहीं। 

“प्रभु यदि आप चाहें तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं”। यह एक साधारण प्रार्थना है, जिसमें हम “विश्वास” को पाते हैं, इस में एक सच्ची “चुनौती” है जिसे कोढ़ग्रस्त व्यक्ति येसु से चंगाई प्राप्त करने हेतु करता है। यह निवेदन हृदय की गहराई से निकलती है जिसके फलस्वरूप येसु ख्रीस्त करूणा में हमारे लिए अपने कार्यों को पूरा करते हैं। “वे हमारी तकलीफों को अपने ऊपर ले लेते” और पिता के प्रेम में हमें रोगमुक्त करते हैं। संत पापा फ्रांसिस ने सुसमाचार में कोढ़ी व्यक्ति की चंगाई पर चिंतन व्यक्त करते हुए पिता की करूणा की ओर विश्वासियों का ध्यान आकृष्ट कराया, जो हम पापियों को जीवन देने हेतु इस धरती पर आये।

एक सच्ची चुनौती

संत पापा ने कोढ़ी की इस “साधारण कहानी” पर बल देते हुए कहा, “यदि आप चाहते हैं” इसमें हम एक प्रार्थना को पाते हैं जो “ईश्वर का ध्यान आकृष्ट” कराता और एक समाधान लेकर आता है। उन्होंने कहा, “यह एक चुनौती है लेकिन इसके साथ ही यह एक विश्वास भरा कार्य है। वह कोढ़ी व्यक्ति जानता है कि वे उन्हें चंगाई प्रदान कर सकते हैं।” अतः वह अपने को उनके हाथों में समर्पित करता है। “क्यों उसने येसु के पास इस तरह के प्रार्थनामय मनोभव रखेॽ क्योंकि उसने येसु के कार्यों को देखा था। उनसे येसु की करूणा देखी थी। “करूणा” सुसमाचार में अभिव्यक्त वह विषयवस्तु है जिसे हम नाईम की विधवा, भले समारी के दृष्टांत और उड़ाव पुत्र के पिता में पाते हैं।

करूणा का उद्गम स्थल हमारा हृदय है जो हमें कोई भी कार्य करने को प्रेरित करता है। करूणा के कारण हम दूसरों के दुःख में सहभागी होते, दूसरों के दुःखों को अपने ऊपर लेते और उसे दूर करने का प्रयास करते हैं। येसु अपने प्रेरिताई में इसी कार्य को करते हैं। वे हमें संहिता की शिक्षा देने नहीं आते वरन वे करूणा में हमारे लिए और हमारे साथ रहते तथा हमें अपना जीवन देते हैं। उनकी करूणा हमारे लिए इतनी अधिक है कि वे हमारे प्रेम के खातिर अपने को क्रूस पर निछावर करते और अपने प्राणों का बलिदान अर्पित करते हैं।

येसु हमसे विमुख नहीं होते 

संत पापा ने कोढ़ी की छोटी प्रार्थना पर बल देते हुए कहा, “अपनी करूणा में येसु हमारे साथ रहते हैं, वे हमारे दुःख-तकलीफों में शामिल होते हैं। वे अपने को हमसे विमुख नहीं करते हैं। वे संहिता का पाठ पढ़ा कर हमें यूं ही छोड़ नहीं देते वरन हमेशा हमारी बगल में रहते हैं।” 

उन्होंने प्रार्थना करते हुए कहा, “प्रभु यदि आप चाहें तो मुझे चंगाई प्रदान कर सकते हैं, यदि आप चाहें तो मुझे क्षमा दे सकते हैं”, या आप थोड़ी देर कर सकते हैं। “प्रभु, मैं पापी हूँ, मुझ पर दया कर, मुझे करूणा की नजरों से देख।” यह एक साधारण प्रार्थना है जिसे हम दिन में कई बार कह सकते हैं। 

एक चमत्कारी प्रार्थना

कोढ़ी व्यक्ति अपने साधारण और चमत्कारी प्रार्थना के द्वारा येसु ख्रीस्त से चंगाई प्राप्त करता है। वे अपनी करूणा में, हमारे पापमय स्थिति में रहने पर भी हमें प्रेम करते हैं। वे हमसे शर्मिदा नहीं होते। “हे पिता, मैं एक पापी व्यक्ति हूँ, मैं इस बात को किस तरह से कह सकता हूँ...” यह कहना हमारे लिए उचित है क्योंकि वे पापियों के लिए ही दुनिया में आये और हम जितना पापी हैं उतना ही वे हमारे करीब रहते हैं। संत पापा ने कहा कि हम इस प्रार्थना को बार-बार दुहरायें, “हे प्रभु, यदि आप चाहें तो ऐसा कर सकते हैं”। हम इस बात पर भी विश्वास करें कि वे हमारे निकट रहते हैं और उनकी करुणा हमारी सारी मुसीबतों, पापों और आंतरिक बुराइयों को हमसे दूर करती है। 

16 January 2020, 16:58
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