खोज

Vatican News
ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

ईश्वर से प्रेम किन्तु भाई से घृणा करनेवाला झूठा है,संत पापा

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में शुक्रवार 10 जनवरी को संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग अर्पित किया तथा प्रवचन में इस बात पर चिंतन किया कि प्रेम किस तरह ठोस कार्यों में प्रकट होता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 11 जनवरी 2020 (रेई)˸ संत पापा ने प्रवचन में प्रेरित संत योहन के पहले पत्र से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जिसमें प्रेम विषय पर प्रकाश डाला गया है। उन्होंने कहा कि प्रेरित ने प्रेम को समझा और अनुभव कर लिया था और जब उसने येसु के हृदय में प्रवेश किया वह समझ लिया कि यह किस तरह अपने आप प्रकट होता है। अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि किस तरह हमें प्यार किया गया है और हम किस तरह प्यार करें।

ईश्वर ने पहले हमें प्यार किया

संत पापा ने कहा, "सच्चाई यह है कि हम ईश्वर को प्यार करते हैं क्योंकि उन्होंने हमें पहले प्यार किया है।" प्रेम उन्हीं में उत्पन्न होता है। "मैं प्रेम करता हूँ अथवा मैं प्रेम करना शुरू करता हूँ क्योंकि मैं जानता हूँ कि उन्होंने मुझे पहले प्रेम किया है। यदि उन्होंने पहले हमें प्यार नहीं किया होता तो हम भी उन्हें प्यार नहीं कर सकते।"

"यदि एक नवजात शिशु बोल सकता तो वह आवश्य प्रकट करता कि वह अपने माता- पिता द्वारा प्रेम किया गया महसूस करता है। माता-पिता अपने बच्चों को उसी तरह प्यार करते हैं जैसा ईश्वर करते हैं। यही प्रेम करने की हमारी क्षमता को उत्पन्न करता और बढ़ाता है।"

प्रेम करना और झूठ बोलना

संत योहन ने दूसरी बात कही है कि यदि कोई कहता है "मैं ईश्वर को प्यार करता हूँ किन्तु अपने भाई–बहनों से घृणा करता है तो वह झूठा है। संत पापा ने कहा कि संत योहन उस व्यक्ति को मूर्ख अथवा गलत व्यक्ति नहीं बल्कि झूठा कहते हैं।" झूठे व्यक्ति की परिभाषा देते हुए संत योहन कहते हैं कि बाईबल में इसके बारे स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह शैतान का तरीका है। नये व्यवस्थान में इसे झूठ का पिता कहा गया है।

संत पापा ने कहा, "यदि आप कहते हैं कि आप ईश्वर से प्रेम करते हैं किन्तु अपने भाई से घृणा तब आप झूठे हैं।" प्रेम नहीं करने की सफाई कई लोग देते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि मैं घृणा नहीं करता किन्तु लोग मुझे चोट पहुँचाते अथवा अस्वीकार करते हैं क्योंकि वे असभ्य या अशिष्ट हैं।

संत पापा ने कहा कि यह प्रेम के ठोस स्वरूप को कम आंकना है जिसके बारे योहन कहते हैं कि जो अपने भाई से प्रेम नहीं करता जिसको वह देख सकते है, तो वह ईश्वर को कैसे प्यार कर सकता है जो अदृश्य हैं। अतः यदि लोगों को आप प्यार नहीं कर सकते, तब आप नहीं कह सकते कि आप ईश्वर से प्रेम करते हैं। आप झूठे हैं।

शामिल होना

संत पापा ने एक दूसरे आयाम पर भी प्रकाश डाला, एक ऐसा आयाम जो लोगों को प्रेम करने से रोक देता है। यह आयाम है दूसरों के जीवन में माध्यम नहीं बनने की चाह रखना। संत पापा ने कहा कि यह भी सही नहीं है क्योंकि प्रेम अच्छा काम करने में अपने आप प्रकट होता है। सच्चा प्रेम जीवन के दिनचर्या में प्रकट होता है, अपनी समस्याओं, स्नेह और नपसंदगी के साथ। संत पापा ने संत अबर्ट हार्तादो के शब्दों में कहा, "बुराई नहीं करना अच्छा है क्योंकि अच्छा नहीं करना बुरा है। सच्चा प्रेम आपको अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करेगा...प्रेम के कार्यों में हाथ गंदा करने के लिए।"

विश्वास के द्वारा हम संसार को जीत सकते हैं

संत पापा ने स्वीकार किया कि यह आसान नहीं है किन्तु विश्वास के द्वारा यह संभव है। विश्वास के द्वारा प्रेम नहीं करने की भावना पर विजय पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वास के रास्ते पर उदासीन लोग नहीं चल सकते, वे लोग जो समस्याओं से अपना हाथ धो लेते, जो मदद करने के लिए मध्यस्थ बनना नहीं चाहते और जो कहते हैं कि वे ईश्वर को प्यार करते किन्तु अपने पड़ोसियों से प्रेम नहीं कर सकते हैं।

संत पापा ने प्रार्थना की कि प्रभु हमें इस सच्चाई की शिक्षा दे, पहले प्यार किये जाने का एहसास दे और भाई–बहनों को प्यार कर पाने का साहस दे।

11 January 2020, 14:05
सभी को पढ़ें >