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ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

प्रभु उन्हें सांत्वना प्रदान करते हैं जो उसे स्वीकार करते, पोप

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि ईश्वर हमें सदा सांत्वना प्रदान करते हैं, बशर्ते कि हम उनकी सांत्वना को स्वीकार करें। ईश्वर दुलारते, सुधारते एवं सांत्वना देते हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 दिसम्बर 2019 (रेई)˸ 10 दिसम्बर को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने नबी इसायस के ग्रंथ से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ नबी, ईश्वर को एक भला चरवाहा के रूप में प्रस्तुत करते हैं जो अपना रेवड़ चराता है। वह मेमने को उठा कर अपनी छाती से लगा लेता और दूध पिलाने वाली भेडों को धीरे-धीरे ले चलता है।

संत पापा ने कहा कि प्रभु किस तरह सांत्वना देते हैं? किस तरह सुधारते हैं? किस तरह चेतावनी देते हैं? उन्होंने कहा कि कोमलता से। क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि प्रभु को कैसा लगता है जब हम पाप करते हैं?

प्रभु स्नेह से हमारा मार्गदर्शन करते हैं और प्यार से सुधारते हैं जिसको हम कह सकते हैं कि प्रभु स्नेह से सजा देते हैं। ईश्वर की कोमलता, उनके उपदेशात्मक या कूटनीतिक रवैये में नहीं है बल्कि यह अंदर से आता है। जब एक पापी उनके पास आता है तो उन्हें खुशी होती है और यह खुशी उन्हें कोमल बना देता है।

पापी के सामने प्रभु का आनन्द कोमलता में बदल जाता है

संत पापा फ्राँसिस उड़ाव पुत्र के दृष्टांत की याद करते हैं जिसमें पिता दूर से ही अपने पुत्र को देख लेता है क्योंकि वह उसका इंतजार कर रहा था। वह घर की छत पर अपने पुत्र की राह देखने जाता है। जब पुत्र पहुँचता और पश्चाताप प्रकट करता है तब पिता उसका आलिंगन करता और खुशी मनाता है। यही प्रभु का कोमल सामीप्य है।

सुसमाचार पाठ पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा कि प्रभु उसी तरह हमें खोजते हैं जिस तरह एक चरवाहा एक भेड़ के खो जाने पर 99 भेड़ों को छोड़कर उसे खोजने जाता है और जब वह उसे पा लेता है तो खुशी मनाता है। संत पापा ने कहा कि यही पापी के सामने प्रभु का आनन्द है। जब हम अपने आपको उनके द्वारा क्षमा किये जाने देते और क्षमा मांगने उनके पास आते हैं तब उनका आनन्द कोमलता में बदल जाता है जो हमें सांत्वाना प्रदान करता है।  

शिकायत न करें

संत पापा ने कहा कि हम अपनी कठिनाइयों के लिए बहुधा शिकायत करते रहते हैं। शैतान चाहता है कि हम उदासी रहें, जीवन में कड़वाहट महसूस करें। संत पापा ने याद किया कि एक बार उनकी मुलाकात एक धर्मसमाजी से हुई जिसको लोग "शोक" पुकारते हैं क्योंकि वह हर बात में शिकायत करता था।

हम कितनी बार शिकायत करते हैं और सोचते हैं कि हमारे पाप एवं हमारी कमजोरियाँ क्षमा नहीं की जायेंगी। वहीं प्रभु की आवाज सुनाई पड़ती है, "मैं तुम्हें सांत्वना देता हूँ मैं तुम्हारे करीब हूँ" और वे हमें स्नेह से अपने पास बुलाते हैं। सर्वशक्तिमान ईश्वर जिन्होंने स्वर्ग और पृथ्वी बनाया और अपने आपको क्रूस पर चढ़ाने दिया एवं हमारे लिए मर गये वे हमें दुलाते एवं कहते हैं, "राओ मत"।

नाईम की विधवा के समान सांत्वना प्राप्त करें

जब येसु ने नाईम की विधवा को रोते देखा तब उन्होंने कितने प्रेम से उसे सांत्वना दी और उससे कहा, "रोओ मत।" संत पापा ने कहा कि उन्होंने दिलासा दी क्योंकि वहाँ मुसीबत थी। हमें भी प्रभु की सांत्वना पर विश्वास करना चाहिए क्योंकि उसके बाद वे हमें क्षमा कर देते हैं।  

संत पापा ने विश्वासियों को, पिता से अपनी गलतियों को स्वीकार करने की सलाह देते हुए कहा, "पिता मैंने बहुत सारे पाप किये हैं मैंने जीवन में कई गलतियाँ की हैं किन्तु नैं आपकी सांत्वना की कामना करता हूँ। प्रभु मैं किसके पास क्षमा मांगने जाऊँ?" संत पापा ने कहा कि हम साहस के साथ प्रभु के द्वार पर जाएँ और वे हमें दुलार करेंगे। वे हमें पिता तुल्य स्नेह से अपनी बाहों में भर लेंगे, एक चरवाहे की तरह अपनी छाती से लगा लेंगे और दूध पिलाने वाली भेड़ की तरह धीरे-धीरे आगे ले चलेंगे।

10 December 2019, 17:06
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