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संत मार्था में ख्रीस्तयाग संत मार्था में ख्रीस्तयाग 

पाखंडता की दवा, अपने को दोषीदार स्वीकारना

संत पापा फ्रांसिस ने संत मार्था के अपने प्रार्थनालय में मिस्सा बलिदान के दौरान मानवीय पाखंडता रुपी बीमारी की दवाई का जिक्र किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, 15 अक्टूबर 2019 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने वाटिकन के अपने निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रातकालीन मिस्सा बलिदान के दौरान अपने प्रवचन में कहा कि ईश्वर के सामने अपने को दोषी स्वीकारना हमें पाखंडता से मुक्त करता है। पाखंडता के रोग से चंगाई की दवा हमारे लिए येसु के समाने अपने को दोषी स्वीकारना है। एक ख्रीस्तीय जो ऐसा करने में सक्षम नहीं एक सच्चा ख्रीस्तीय नहीं है।

अपने मिस्सा के प्रवचन में संत पापा ने पाखंडता की विषयवस्तु पर चिंतन करते हुए कहा कि आज के सुसमाचार पाठ में येसु एक फरीसी के घर भोजन करने हेतु निमंत्रित किये जाते हैं, वे बिना हाथ धोये भोजन की मेज पर बैठते जिसके कारण उनकी टीका-टिप्पणी की जाती है। संत पापा ने कहा, “येसु पाखंडता के मनोभाव को सहन नहीं कर सकते हैं। इसे हम आज के सुसमाचार में पाते हैं। येसु मित्रता के नाम पर नहीं वरन दोषारोपण हेतु भोज में आमंत्रित किये जाते हैं।” पाखंडीपन अपनी  नुमाईश करता है जहाँ हम अपने में जो नहीं हैं उसे दिखाने की कोशिश करते हैं।

पाखंडता का जन्मदाता शैतान

येसु पाखंडता को सहन नहीं कर सकते हैं। यही कारण है कि वे फरीसियों को चुनौती देते और उन्हें आडम्बरी, लीपी-पोती हुई कब्र कहते हैं। अपने इस कथन के द्वारा वे उनका अपमान नहीं करते वरन सच्चाई को व्यक्त करते हैं। “फरीसी अपने में सर्वोतम लगते लेकिन उनके भीतर दूसरी चीजें भरी हुई हैं। यह मनोभाव “शैतान, जो झूठा है उसकी ओर से आता है।” वह अपने में “महा पाखंडी” है औऱ पाखंड करने वाले उसके “उत्तराधिकारी” हैं।

पाखंडता शैतान की भाषा है जिसे वह हमारे हृदय में बोते हैं। आप आडम्बरी व्यक्ति के साथ जीवन व्यतीत नहीं कर सकते हैं। येसु वैसे व्यक्तियों का पर्दाफाश करना चाहते हैं। वे इस बात से वाकिफ हैं कि यह दिखावा है जो हमारे लिए मौत का कारण बनती है क्योंकि अपने दिखावे में हम यह नहीं जानते की हम उचित चीजों को कर रहे हैं या अनुचित। इस तरह हम गलत चीजों को करते जाते, गलत साक्ष्य देते हैं।

पाखंडता जहर के समान

संत पापा ने कहा कि हम अपने में बहुत बार यह सोचते हैं कि इसमें कोई “दिखावे वाली बात नहीं” लेकिन हम इस पर थोड़ा चिंतन करें। आडम्बरी भाषा अपने में सामान्य है जो रोज दिन के जीवन में बोली जाती है। हम अपने में दिखते कुछ और हैं और करते कुछ और हैं। हम अपने शक्तिशाली होने के रुप को प्रकट करना चाहते हैं लेकिन हमारे अंदर घृणा, ईर्ष्या जैसे बातें व्याप्त होती हैं। यह हमारे अन्दर जहर के समान है जो हमें धीरे-धीरे मार डालती है।

दोषी करारना औषधि

संत पापा ने कहा कि हमें इस मनोभाव पर विजय प्राप्त करने की जरूरत है। इसकी दवा हमारे लिए ईश्वर के सम्मुख “सच्चे रुप में पेश आना है। उन्होंने कहा,“हमें अपने को दोषी करारने हेतु सीखने की जरुरत है। मैंने ऐसा किया, मैं बुरा सोचता हूँ... मैं घृणा करता, मैं उसे मार डालना चाहता हूँ...।”  हमारे अन्दर जो है हमें उसे ईश्वर को बतलाने की जरुरत है। यह आध्यात्मिक क्रिया अपने में सामान्य नहीं है लेकिन हमें ऐसा करने हेतु सीखने की आवश्यकता है। हम अपने को दोषी घोषित करें, अपने को पाप में देखें, पाखंडता में ये सारी चीजों हमारे हृदय में हैं। क्योंकि शैतान हममें बुराई बोता है जिसके फलस्वरुप हम नम्रता में ईश्वर के सामने कहते हैं, “प्रभु देखिए, मैं तो ऐसा हूँ।”

पेत्रुस द्वारा पापी होने का एहसास

संत पापा ने इस बात पर पुनः बल देते हुए कहा कि हम अपने को पापी घोषित करें, “एक ख्रीस्तीय जो अपने को दोषी करार देना नहीं जानता वह सच्चा ख्रीस्तीय नहीं है, वह पाखंडता की जोखिम में गिर जाता है। पेत्रुस येसु से कहते हैं प्रभु आप मुझ से दूर चले जायें क्योंकि मैं एक पापी मनुष्य हूँ। “हम अपने को दोषीदार घोषित करें।”

15 October 2019, 16:12
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