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ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (ANSA)

ख्रीस्त का प्रेम धारावाहिक की कहानी जैसा नहीं, संत पापा

वाटिकन स्थित प्रेरित आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में बृहस्पतिवार 31 अक्टूबर को, संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए विश्वासियों से कहा कि येसु में हम सभी के लिए, ईश्वर के प्रेम को समझने की कुँजी कोमलता है।

उषा मनोरम ातिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 31 अक्टूबर 2019 (रेई)˸ संत पापा ने प्रवचन में कहा, "पवित्र आत्मा हमारे लिए ख्रीस्त के प्रेम को समझाता है और हमारे हृदय को तैयार करता है कि हम प्रभु के द्वारा प्रेम किये जाएँ।"

रोमियों को लिखे संत पौलुस के पत्र से लिये गये आज के पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि संत पौलुस कुछ लोगों के लिए अभिमानी के समान लगते हैं  जब वे कहते हैं, "कौन हम को मसीह के प्रेम से वंचित कर सकता है? क्या विपत्ति या संकट? क्या अत्याचार, भूख, नग्नता, जोखिम या तलवार?" (रोम 8:31-39)

माँ की ममता

संत पापा ने कहा कि संत पौलुस हमें दिखलाना चाहते हैं कि ख्रीस्त के प्रेम द्वारा हम सब कुछ पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। जब प्रभु ने पौलुस को दमिश्क के रास्ते से बुलाया तभी से वह ख्रीस्त के रहस्य को समझने का प्रयत्न करता रहा। उन्होंने कहा कि वह ख्रीस्त के प्रेम में बंध चुका था और उन्हें बहुत अधिक प्यार करता था जो एक धारावाहिक (सोप ओपेरा) की कहानी के समान नहीं था। पौलुस ने अच्छी और बुरी हर परिस्थिति में येसु की संगति का अनुभव किया।

वह प्रेम के कारण ऐसा महसूस कर पाता था। हम अपने आपसे पूछें कि क्या हम भी संत पौलुस के समान प्रभु से प्रेम किये गये महसूस करते हैं? जब कठिनाई की घड़ी आती है, हम तुरन्त कहना चाहते हैं, ‘प्रभु ने मुझे छोड़ दिया है। वे मुझे अब प्यार नहीं करते और हम भी उन्हें छोड़ देना चाहते हैं।’ पौलुस यह अच्छी तरह जानता था कि प्रभु उन्हें कभी नहीं छोड़ेंगे क्योंकि वह अपने जीवन में ख्रीस्त के प्रेम को समझ लिया था। यही रास्ता संत पौलुस हमें दिखलाते हैं, हर परिस्थिति में प्रेम करने का रास्ता। यही संत पौलुस की महानता है।

अपना जीवन दूसरों को दें

ख्रीस्त के प्रेम का वर्णन नहीं किया जा सकता और न ही उसे मापा जा सकता है। वे पिता के द्वारा हमें बचाने के लिए भेजे गये थे। उन्होंने उस कार्य को प्रेम से पूरा किया। अपना जीवन हमें अर्पित किया। हम एक माँ की कल्पना कर सकते हैं जो अपने बच्चों के लिए अपना जीवन देती है। कठिन से कठिन समय में भी उनका साथ देती है, उसी तरह येसु हमें प्यार करते हैं।

हम प्रत्येक के लिए आँसू

संत पापा ने संत लूकस रचित सुसमाचार पर गौर करते हुए येसु के प्रेम पर प्रकाश डाला, जिसमें येसु यह याद करते हुए आँसू बहाते हैं कि येरूसालेम को एक मुर्गी के समान पंख फैलाकर अपने बच्चों की तरह एकत्रित करने की कोशिश की गयी किन्तु उसके इसका विरोध किया।

संत पापा ने कहा, "ख्रीस्त का प्रेम उन्हें आँसू बहाने के लिए मजबूर किया जो हम सभी के लिए रोते हैं। उनके इस रोने में हम उनके स्नेह को पाते हैं। येसु येरूसालेम की निंदा कर सकते थे उसे भला-बुरा कह सकते थे किन्तु वे शोक मनाते हैं कि उसने अपने आपको प्रेम किये जाने से इन्कार किया। यही येसु में ईश्वर का कोमल प्रेम है जिसको संत पौलुस ने अच्छी तरह समझा था। यदि हम येसु में ईश्वर के कोमल प्रेम को नहीं समझ सकते हैं तब हम ख्रीस्त के प्रेम को कभी नहीं समझ पायेंगे। यह धीरज से प्रतीक्षा करने वाला प्रेम है। ऐसा प्रेम जिसमें उन्होंने अपने विश्वासघाती यूदस को भी मित्र कहा और अंत तक अपने को अर्पित किया। वे सबसे बड़े पापी को भी प्यार करते हैं। वे लाजरूस की कब्र के पास भी रो पड़े थे।

प्रेम आँसू में प्रकट हुआ

अंत में संत पापा ने विश्वासियों से आग्रह किया कि हम अपने आपसे पूछें कि येसु यदि मेरे लिए रोते हैं तब भी क्या मैं दूसरा रास्ता चुनता हूँ? ईश्वर का प्रेम येसु के आँसू में प्रकट हुआ। यही कारण है कि संत पौलुस येसु के प्रेम में सुदृढ़ थे और जिसके कारण कोई भी चीज उन्हें उनके प्रेम से अलग नहीं कर सकी।

31 October 2019, 16:58
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