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ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

प्रभु ही चट्टान हैं जिनपर हमें स्थापित होना है

कथनी एवं करनी, बालू एवं चट्टान, उच्च एवं नीच। वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने इन्हीं शब्दों पर प्रवचन केंद्रित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 दिसम्बर 2018 (रेई)-बृहस्पतिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में संत पापा ने संत मती रचित सुसमाचार एवं नबी इसायस के ग्रंथ से लिए गये पाठों पर चिंतन किया जहाँ उन्होंने तीन विपरीतार्थक शब्दों पर प्रकाश डाला।

कथनी और करनी  

पहला, "कथनी और करनी",यह ख्रीस्तीय जीवन के दो अलग-अलग मार्गों को दिखलाती है। "कहने" का अर्थ है विश्वास करना किन्तु आधा। संत पापा ने कहा, मैं कह सकता हूँ कि मैं ख्रीस्तीय हूँ किन्तु ख्रीस्तियों की तरह नहीं जीता। संत पापा ने कहा कि इसे ख्रीस्तीय होने का मेकअप (सिंगार) कहा जा सकता है। बोलना और नहीं करना एक छल के समान है। येसु का प्रस्ताव हमेशा ठोस होता है। जब भी कोई उनके पास आता तथा उनसे सलाह लेता है वे उन्हें हमेशा ठोस उत्तर देते हैं क्योंकि दया के कार्य ठोस होते हैं।   

बालू और चट्टान

दूसरे विपरीताकर्थक शब्द हैं, बालू और चट्टान जो दो अलग दिशाओं की ओर संकेत करते हैं। बालू ठोस नहीं होता, यह उन लोगों की ओर इंगित करता है जो मेकअप के ख्रीस्तीय हैं और जिनका जीवन नींव के बिना स्थापित है जबकि चट्टान प्रभु का प्रतीक हैं। जो लोग प्रभु पर भरोसा रखते हैं वे ही स्थित खड़े रह सकते हैं जबकि कई बार वे प्रकट रूप से दिखाई नहीं पड़ते। वे कथनी, अभिमान, घमंड तथा जीवन की अल्पकालिक ताकतों पर भरोसा नहीं करते बल्कि प्रभु पर भरोसा करते हैं। ख्रीस्तीय जीवन का ठोस होना, हमें आगे बढ़ने एवं ईश्वर रूपी चट्टान पर अपने जीवन की नींव स्थापित करने हेतु प्रेरित करता है।  

उच्च और नीच

तीसरे विलोम शब्द हैं  उच्च एवं नीच। नबी इसायस के ग्रंथ से लिए गये पाठ पर गौर करते हुए संत पापा ने इस बात पर बल दिया कि प्रभु घमंडियों का घमंड चूर करते तथा उनके गौरवशाली शहरों को नीचे धरती पर गिरा देते हैं जहाँ शोषित एवं गरीब  लोग रहते हैं।  

नबी के इस संदेश के समान ही माता मरियम ने भजन गाया था। प्रभु दीनों को महान बनाता, जो अपने जीवन को सच्चे रूप से जीते हैं। वे घमंडियों का घमंड चूर करते क्योंकि उनका जीवन घमंड एवं अभिमान पर स्थापित होता है जो अधिक दिन तक नहीं टिकता।

आगमन के लिए प्रश्न

आगमन के इस काल में संत पापा ने कहा कि हमें कुछ खास सवालों से मदद मिल सकती है। क्या मैं केवल कथनी का ख्रीस्तीय हूँ? क्या मैंने अपना जीवन ईश्वर की चट्टान पर स्थापित किया है अथवा क्या मैंने उसे घमंड रूपी बालू पर निर्मित किया है? क्या मैं विनम्र हूँ और अहंकार से दूर रहता हूँ और प्रभु की सेवा करता हूँ?

06 December 2018, 15:47
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