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संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

हम कहां से चुने गये हैं उसे हमेशा याद रखें, संत पापा

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने मत्ती के बुलावे पर चिंतन किया तथा कहा कि वह ईश्वर द्वारा चुने तथा प्रेरित नियुक्त किये गये थे।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

प्रवचन में संत पापा ने कहा कि मत्ती चुंगी जमा करता था जिसके कारण वह एक भ्रष्ट व्यक्ति समझा जाता था क्योंकि उसने पैसों के लिए अपने देशवासियों को धोखा दिया था। अतः प्रेरित के रूप में उसका चुनाव येसु के लिए सवाल खड़ा कर दिया कि उन्हें लोगों का चुनाव करने का ज्ञान नहीं है क्योंकि उन्होंने मत्ती के साथ-साथ कई अन्य लोगों का चुनाव, तिरस्कृत लोगों के बीच में से किया था। 

संत पापा ने कहा कि कलीसिया के जीवन में कई ख्रीस्तीय एवं संत हैं जो सबसे निम्न स्तर से चुने गये थे। उन्होंने कहा कि हमें सदैव इस बात को अपने मन में रखना चाहिए कि हम चुने गये हैं, हम ख्रीस्तीय के रूप में बुलाये गये हैं तथा हमें जीवन भर अपनी बुलाहट पर दृढ़ रहना है। अपने पापों की याद करना है, जिनको प्रभु ने अपनी दया से मिटा दिया और हमें अपना शिष्य बनने के लिए चुना है।   

मत्ती ने अपनी असलियत को नहीं भूलाया

संत पापा ने मत्ती के बुलावे पर चिंतन करते हुए कहा कि प्रभु ने जब मत्ती को बुलाया, तब उसने अपने विलासितापूर्ण परिधान को धारण नहीं किया और न ही दूसरों से कहा कि मैं प्रेरितों का नेता हूँ बल्कि उसने जीवन भर सुसमाचार के लिए कार्य किया।

संत पापा ने कहा कि जब एक शिष्य अपनी असलियत को भूल जाता तथा उसे व्यवसाय समझने लगता है, तब वह प्रभु से दूर हो जाता तथा खुद अधिकारी बन जाता है। वह अपने कार्यों को भले ही अच्छी तरह कर लेता हो किन्तु वह शिष्य नहीं रह जाता। वह येसु का प्रचार नहीं कर सकता और अंत में व्यापारी बन जाता है क्योंकि उसने अपनी असलियत को भूला दिया है। अतः संत पापा ने कहा कि अपनी असलियत को याद रखना महत्वपूर्ण है। यह स्मृति एक शिष्य अथवा एक ख्रीस्तीय के जीवन में हमेशा बनी रहनी चाहिए।

हम उदार होना भूल जाते हैं किन्तु प्रभु नहीं

उन्होंने कहा कि अपने आप को देखने के बदले हम दूसरों की ओर देखने तथा उनके पापों पर चर्चा करने लगते हैं। इस तरह की आदत हमें बीमार बना देती है। हमारे लिए अच्छा यही है कि हम अपने आप को झांककर देखें तथा याद करें कि प्रभु ने मुझे चुनाकर यहाँ लाया है। जब प्रभु ने हमें चुना तो उन्होंने किसी बड़े काम के लिए चुना है। ख्रीस्तीय होना बड़ी और सुन्दर बात है। फिर भी हम प्रभु से दूर चले जाते तथा उनसे दूर ही रहना पसंद करते हैं। हममें उदारता की कमी होती है अतः हम प्रभु से दूर रहना चाहते हैं किन्तु प्रभु हमारा इंतजार करते हैं।    

सहिंता के पंडितों का ठोकर

प्रभु का बुलावा पाकर मत्ती ने अपने प्रियजन, धन-दौलत और सब कुछ छोड़कर उनका अनुसरण किया। उन्होंने अपने मित्रों को भोज के लिए निमंत्रण दिया ताकि प्रभु के साथ उत्सव मना सकें। इस तरह प्रभु एक ऐसे व्यक्ति के साथ मेज पर बैठे जो उस समय के समाज में सबसे तुच्छ व्यक्ति समझा जाता था।

इसे देखकर कानून के पंडितों को बुरा लगा। उन्होंने शिष्यों को बुलाकर कहा, "तुम्हारे गुरू क्यों ऐसे लोगों के साथ खाते-पीते हैं जो अशुद्ध हैं। अशुद्ध लोगों के साथ खाने-पीने से आप भी अशुद्ध हो जायेंगे। तब येसु कहते हैं, जा कर सीख लो कि इसका क्या अर्थ है-मैं बलिदान नहीं, बल्कि दया चाहता हूँ। ईश्वर की दया सभी को खोजती तथा क्षमा प्रदान करती है।

करुणा का रहस्य है ईश्वर का हृदय

वे लोग जो नाराज थे येसु ने उनसे कहा कि ''निरोगों को नहीं, रोगियों को वैद्य की जरूरत होती है।" प्रभु की करुणा को समझें, यह एक रहस्य है, करुणा ईश्वर के हृदय का एक सुन्दरतम रहस्य है। यदि हम ईश्वर के हृदय तक पहुँचना चाहते हैं तो करुणा के पथ को अपनायें तथा उसके लिए उदार बनें।  

 

21 September 2018, 16:42
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