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ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

शहीदों की तरह हम ईश्वर से सांत्वना प्राप्त करें

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में 11 दिसम्बर को, ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने ईश्वर की सांत्वना एवं आज के शहीदों पर प्रकाश डाला।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 11 दिसम्बर 2018 (रेई)˸ संत पापा ने कहा, "प्रभु हमें कोमलता के साथ सांत्वना प्रदान करते हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह एक माँ अपने बच्चे को दुलारती है जब वह रोता है।"

मंगलवार को संत पापा ने प्रवचन में विश्वासियों को सलाह दी कि वे ईश्वर में सांत्वना प्राप्त करें और उनसे दूर न जाएँ।  

सांत्वना से इन्कार न करें

संत पापा ने प्रवचन में नबी इसायस के ग्रंथ से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जिसमें ईश्वर अपनी प्रजा को सांत्वना देना चाहते हैं। ''मेरी प्रजा को सान्त्वना दो, सान्त्वना दो।" ईश्वर ने उनके पापों को मिटा दिया अतः यह मुक्ति की सांत्वना है। संत पापा ने कहा कि हमारे लिए खुश खबरी है कि हम बचा लिए गये हैं। पुनर्जीवित ख्रीस्त ने चालीस दिनों तक अपने शिष्यों को सांत्वना प्रदान किया। संत पापा ने गौर किया कि हम उनकी सांत्वना को स्वीकार करना नहीं चाहते एवं उनसे अपने को दूर रखने का प्रयास करते हैं। मानो कि हम समस्याओं के बीच सुरक्षित हैं। हम निराशा, समस्याओं एवं हार की जोखिम उठाते हैं यह पास्का की सुबह भी दिखाई पड़ी जब शिष्य येसु का स्पर्श करने एवं उनके जी उठने की बात पर विश्वास करने के लिए उन्हें देखने गये क्योंकि वे दूसरी हार से भयभीत थे।  

कोमलता, जिसको आधुनिक शब्दकोश से मिटा दिया गया है

संत पापा ने कहा, "हम आध्यात्मिक निराशावाद से आसक्त हैं।" संत पापा ने आमदर्शन समारोह में बच्चों को आशीर्वाद दिलाने, उनके पास लाने की याद करते हुए कहा कि उस समय कुछ बच्चे उन्हें देखकर रोने लगते हैं क्योंकि वे उनके सफेद वस्त्र देखकर उन्हें डॉक्टर या नर्स समझने लगते हैं। वे नहीं चाहते हैं कि उन्हें फिर से टीका मिले। संत पापा ने कहा कि हम भी प्रभु से इसी तरह व्यवहार करते हैं किन्तु प्रभु कहते हैं, मेरी प्रजा को सांत्वना दो।"  

प्रभु किस तरह हमें सांत्वना प्रदान करते हैं? उन्होंने कहा कि ईश्वर हमें कोमलता के साथ सांत्वना देते हैं। यह एक ऐसी भाषा है जो लोगों को उन सभी पापों से मुक्त किया गया है जो हमें प्रभु से दूर करते हैं-याजकों एवं ख्रीस्तियों के पाप जो परिवर्तन करना नहीं चाहते और गुनगुने बने रहते हैं।

नबी इसायस कहते हैं "देखो प्रभु-ईश्वर सामर्थ्य के साथ आ रहे हैं। वे सब कुछ अपने अधीन कर लेंगे। वे अपना पुरस्कार अपने साथ ला रहे हैं और उनका विजयोपहार भी उसके साथ है।" गड़ेरिया जो अपने झुण्ड की रखवाली करता, उन्हें अपनी बाहों में उठा लेता तथा उन्हें उनकी माता के पास ले चलता है ठीक इसी तरह प्रभु बड़े स्नेह से हमें सांत्वना प्रदान करते हैं। संत पापा ने कहा कि आज कोमलता के इस शब्द को इस दुनिया के शब्दकोश से हटा दिया गया है।  

शहादत के समय सांत्वना

प्रभु हमें सांत्वना पाने हेतु निमंत्रण देते हैं जो हमें ख्रीस्त जयन्ती की तैयारी करने में मदद देता है। संत पापा ने कहा कि आज की आरम्भिक प्रार्थना में हमने निवेदन किया कि प्रभु हमें सच्चे आनन्द की कृपा से भर दे।

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तियों को सांत्वना से जीने का आदी होना चाहिए, चाहे वे बुरी परिस्थिति में ही क्यों न हों। जब शहीदों को कोलोसेयुम लिया जाता था तब वे वहाँ भजन गाते हुए प्रवेश करते थे। संत पापा ने आधुनिक शहीदों की याद करते हुए लीबिया के कोप्टिक ख्रीस्तियों का उदाहरण दिया जिनका कत्ल कर दिया गया, फिर भी वे येसु का नाम लेते हुए मर गये।

संत पापा ने कहा कि शहादत की घड़ी भी सांत्वना का एहसास आनन्द प्रदान करता है। ख्रीस्तियों द्वारा सांत्वना महसूस करने की आदत आशावाद के समान नहीं है। आशावाद कुछ और है। सांत्वना का एक सकारात्मक आधार है। सकारात्मक लोगों में एक कांति होती है जो सांत्वना से आती है।

प्रभु स्नेह से हमारा द्वार खटखटाते हैं

संत पापा ने कहा कि जब हम दुःख सहते हैं तब हम सांत्वना महसूस नहीं कर सकते हैं किन्तु एक ख्रीस्तीय आंतरिक शांति कभी नहीं खोता है क्योंकि यह प्रभु की ओर से एक कृपा है जिसे वे सभी लोगों को प्रदान करते हैं। अतः संत पापा ने कहा कि ख्रीस्त जयन्ती की ओर अग्रसर करने वाले इन सप्ताहों में हम प्रभु से कृपा की याचना करें ताकि हम उनके द्वारा सांत्वना दिये जाने से नहीं डरेंगे।

संत मती रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर पुनः प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा कि हमें प्रार्थना करना चाहिए ताकि हम अपने आपको क्रिसमस के लिए तैयार कर सकें, हृदय की शांति, उनकी उपस्थिति की शांति एवं उनके स्नेह को अनुभव कर सकें। हम कह सकते हैं कि मैं एक पापी हूँ। आज का सुसमाचार बतलाता है कि प्रभु हमें एक चरवाहे की तरह सांत्वना देते हैं जो एक भेड़ के खो जाने पर उसकी खोज में जाता है। प्रभु हम प्रत्येक से उसी तरह प्रेम करते हैं चाहे मैं शांति से इंकार करता, उनकी सांत्वना से दूर भागता किन्तु वे द्वार के पास हैं। संत पापा ने विश्वासियों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रभु दस्तक दे रहे हैं ताकि हम अपना हृदय द्वार खोलें और उन्हें सांत्वना प्रदान करने दें उनकी शांति को अपने अंदर आने दें।

11 December 2018, 17:02
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