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ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्राँसिस ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

औपचारिकता के गुलाम होते हैं उदास ख्रीस्तीय, संत पापा

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में मंगलवार 28 जनवरी को संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए विश्वासियों से आग्रह किया कि वे ईश्वर के साथ मुलाकात करने के आनन्द को व्यक्त करने में लज्जा महसूस न करें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 28 जनवरी 2020 (रेई)˸ "प्रभु के साथ मुलाकात करने में लज्जा महसूस न करें, उस उत्सव से अपने को दूर न करें जिसको लोग ईश्वर के करीब होने पर मनाते हैं।" यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

संत पापा ने कहा, "सुसमाचार तभी आगे बढ़ सकता है जब सुसमाचार प्रचारक अपने सम्पूर्ण जीवन एवं खुशी से इसका प्रचार करता है। यह आनन्द परिवार में मिलजुल कर रहने के द्वारा उत्पन्न होता है।" उन्होंने कहा, "यह ख्रीस्तीय होने का आनन्द है।"

संत पापा ने सामुएल के ग्रंथ से लिये गये पाठ पर चिंतन किया, जहाँ दाऊद एवं इस्राएलियों का जिक्र किया गया है जो प्रभु की मंजूषा के येरूसालेम लौटाये जाने पर खुशी मनाते हैं।  

प्रभु के निकट होने पर लोगों की खुशी

संत पापा ने याद किया कि प्रभु की मंजूषा का अपहरण कर लिया गया था जिसको वापस लाये जाने पर एक बड़ा उत्सव मनाया गया। लोगों ने महसूस किया कि ईश्वर उनके नजदीक हैं और इसके लिए खुशी मनायी। राजा दाऊद उनके साथ थे उन्होंने शोभायात्रा की अगुवाई की तथा प्रभु को बलिदान अर्पित किया। उन्होंने लोगों के साथ पूरी शक्ति से जयघोष किया, नृत्य किया और गाना गाया।

संत पापा ने कहा कि ईश प्रजा आनन्दित थी क्योंकि ईश्वर उनके साथ थे। दाऊद ईश्वर के सामने नाचे। वे शर्म किये बिना अपनी खुशी व्यक्त किये। यह प्रभु के साथ मुलाकात का आध्यात्मिक आनन्द है। राजा दाऊद नहीं सोचता है कि वह एक राजा है और उन्हें लोगों से जरा हट के रहना चाहिए। दाऊद प्रभु को प्यार करते हैं अतः मंजूषा को वापस लाया जाना उसे आनन्द प्रदान करता है इसलिए वे सभी लोगों के साथ अपनी खुशी का इजहार करते हैं।

संत पापा ने कहा कि प्रभु का हमारे करीब होना, हमें भी खुशी प्रदान करती है जिसके कारण पल्लियों एवं गाँवों के लोग खुशी मनाते हैं। इस्राएल के इतिहास में एक दूसरा उदाहरण है जब संहिता की पुस्तक प्राप्त की जाती है, नबी नहेमिया लोगों के साथ खुशी से रो पड़े थे और खुशी मनाया था।

आनंद की सहजता का तिरस्कार

सामुएल के ग्रंथ में आगे दाऊद की घर वापसी का जिक्र किया गया है। साऊल की पुत्री मीकल दाऊद का तिरस्कार करती है। राजा को नाचते हुए देखकर वह उनका अपमान करते हुए कहती है, "आज इस्राएल के राजा ने कितना यश कमाया कि अपने सेवकों की दासियों के सामने निकम्मों की तरह नंगे बदन नाचते रहे।''

संत पापा ने कहा कि यह प्रभु के साथ सहज आनन्द के लिए, उनकी धार्मिकता का तिरस्कार है। दाऊद ने मीकल से कहा, "प्रभु ने तुम्हारे पिता और तुम्हारे सारे घराने की अपेक्षा मुझे चुना है और मुझे प्रभु की प्रजा, इस्राएल का शासक बनाया है। मैं उसी प्रभु के सामने नाचता रहा और नाचूँगा और बाईबिल बतलाता है कि मीकल की कोई संतान नहीं हुई। प्रभु ने उसे दण्ड दिया।" संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय जो खुश नहीं है वह कोई फल नहीं ला सकता। यदि हृदय में खुशी न हो तो फल नहीं लाया जा सकता।"  

प्रसन्नचित सुसमाचार प्रचारकों को आगे बढ़ना

संत पापा ने गौर किया कि पर्व को केवल आध्यात्मिक रूप से प्रकट नहीं किया जा सकता बल्कि बांटकर व्यक्त किया जा सकता है। दाऊद ने उस दिन रोटी, भुना हुआ मांस और किसमिस पर आशीष दी और उसे लोगों को बांटा। ताकि सभी लोग अपने-अपने घरों में खुशी मना सकें। ईश वचन का उत्सव मनाने में शर्म नहीं आनी चाहिए।

संत पापा ने कहा कि कलीसिया आगे नहीं बढ़ सकती है और नीरस प्रचारक के द्वारा सुसमाचार का प्रचार नहीं हो सकता। सुसमाचार का प्रचार तभी हो सकता जब ईश वचन को खुशी से स्वीकार किया जाए, प्रसन्नता के साथ आगे बढ़ा जाए, बिना शर्म प्रभु के लिए आनन्द मनाया जाए और मीकल की तरह तिरस्कार नहीं और न ही औपचारिकता की गुलामी की जाए।

28 January 2020, 16:20
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