खोज

Cookie Policy
The portal Vatican News uses technical or similar cookies to make navigation easier and guarantee the use of the services. Furthermore, technical and analysis cookies from third parties may be used. If you want to know more click here. By closing this banner you consent to the use of cookies.
I AGREE
हिन्दी क्रार्यक्रम
सूची पोडकास्ट
त्रोपेया का वृद्धाश्रम त्रोपेया का वृद्धाश्रम  आशा की कहानियाँ

बुजुर्ग अपने समृद्ध अनुभवों के साथ नई पीढ़ी को बहुत कुछ दे सकते हैं

इटली के त्रोपेया स्थित वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की सेवा को धर्मबहनें अपना सौभाग्य मानती हैं क्योंकि उनके सम्पर्क में रहकर उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। आश्रम में इस समय 53 बुजुर्ग हैं जो दुनिया के कई देशों से आये हैं।

सिस्टर उषा मनोरमा तिरकी & सिस्टर सुमती मिंज

दुकानदार जब एक ग्राहक से बार-बार वहाँ से चले जाने के लिए कह रहा था, तो पुष्पा (परिवर्तित नाम) को समझ नहीं आया कि एक कांपते हाथों और लाचार दिखनेवाले बुजुर्ग को क्यों बेरहमी से भेजा जा रहा है। यह रोम का एक मोबाईल दुकान था जिसमें नये मोबाईल के साथ-साथ, बिगड़े मोबाईलों की मरम्मत, स्क्रीन प्लेट, मोबाईल कवर आदि की सुविधाएँ उपलब्ध थीं।

दुकानदार व्यस्त था क्योंकि दुकान में ग्राहकों की भीड़ थी। इसी भीड़ में एक बूढ़ा भी था जिसका नाम था जोसेफ (परिवर्तित नाम)। वह लम्बे समय से दुकान में था और अपना मोबाईल ठीक कराने के लिए दुकानदार से बार-बार आग्रह कर रहा था। दुकानदार परेशान होकर उसे चले जाने के लिए कह रहा था।

जोसेफ अपने घर में अकेला था। उसके पास दो मोबाईल थे जिनसे वह लोगों से सम्पर्क करना चाहता था लेकिन कर नहीं पा रहा था क्योंकि दूसरे पक्ष से आवाज नहीं सुनाई पड़ती थी। वह पहले भी कई बार दुकान आ चुका था लेकिन उसकी समस्या हल नहीं हुई थी।

पुष्पा (परिवर्तित नाम) को बुजुर्ग की समस्या समझने में देर नहीं लगी। उसे यह जानकर बड़ी दया आई कि जोसेफ के मोबाईल खराब नहीं थे बल्कि वह अपने ही मोबाईल पर डायल कर रहा था और रिंग होने पर खुद रिसीव करता था, लेकिन चूँकि वह खुद का ही मोबाईल था, दूसरी ओर से कोई जवाब नहीं मिलता था।

इसी बात को समझाने की कोशिश करते-करते दुकानदार थक चुका था। जबकि जोसेफ को लग रहा था कि मोबाईल की खराबी के कारण वह अपने मोबाईल पर उत्तर नहीं सुन पाता है।

अकेलापन की समस्या

इस घटना ने पुष्पा को सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि आज बड़े वैज्ञानिक अविष्कार एवं हर प्रकार की सुविधाओं के बावजूद लोग किस तरह अकेलेपन से ग्रसित हैं। और अपने इस अकेलेपन को दूर करने के लिए तरह-तरह के उपाय अपनाते हैं। आज बिरले ही किसी के पास मोबाईल न हो क्योंकि मोबाईल से ही बहुत सारे काम करने पड़ते हैं। जैसे- किसी दूर के व्यक्ति से सम्पर्क करना, बैंक का काम, बुकिंग करना हो या कोई चीज मंगाना हो, चाहे पढ़ाई लिखाई हो या मनोरंजन, सब में मोबाईल की आवश्यकता पड़ती है। इसीलिए लोग हर समय मोबाईल अपने साथ लेकर चलते हैं। और यदि कभी मोबाईल खो जाय या घर में छूट जाए तो बड़ी बेचैनी होती है।

इसके बावजूद दो मोबाईलों के रहते जोसेफ निराश और परेशान था, क्योंकि उसकी आवश्यकताएँ अधूरी थीं। उसे इस बुढ़ापे की आवस्था में खालीपन महसूस हो रहा था। परिवार की कमी, पोते-पोतियों से दूरी, अपने मित्रों के साथ पुरानी यादों पर चर्चा नहीं कर पाना, उसके जीवन को नीरस और बोझिल बना दिया था। उसके लिए मानो सब कुछ उलझा हुआ था।

जोसेफ अकेला नहीं है बल्कि आज कई बुजूर्ग हैं जिन्हें इस तरह की दर्दभरी स्थित का सामना करना पड़ता है। ऐसे बुजुर्गों के लिए एक प्रार्थना है जो उन्हें सांत्वना दे सकती है, “प्रभु! अब मैं बूढ़ा हो चला, मेरे केश पक गये; फिर भी, मेरा परित्याग न कर, जिससे मैं इस पीढ़ी के लिए तेरे सामर्थ्य का, भावी पीढ़ियों के लिए तेरे पराक्रम का बखान करूँगा।” (स्तोत्र 71:18)

पुष्पा सोचने लगी कि ऐसे बुजुर्गों को किस तरह मदद दी जाए, जिससे कि वे इस आवस्था में भी खुश रह सकें और समाज को अपना योगदान दे सकें?

संत पापा फ्राँसिस ने बुजुर्गों को अकेला छोड़ दिये जाने की संस्कृति का विरोध किया है। वे कहते हैं, “कितनी बार बुजुर्गों को त्यागने की भावना के साथ अकेला छोड़ दिया जाता है, जो वास्तव में वास्तविक और छिपी हुई इच्छामृत्यु है! यह एक फेंक देनेवाली संस्कृति का परिणाम है जो हमारी दुनिया के लिए बहुत हानिकारक है। हम सभी इस जहरीली, फेंक देनेवाली संस्कृति का विरोध करने के लिए आमंत्रित किये जाते हैं!”

बुजुर्गों की स्थिति में सुधार लाने की ही कोशिश में पोप फ्राँसिस ने जुलाई के चौथे रविवार को हर साल, येसु के नाना-नानी संत अन्ना और संत ज्वोकिम के पर्व (26 जुलाई) के नजदीक विश्व दादा-दादी एवं बुजुर्ग दिवस मनाये जाने का आह्वान किया है।

त्रोपेया वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ सिस्टर सुमती मिंज
त्रोपेया वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ सिस्टर सुमती मिंज

त्रोपेया स्थित वृद्धाश्रम के बुजुर्ग

इटली के त्रोपेया स्थित वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की सेवा को धर्मबहनें अपना सौभाग्य मानती हैं क्योंकि उनके सम्पर्क में रहकर उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। आश्रम में इस समय 53 बुजुर्ग हैं जो दुनिया के कई देशों से आये हैं।

वृद्धाश्रम में संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ की चार धर्मबहनें सेवा दे रही हैं। उन्हीं में से एक हैं सिस्टर सुमती मिंज। उन्होंने वाटिकन न्यूज को बतलाया कि वे किस तरह उनकी मदद करती हैं।   

“हम रिसेप्शन, किचन और लॉन्ड्री में अपनी सेवाएँ देती हैं और बुजूर्गों की मदद करती हैं, खासकर, हम उनकी आध्यात्मिक चिंता करती हैं।” यहाँ कुल 53 मरीज हैं और दुनिया के विभिन्न देशों से आए हैं। उनके पास जीवन का समृद्ध अनुभव है जो वृद्धाश्रम में काम करनेवालों को प्रेरित और प्रोत्साहित करता है।

वृद्धाश्रम में सबसे बुजुर्ग श्रीमती राधेगोंडा हैं जो 105 वर्ष की हैं। अपना अनुभव साझा करते हुए वे इस बात पर जोर देती हैं कि “लोग भूल जाएंगे कि आपने क्या किया, लेकिन वे यह कभी नहीं भूलेंगे कि आपने उन्हें कैसा महसूस कराया।” सिस्टर सुमती बतलाती हैं कि उनकी आध्यात्मिकता बहुत गहरी है और वे प्रभु पर भरोसा रखकर जीवन में आगे बढ़ रही हैं।

इब्रानियों 13: 5बी का हवाला देते हुए श्रीमती राधेगोंडा कहती हैं, “येसु ने कहा है, ‘मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूँगा, मैं तुम्हें कभी नहीं त्यागूँगा।’"

संतीना 95 साल की हैं, वे कहती हैं, “हर पल, हर साँस जो हम लेते हैं, वह ईश्वर के प्रचुर प्रेम का प्रमाण है। संघर्ष, अकेलेपन और कठिनाइयों के समय में भी ईश्वर का प्रेम दृढ़ रहता है, दिलासा और प्रोत्साहन प्रदान करता है। वे हमें फुसफुसाते हैं कि हम जैसे हैं वैसे ही उनके लिए प्रिय हैं। हम दया और कृपा के पात्र हैं। ईश्वर हमें कभी नहीं छोड़ते।”

संत अन्ना की धर्मबहनें

सिस्टर सुमती मिंज एवं वृद्धाश्रम में सेवारत अन्य लोगों के लिए सुखद बात यही है कि अपने समृद्ध अनुभवों के द्वारा आश्रम के बुजुर्ग उन्हें ईश्वर के करीब होने का एहसास दिलाते हैं।

त्रोपेया के वृद्धाश्रम में अन्य लोगों के साथ, भारत से इटली आयीं संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ राँची की चार धर्मबहनें : सिस्टर सिलबिया टोप्पो, सिस्टर सुजाता कुजूर, सिस्टर जीवन ज्योति टोप्पो और सिस्टर सुमती मिंज अपनी निःस्वार्थ सेवाएँ दे रही हैं।

त्रोपेया के वृद्धाश्रम में सेवा देनेवाली संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ की धर्मबहनें
त्रोपेया के वृद्धाश्रम में सेवा देनेवाली संत अन्ना की पुत्रियों के धर्मसंघ की धर्मबहनें

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

28 जनवरी 2025, 16:37
Prev
April 2025
SuMoTuWeThFrSa
  12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930   
Next
May 2025
SuMoTuWeThFrSa
    123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031