खोज

Cookie Policy
The portal Vatican News uses technical or similar cookies to make navigation easier and guarantee the use of the services. Furthermore, technical and analysis cookies from third parties may be used. If you want to know more click here. By closing this banner you consent to the use of cookies.
I AGREE
प्रातः वंदना लौटीन
सूची पोडकास्ट
2024.10.17 गाँव में गरीब महिलाओं से बात करती धर्मबहन 2024.10.17 गाँव में गरीब महिलाओं से बात करती धर्मबहन 

भारत : मुसुनुरु में गरीबी उन्मूलन

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस पर, धर्मबहनें भारत के आंध्र प्रदेश राज्य के एक गांव मुसुनुरु की गरीबी से ग्रस्त इतिहास को बदलने का प्रयास कर रही हैं।

सिस्टर फ्लोरिना जोसेफ एससीएन

17 अक्टूबर को अन्तर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाया जाता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने 1992 में घोषित किया था।

पोप फ्राँसिस ने एक्स पर एक पोस्ट में विश्व दिवस को चिह्नित किया: "हमें गरीबों को नहीं भूलना चाहिए। आइए, हम एक ऐसे विश्व का सपना देखें जिसमें पानी, रोटी, काम, दवा, जमीन और घर हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध हों।"

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के अनुसार, "गरीबी अपरिहार्य नहीं है। यह समाज और सरकारों द्वारा किए गए निर्णयों का प्रत्यक्ष परिणाम है - या वे निर्णय लेने में विफल हैं।"

इस दिन को चिह्नित करने के लिए, भारत के दक्षिणी आंध्र प्रदेश में मुसुनुरु गाँव, गरीबी उन्मूलन की अपनी यात्रा साझा कर रहा है।

एक समय में, मुसुनुरु गरीबी से बुरी तरह प्रभावित था और अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह कृषि पर निर्भर था, जिसके कारण स्वच्छता, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और समग्र विकास में चुनौतियाँ थीं।

जलवायु परिवर्तन ने भी कृषि उपज को तबाह कर दिया है, जिसका सीधा असर स्थानीय लोगों की वित्तीय स्थिरता पर पड़ा है।

प्रणालीगत परिवर्तन

हालाँकि, 2009 के बाद से, सिस्टर्स ऑफ चैरिटी ऑफ नाज़रेथ (एससीएन) के आगमन और प्रेरणालय सामाजिक विकास केंद्र (पीएसडीसी) के माध्यम से, मुसुनुरु में एक प्रणालीगत परिवर्तन हो रहा है।

स्वच्छता चुनौतियों, खास तौर पर मुसुनुरु में शौचालयों की कमी को दूर करने के लिए पी.एस.डी.सी. टीम ने “स्वच्छ भारत” अभियान के साथ हाथ मिलाया है। नुक्कड़ नाटकों, सर्वेक्षणों और जागरूकता लाने के माध्यम से, उन्होंने ग्रामीणों को शौचालय बनवाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके परिणामस्वरूप धर्मबहनों की प्रेरिताई वाले 16 गाँवों में 267 शौचालयों का निर्माण हुआ है।

स्वच्छता के अलावा, शिक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। कृषि श्रम की मांग के कारण, मुसुनुरु में बड़ी संख्या में बच्चे प्राथमिक विद्यालय से बाहर हो गए।

इसे पहचानते हुए, विकास केंद्र ने कौशल और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए, खास तौर पर महिलाओं के लिए, जिसमें अकादमिक शिक्षा भी शामिल है। आज, प्रशिक्षु और प्रशिक्षक दोनों ही स्थानीय लोग हैं जो उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित हैं।

धार्मिक बहनों ने सिलाई, कंप्यूटर कौशल और आधुनिक शिक्षा में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। इसके अतिरिक्त, युवा लड़कियों को छात्रावास की सुविधा भी मिलती है, जिससे वे सुरक्षित और सही वातावरण में अपनी शिक्षा जारी रख सकती हैं और कौशल हासिल कर सकती हैं।

डेंगू और वायरल महामारी के दौरान भी बहनों के स्वास्थ्य सेवा के प्रयासों को उल्लेखनीय माना गया है। संकट के समय में, वे स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर घर-घर जाकर सर्वेक्षण करती हैं और समय पर हस्तक्षेप करती हैं जिससे कई लोगों की जान बच जाती है। हाल के वर्षों में, पर्यावरण के अनुकूल पहल भी शुरू की गई हैं। पीएसडीसी ग्रामीणों को टिकाऊ खेती की तकनीकों के बारे में शिक्षित कर रहा है, जिसमें जैविक खाद बनाना और पौधे वितरित करना शामिल है।

इस वर्ष उन्होंने लोगों को 147 पौधे वितरित किए हैं।

एक विकासशील समुदाय बनना

आज, मुसुनुरु गरीबी से त्रस्त तालुका से एक विकासशील समुदाय में परिवर्तित हो रहा है।

धर्मबहनों के निरंतर प्रयास, ग्रामीणों के सहयोग और सरकारी मदद के साथ, वास्तव में मुसुनुरु को दीर्घकालिक समृद्धि की ओर अग्रसर किया जा रहा है।

 

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

17 अक्तूबर 2024, 16:56
Prev
April 2025
SuMoTuWeThFrSa
  12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930   
Next
May 2025
SuMoTuWeThFrSa
    123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031