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2024.10.25 न्याय और शांति के लिए धार्मिक मंच की 18वीं राष्ट्रीय सभा इंदौर में आयोजित 2024.10.25 न्याय और शांति के लिए धार्मिक मंच की 18वीं राष्ट्रीय सभा इंदौर में आयोजित   (forum-of-religious-for-justice-and-peace-indore-india)

भारत : धर्मसंघियों ने समग्र पारिस्थितिकी को बढ़ावा देने की शपथ ली

न्याय और शांति के लिए काथलिक धर्मसंघी मंच के 18वें सम्मेलन में, सदस्यों ने सरल जीवनशैली अपनाने, गरीबों के करीब रहने और अनावश्यक उपभोग एवं अपव्यय से बचने का निर्णय लिया।

वाटिकन न्यूज

न्याय और शांति के लिए धर्मसंघी मंच के सदस्यों ने इंदौर में अपनी 18वीं राष्ट्रीय बैठक (18-20 अक्टूबर) के दौरान टिकाऊ जीवनशैली अपनाने और पर्यावरण एवं मानवीय चिंताओं को दूर करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

मैटर्स इंडिया के अनुसार, "आशा के तीर्थयात्री: समग्र पारिस्थितिकी की ओर" विषय पर आयोजित इस बैठक में 15 राज्यों के 24 धर्मसंघों के प्रतिभागियों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों ने सामाजिक वास्तविकताओं पर प्रकाश डाला और पर्यावरणीय मुद्दों तथा हाशिए पर पड़े समुदायों के विकास में बाधा डालनेवाली संरचनात्मक बाधाओं पर सक्रिय प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता पर बल दिया।

पर्यावरण और मानवीय संकटों को संबोधित करते हुए

सभा ने पर्यावरण और मानवीय संकटों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। प्रतिभागियों ने कहा कि आर्थिक विकास का बढ़ता "धर्म", प्राकृतिक संसाधनों के वस्तुकरण और पूंजीकरण के साथ-साथ पर्यावरण एवं मानवता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।

सुसमाचार मूल्यों पर आधारित व्यक्तिगत परिवर्तन का पालन करते हुए, समूह ने “हमारे आमघर” को बचाने के लिए “सरल जीवनशैली अपनाने, गरीबों के करीब रहने और अनावश्यक उपभोग और अपव्यय से बचने” का फैसला किया।

सभा ने संरचनात्मक परिवर्तन का आह्वान किया, तथा “मात्र दिखावे वाली गतिविधियों या सतही उपायों” से आगे बढ़कर कार्रवाई करने का आग्रह किया। प्रमुख कार्य योजनाओं में से एक पर्यावरण विरोधी नीतियों और कानूनों का साहसपूर्वक विरोध करना था, जो अमीरों को लाभ पहुँचाते हैं, जबकि गरीबों के मानवाधिकारों की उपेक्षा करते हैं।

मंच ने ऐसे संकटों से उबरने के लिए "विकेंद्रीकरण के माध्यम से लोकतंत्रीकरण" और "लोगों को लोकतंत्र की नींव के रूप में मान्यता देने" के महत्व पर जोर दिया।

इन चुनौतियों के जवाब में, सदस्यों ने गहन शोध में शामिल होने, प्रामाणिक डेटा का दस्तावेजीकरण करने और बच्चों और युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया। उन्होंने पृथ्वी की रक्षा करने और विकास परियोजनाओं के लिए लोगों को बेदखल करने का विरोध करने के लिए व्यक्तियों और समूहों के साथ सहयोग बढ़ाने की भी प्रतिबद्धता जताई।

मंच की सदस्य सिस्टर रोजलिन करकट्टू एससीएन ने वाटिकन न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "कार्य योजना व्यावहारिक और भविष्योन्मुखी दोनों है।" "हम मंच के संशोधित संविधान को मंजूरी देकर खुश हैं।"

न्याय और शांति के लिए धर्मसंघी मंच 1987 में स्थापित, धर्मसंघी महिलाओं और पुरुषों का एक दल है जो कलीसिया के भीतर और बड़े पैमाने पर समाज में न्याय के लिए काम कर रहा है।

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26 अक्तूबर 2024, 15:34
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