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19 जुलाई, 2024 को संत मेरी वोकेशनल/टेक्निकल सीनियर हाई स्कूल के छात्रों के साथ सिस्टर जॉय अबुह 19 जुलाई, 2024 को संत मेरी वोकेशनल/टेक्निकल सीनियर हाई स्कूल के छात्रों के साथ सिस्टर जॉय अबुह  #SistersProject

घाना: मानव तस्करी के खिलाफ स्कूलों में जागरूकता अभियान चला रही हैं धर्मबहनें

रोजरी की माता मरियम की मिशनरी धर्मबहनें पूर्वी घाना के क्वाहू अफ़्राम प्लेन्स के स्कूलों में मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम चला रही हैं। घाना के लिए तालिथा कुम नेटवर्क की प्रतिनिधि सिस्टर जॉय अबुह कहती हैं, "हम उन्हें कुछ ऐसी तरकीबों के बारे में बताते हैं, जिनका इस्तेमाल अपराधी अपने लक्ष्य को पाने के लिए करते हैं।"

सिस्टर सिल्वी लुम चो, एमएसएचआर

घाना, मंगलवार 20 अगस्त 2024 (वाटिकन न्यूज़) : पश्चिमी अफ्रीका के घाना के पूर्वी क्षेत्र में क्वाहू अफ्राम प्लेन्स नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के स्कूलों के लिए डोनकोरक्रोम के तलिथा कुम नेटवर्क द्वारा मानव तस्करी के खिलाफ एक सतत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

अफ्राम प्लेन्स में जागरूकता के इस कार्यक्रम का नेतृत्व रोजरी की माता मरियम की मिशनरी धर्मबहनों द्वारा किया जा रहा है। धर्मबहनों का मिशन हर तरह की ज़रूरत वाले लोगों, खास तौर पर गरीब, उत्पीड़ित और शोषित लोगों तक पहुँचने का प्रयास है। इस पाठ्यक्रम का नेतृत्व तलिथा कुम प्रतिनिधि, सिस्टर जॉय अबुह द्वारा किया जा रहा है।

सिस्टर जॉय अबुह, एमएसएचआर, संत माइकेल जूनियर हाई स्कूल, डोनकोरक्रोम के छात्रों के साथ 18 जुलाई, 2024 को स्कूल में एक संवेदीकरण वार्ता के बाद मानव तस्करी के खिलाफ हाथ उठाते हुए।
सिस्टर जॉय अबुह, एमएसएचआर, संत माइकेल जूनियर हाई स्कूल, डोनकोरक्रोम के छात्रों के साथ 18 जुलाई, 2024 को स्कूल में एक संवेदीकरण वार्ता के बाद मानव तस्करी के खिलाफ हाथ उठाते हुए।

सिस्टर जॉय घाना के स्कूलों का दौरा करती हैं

नाइजीरिया में जन्मी मिशनरी, सिस्टर जॉय डोनकोरक्रोम एग्रीकल्चरल सीनियर हाई स्कूल में स्कूल आध्यत्मिक सलाहकार और शिक्षिका के रूप में काम करती हैं। 2024 की शुरुआत से, उन्होंने मानव तस्करी के अभिशाप के खिलाफ़ जागरुकता के लिए गांवों के कई स्कूलों का दौरा किया है और करना जारी रखा है।

जिन स्कूलों में हाल ही में अभियान चलाया गया है, उनमें शामिल हैं: संत माइकल जूनियर हाई स्कूल, डोनकोरक्रोम, अताकोरा बेसिक स्कूल, डोनकोरक्रोम, संत मेरी वोकेशनल/टेक्निकल सीनियर हाई स्कूल, आदिमरा और डोनकोरक्रोम एग्रीकल्चरल सीनियर हाई स्कूल।

अभियान का उद्देश्य छात्रों को उनके समुदायों में मानव तस्करी के विभिन्न रूपों की चिंताजनक व्यापकता के प्रति संवेदनशील बनाना है।

सिस्टर जॉय ने कहा, "हम उन्हें कुछ ऐसी तरकीबों के बारे में शिक्षित करते हैं, जिनका इस्तेमाल अपराधी अपने लक्ष्य को पाने के लिए करते हैं, जैसे कि उन्हें यह गलत विश्वास दिलाना कि उन्हें शहरों में नौकरी मिल जाएगी और वे अपने घर वापस अपने परिवार की देखभाल करने के लिए पर्याप्त पैसा बचा लेंगे।"

उन्होंने तस्करी में शामिल कुछ खतरों को रेखांकित किया, जिसमें पीड़ितों को वेश्यावृत्ति, स्थायी घरेलू नौकरानियों या जिसे कोई 'आधुनिक-दिन की गुलामी' कह सकता है, के अधीन किया जाना शामिल है, जिसमें उनकी इच्छा के विरुद्ध स्कूल जाने का कोई अवसर नहीं होता है, जिसे टीम ने उन स्कूलों में छात्रों के बीच जागरूकता के लिए लाया, जहाँ वे गए थे।

उन्होंने कहा, "हमने उन्हें सतर्क रहने और मानव तस्करी, बाल श्रम, जबरन विवाह और अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार की संदिग्ध घटनाओं की सूचना सुरक्षा के लिए नामित प्राधिकारी को देकर अपने भाई की रक्षा करने की सलाह दी।"

संत माइकेल जूनियर हाई स्कूल, डोनकोरक्रोम के छात्रों को प्रदर्शन करते हुए एक कक्षा में सिस्टर जॉय अबुह
संत माइकेल जूनियर हाई स्कूल, डोनकोरक्रोम के छात्रों को प्रदर्शन करते हुए एक कक्षा में सिस्टर जॉय अबुह

तालिथा कुम घाना नेटवर्क

सिस्टर जॉय ने समर्पित व्यक्तियों की आशा और प्रार्थना को साझा किया कि किसी दिन, मानव तस्करी समाप्त हो जाएगी, न केवल घाना में, बल्कि दुनिया के सभी हिस्सों में जहाँ यह प्रचलित है।

तालिथा कुम घाना नेटवर्क एक गैर-सरकारी संगठन है जो मार्च 2018 में अस्तित्व में आया। इसमें समर्पित पुरुष और महिलाएँ शामिल हैं, जिनमें कुछ आम लोग भी शामिल हैं।

घाना में समर्पित लोकधर्मियों, धर्मसमाजों के प्रमुख वरिष्ठों के सम्मेलन के तत्वावधान में, स्कूलों और समुदायों में वकालत और जागरुकता कार्यक्रमों के माध्यम से, विभिन्न स्तरों पर मौजूद मानव तस्करी और शोषण के खिलाफ लड़ने के लिए सहयोग का एक संगठनात्मक मॉडल बनाने के लिए मिलकर काम करते हैं, शहरों में 'हरे चरागाह' की तलाश में गाँवों को छोड़ने के जोखिम के बारे में जागरूकता पैदा करते हैं।

अशांत क्षेत्र के कुमासी जैसे बड़े शहरों में तालिथा कुम नेटवर्क अधिक सक्रिय है, क्योंकि यहां धार्मिक संस्थाएं सीधे पीड़ितों से संपर्क करती हैं, जबकि डोनकोरक्रोम जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर जागरूकता फैलाई जाती है, तथा पीड़ितों को अनुवर्ती कार्रवाई के लिए शहरी क्षेत्रों में भेजा जा सकता है।

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20 अगस्त 2024, 15:31
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